राखड़ की धूल, डंपिंग का खतरा और सुरक्षा पर सवाल! दर्री-जमनीपाली में आखिर कब जागेगा CSPGCL प्रबंधन?
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नवागांव से मड़वामहुआ तक फ्लाई ऐश डंपिंग को लेकर बढ़ी चिंता, टाउनशिप के बीच राखड़ डंप हटाने और पर्यावरणीय प्रभावों की जांच की मांग; युवाओं ने ED को सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
Tirentra times Korba **//**//कोरबा। बिजली उत्पादन की जरूरत अपनी जगह है, लेकिन क्या इसकी कीमत आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और कृषि भूमि को जोखिम में डालकर चुकाई जानी चाहिए? दर्री-जमनीपाली क्षेत्र में फ्लाई ऐश डंपिंग, राखड़ उड़ने से वायु प्रदूषण की आशंका, जलस्रोतों पर संभावित दुष्प्रभाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने CSPGCL प्रबंधन की जिम्मेदारी पर बहस तेज कर दी है। क्षेत्र के युवाओं ने इन समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL), एचटीपीएस कोरबा पश्चिम के कार्यपालक निदेशक (ED) को ज्ञापन सौंपकर ठोस कार्रवाई की मांग की है।
युवाओं का सवाल है कि जब बिजली उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण और आसपास के निवासियों की सुरक्षा भी कंपनी की जिम्मेदारी है, तो राखड़ डंपिंग स्थलों की सुरक्षा, धूल नियंत्रण, जल निकासी और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी को लेकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही है? हालांकि, ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर कंपनी प्रबंधन का पक्ष और संबंधित स्थलों की स्वतंत्र जांच सामने आने के बाद ही समस्याओं की वास्तविक स्थिति तथा जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

राखड़ कहां डंप हो रही है, सुरक्षा के इंतजाम कितने पुख्ता?
ज्ञापन में ग्राम नवागांव और मड़वामहुआ बस्ती के निकट स्थित राखड़ डंपिंग स्थलों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। युवाओं ने इन स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, रिटेनिंग वॉल और तटबंध की उचित व्यवस्था करने तथा जल निकासी सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके साथ ही टाउनशिप के मध्य स्थित राखड़ डंप को हटाने अथवा आवासीय क्षेत्र से सुरक्षित दूरी पर व्यवस्थित करने की मांग भी उठाई गई है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राखड़ का अनुचित भंडारण या अपर्याप्त धूल नियंत्रण आसपास के लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। तेज हवा में सूखी राख उड़ने से हवा की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है, जबकि बारिश के दौरान उचित जल निकासी और अपवाह नियंत्रण नहीं होने पर राख मिश्रित पानी आसपास की जमीन या जलस्रोतों तक पहुंच सकता है। हालांकि, दर्री-जमनीपाली में इन प्रभावों की वास्तविक सीमा जानने के लिए वायु, पानी और मिट्टी की जांच तथा स्थल निरीक्षण आवश्यक है।
आखिर क्यों उठ रहे हैं ये सवाल?
फ्लाई ऐश बिजली उत्पादन के दौरान निकलने वाला उपोत्पाद है। इसके सुरक्षित प्रबंधन के लिए राखड़ का वैज्ञानिक तरीके से भंडारण, धूल उड़ने से रोकने के उपाय, तटबंधों की मजबूती, जल निकासी और नियमित निगरानी जरूरी होती है। यदि इनमें कहीं कमी रह जाती है, तो आसपास के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका पैदा हो सकती है।
दर्री-जमनीपाली क्षेत्र के युवाओं की मांग है कि प्रबंधन केवल कागजी जवाब तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित डंपिंग स्थलों का स्थलीय निरीक्षण कराए और सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे। नवागांव, मड़वामहुआ तथा टाउनशिप के निकट राखड़ डंपिंग से जुड़े मुद्दों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
चोरियों से लेकर पुराने क्वार्टरों तक, प्रबंधन से जवाबदेही की मांग
ज्ञापन में एचटीपीएस प्लांट और टाउनशिप में लगातार हो रही चोरियों का मुद्दा भी उठाया गया है। युवाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और संबंधित घटनाओं की जांच की मांग की है। इसके अतिरिक्त पुराने आवासीय क्वार्टरों के ध्वस्तीकरण से संबंधित मामलों की जांच कराने तथा निर्माण कार्यों में स्थानीय युवाओं को नियमानुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई है।
युवाओं का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र के विकास में आसपास के स्थानीय लोगों की समस्याओं और अपेक्षाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। क्षेत्र के निवासियों को सुरक्षित वातावरण, बेहतर नागरिक सुविधाएं और नियमानुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रबंधन को ठोस पहल करनी चाहिए।
CSR की राशि पर भी उठी आवाज, स्थानीय विकास में पारदर्शिता की मांग
ज्ञापन में कंपनी की कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) निधि के उपयोग का मुद्दा भी शामिल है। युवाओं ने मांग की है कि इस राशि का उपयोग स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, पर्यावरण संरक्षण और अन्य जरूरी सामुदायिक सुविधाओं के विकास में पारदर्शी तरीके से किया जाए।
स्थानीय क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के साथ जनसुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। इसलिए CSR के तहत स्वीकृत कार्यों, उनके खर्च और स्थानीय समुदाय को मिले लाभ की जानकारी सार्वजनिक होने से पारदर्शिता बढ़ सकती है।

ज्ञापन के बाद अब कार्रवाई की बारी
दर्री-जमनीपाली क्षेत्र के युवाओं ने स्पष्ट किया है कि यदि समस्याओं का शीघ्र और उचित निराकरण नहीं किया गया, तो वे जनहित में चरणबद्ध एवं लोकतांत्रिक आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। उनकी मांग है कि संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण हो, राखड़ डंपिंग स्थलों की सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिति की जांच कराई जाए तथा समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में दिव्यांश अग्निहोत्री, योगेश जायसवाल, पुष्पेंद्र भारिया, किशोर साहू, विजय साहिस, भुवनेश्वर दुबे, नीरज यादव, मोनेश टंडन सहित अन्य युवा उपस्थित रहे।
अब निगाहें CSPGCL प्रबंधन पर हैं। क्या संबंधित डंपिंग स्थलों का निरीक्षण कराकर स्थिति स्पष्ट की जाएगी? क्या राखड़ उड़ने, जल निकासी, तटबंधों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का जवाब मिलेगा? और क्या स्थानीय लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए ठोस समयसीमा तय होगी? इन सवालों के जवाब कार्रवाई से ही मिलेंगे। दर्री-जमनीपाली के लोगों की अपेक्षा है कि बिजली उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य और स्थानीय हितों को भी समान प्राथमिकता दी जाए।
