सुधांशु त्रिवेदी का कांग्रेस पर करारा हमला: सत्ता की बेचैनी में लोकतंत्र को बदनाम करने की साजिश रच रही कांग्रेस, देश में अराजकता फैलाना ही असली एजेंडा!
1 min read
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने राहुल गांधी को घेरा, चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वालों से पूछा—आपत्ति दर्ज कराने के संवैधानिक अवसरों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया?
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर अब तक के सबसे तीखे राजनीतिक हमलों में से एक करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर देश में राजनीतिक अस्थिरता और अराजकता का माहौल बनाना है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया में अपनी विफलताओं का जवाब नहीं दे पाती, तब चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने लगती है। भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत शुक्रवार को रायपुर पहुंचे डॉ. त्रिवेदी प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।
उन्होंने कांग्रेस के कथित वोट चोरी के आरोपों को निशाने पर लेते हुए सवाल किया कि यदि मतदाता सूची में गड़बड़ी थी, तो कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंट, जिला अध्यक्ष और प्रदेश इकाई ने निर्धारित समय पर आपत्तियां क्यों नहीं उठाईं? मतदाता सूची पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए अलग-अलग स्तरों पर वैधानिक व्यवस्था मौजूद है। इसके बावजूद कांग्रेस ने इन अवसरों का उपयोग क्यों नहीं किया? क्या कांग्रेस अपने ही बूथ एजेंटों, जिला अध्यक्षों और प्रदेश नेतृत्व की कार्यक्षमता पर सवाल उठा रही है?
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में निर्धारित समय और कानूनी प्रावधानों का पालन करने के बजाय बाद में आरोपों का राजनीतिक शोर खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की 45 दिन की समय-सीमा का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस से पूछा कि जिन चुनावों के परिणाम हाल ही में आए हैं, उनके फुटेज प्राप्त करने के लिए कांग्रेस ने क्या कदम उठाए हैं? केवल आरोप लगाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े नहीं किए जा सकते।
संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल, लेकिन अपनी जिम्मेदारी पर चुप्पी क्यों?
डॉ. त्रिवेदी ने कांग्रेस के राजनीतिक रवैये पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले एक दशक से कांग्रेस लगातार कभी चुनाव आयोग, कभी न्यायपालिका, कभी मीडिया, कभी सेना और कभी आर्थिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास करती रही है। उन्होंने राफेल, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी राजनीतिक संदेह पैदा करने की कोशिश की।
उन्होंने एलआईसी, भारतीय स्टेट बैंक और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने इन संस्थानों की स्थिति को लेकर भी नकारात्मक दावे किए, जबकि भाजपा के अनुसार इनके प्रदर्शन में सुधार हुआ है। कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन को लेकर उठाए गए सवालों को भी उन्होंने इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया।

‘सत्ता में लूट, समाज में फूट और भारत की संस्कृति से घृणा’—कांग्रेस पर तीखा प्रहार
भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कांग्रेस की विचारधारा पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के राजनीतिक चरित्र को लेकर जो सवाल उठाए हैं, वे देश की वर्तमान राजनीति में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समाज में विभाजनकारी विमर्श को बढ़ावा देती है और भारत की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर दोहरा रवैया अपनाती है।
डॉ. त्रिवेदी ने गोबर और गोमूत्र को लेकर कांग्रेस नेताओं के बयानों पर सवाल उठाते हुए भूपेश बघेल सरकार की पूर्ववर्ती योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने पूछा कि यदि गोबर और गोमूत्र को लेकर कांग्रेस के कुछ नेता उपहास करते हैं, तो छत्तीसगढ़ में इन्हीं विषयों पर योजनाएं क्यों संचालित की गई थीं? उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले अपने नेताओं के बयानों और राजनीतिक रुख में एकरूपता लानी चाहिए।
राहुल गांधी के आंदोलन पर सवाल, त्योहारों के कारोबार को प्रभावित करने की आशंका जताई
डॉ. त्रिवेदी ने राहुल गांधी के प्रस्तावित आंदोलन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली का वह क्षेत्र जहां आंदोलन की बात की जा रही है, उत्तर भारत के प्रमुख व्यापारिक और वाणिज्यिक केंद्रों में शामिल है। नवरात्रि से दीपावली और छठ तक के त्योहारों के दौरान पिछले वर्ष लगभग छह लाख करोड़ रुपये के कारोबार का उल्लेख करते हुए उन्होंने आशंका जताई कि ऐसे समय में आंदोलन से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
उन्होंने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं और उनके राजनीतिक बयानों पर भी सवाल उठाए। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी स्वयं अपनी लड़ाई ‘इंडियन स्टेट’ से होने की बात कह चुके हैं। ऐसे बयान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर गंभीर राजनीतिक बहस खड़ी करते हैं।
कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर तंज—जहां जनाधार नहीं, वहां चुनाव आयोग पर आरोप!
कांग्रेस के वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार करते हुए डॉ. त्रिवेदी ने विभिन्न राज्यों में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का हवाला दिया। उन्होंने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और ओडिशा सहित कई राज्यों में कांग्रेस के कमजोर होते जनाधार का उल्लेख किया।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले उन राज्यों में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, जहां वर्षों से पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। केवल चुनावी हार के बाद व्यवस्था पर सवाल खड़े करने से जनता का विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के कथित दोहरे रवैये पर भी सवाल उठाया। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस को जीत मिलती है, वहां चुनावी व्यवस्था ठीक नजर आती है, लेकिन जहां हार मिलती है, वहां उसी व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने लगते हैं। यह राजनीतिक सुविधा के अनुसार लोकतांत्रिक संस्थाओं का मूल्यांकन करने जैसा है।
भाजपा के विकास मॉडल बनाम कांग्रेस का अराजकता मॉडल
डॉ. त्रिवेदी ने भाजपा की सरकारों के कामकाज का उल्लेख करते हुए कहा कि गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भाजपा सरकारों ने विकास, कृषि, कानून-व्यवस्था और जनकल्याण के क्षेत्र में अपनी कार्यशैली से उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। इसके विपरीत उन्होंने कांग्रेस शासित राज्यों में नेताओं के बीच राजनीतिक खींचतान का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर सत्ता संघर्ष और आपसी टकराव की राजनीति हावी रहती है।
छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार का जिक्र करते हुए उन्होंने भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव के बीच रहे राजनीतिक मतभेदों को याद किया। राजस्थान और कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है। भाजपा जनता के सामने विकास और सुशासन का मॉडल प्रस्तुत कर रही है, जबकि कांग्रेस के पास सकारात्मक एजेंडे के बजाय आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति रह गई है।

‘भारत में अराजकता फैलाने के मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे’
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों में राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के उदाहरण देकर भारत में भी वैसी परिस्थितियां पैदा होने की उम्मीद करना गलत है। भारत का लोकतंत्र मजबूत है और देश की जनता लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत को समझती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है और देश की प्रगति को बाधित करने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी।
उन्होंने कांग्रेस के बांग्लादेश संबंधी राजनीतिक बयानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की तुलना दूसरे देशों की राजनीतिक परिस्थितियों से करते समय राष्ट्रीय हित और देश की उपलब्धियों को ध्यान में रखना चाहिए।
डॉ. त्रिवेदी ने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की जनता से अपील करते हुए कहा कि देश के विकास के खिलाफ चलाए जा रहे किसी भी भ्रामक राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनने से बचना चाहिए। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को बिना ठोस आधार के निशाना बनाना उचित नहीं है।
भाजपा का स्पष्ट संदेश—लोकतंत्र के नाम पर भ्रम नहीं, तथ्यों के आधार पर जवाब दे कांग्रेस
पत्रकार वार्ता के माध्यम से भाजपा ने कांग्रेस के वोट चोरी के आरोपों और प्रस्तावित आंदोलन को लेकर अपना आक्रामक राजनीतिक रुख स्पष्ट किया। डॉ. त्रिवेदी ने कांग्रेस से चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और सीसीटीवी फुटेज को लेकर उठाए गए सवालों पर ठोस जवाब देने की चुनौती दी।
इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, डॉ. नवीन मार्कंडेय, पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता शिवरतन शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन, मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पांडेय तथा प्रदेश मीडिया संयोजक हेमंत पाणिग्रही सहित अनेक वरिष्ठ भाजपा नेता उपस्थित रहे।
