Korba Health News: गंभीर ब्रेन स्ट्रोक से थम गई थी आवाज, शरीर का बायां हिस्सा भी छोड़ चुका था साथ; शिवाय हॉस्पिटल में इलाज और फिजियोथेरेपी से 63 वर्षीय लक्ष्मी सोरी के जीवन में लौटी मुस्कान
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मौत के खतरे से जूझते परिवार को मिली राहत, उपचार और पुनर्वास के सहारे घर लौटीं लक्ष्मी सोरी; डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा टीम के प्रयासों ने जगाई नई उम्मीद
Tirentra times Korba **//**// कोरबा। एक सुबह अचानक चक्कर, उल्टियां और बेहोशी… बोलने की क्षमता प्रभावित, शरीर का बायां हिस्सा सुन्न और याददाश्त पर भी असर। परिवार के लिए यह किसी भयावह सदमे से कम नहीं था। जिस अपने को सामान्य हालत में देखा था, वही अचानक गंभीर बीमारी से जूझने लगीं। हर पल चिंता और अनिश्चितता के बीच परिवार ने बिना देर किए उन्हें अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया। इसके बाद शुरू हुआ उपचार, देखभाल और पुनर्वास का ऐसा सफर, जिसने परिवार के मन में फिर से उम्मीद जगाई।
कोरबा के न्यू बस स्टैंड, टी.पी. नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल में 63 वर्षीय श्रीमती लक्ष्मी सोरी के उपचार और स्वस्थ होकर घर लौटने की कहानी सामने आई है। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, 14 मई 2026 की सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। तेज चक्कर, उल्टियां और बेहोशी के साथ शरीर के बाएं हिस्से में कमजोरी और सुन्नपन तथा बोलने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आए। अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के बाद गंभीर इस्कीमिक ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति का पता चला।
यह ऐसी स्थिति थी, जिसमें समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन और उपचार बेहद महत्वपूर्ण था। परिवार ने तत्काल अस्पताल पहुंचकर सही समय पर चिकित्सा सहायता लेने की दिशा में कदम उठाया।
डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में शुरू हुआ उपचार
गंभीर स्थिति को देखते हुए शिवाय हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन एवं डायरेक्टर डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने उपचार शुरू किया। मरीज की स्थिति पर निगरानी रखने के साथ आवश्यक चिकित्सा देखभाल की गई। स्ट्रोक के कारण प्रभावित हुई शारीरिक क्षमता को देखते हुए आगे की रिकवरी पर भी ध्यान दिया गया।
ब्रेन स्ट्रोक में मस्तिष्क के किसी हिस्से तक रक्त की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे शरीर के एक ओर कमजोरी, बोलने में परेशानी और अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे मामलों में शुरुआती लक्षणों को पहचानना और तत्काल अस्पताल पहुंचना महत्वपूर्ण होता है।
लक्ष्मी सोरी के मामले में परिवार की तत्परता के बाद उपचार की प्रक्रिया आगे बढ़ी। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज की देखभाल के साथ परिजनों के लिए भी यह समय धैर्य और उम्मीद बनाए रखने की परीक्षा था।

केवल उपचार नहीं, फिजियोथेरेपी ने भी निभाई अहम भूमिका
ब्रेन स्ट्रोक के बाद मरीज को स्वस्थ जीवन की ओर लौटाने में केवल शुरुआती चिकित्सा ही नहीं, बल्कि नियमित देखभाल और पुनर्वास की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लक्ष्मी सोरी की रिकवरी में फिजियोथेरेपी के माध्यम से उनकी शारीरिक कार्यक्षमता और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार लाने के प्रयास किए गए।
फिजियोथेरेपिस्ट अमन श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में पुनर्वास संबंधी गतिविधियां कराई गईं। इसके साथ स्पीच थेरेपी और मेडिसिन विभाग के समन्वय से बोलने तथा याददाश्त से जुड़ी परेशानियों में सुधार की दिशा में प्रयास किए गए।
स्वस्थ होने का यह सफर एक दिन में पूरा होने वाला नहीं था। लगातार देखभाल, पुनर्वास और परिवार के सहयोग के साथ उनकी स्थिति में सुधार की दिशा में कदम बढ़ते गए। धीरे-धीरे बेहतर होती स्थिति ने परिजनों को राहत दी और उनके मन में सामान्य जीवन की ओर लौटने की उम्मीद मजबूत हुई।
गंभीर हालत से घर वापसी तक, परिवार के लिए भावुक कर देने वाला सफर
अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपचार और पुनर्वास के बाद लक्ष्मी सोरी की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। वह होश में आईं, सामान्य रूप से बातचीत करने लगीं और अपने पैरों पर चलने की स्थिति में घर लौटीं।
परिवार के लिए यह राहत और खुशी का बड़ा पल था। जिस समय उन्हें अस्पताल लाया गया था, उस समय स्थिति बेहद चिंताजनक थी। ऐसे में दोबारा बातचीत कर पाना और चलने-फिरने की क्षमता हासिल करना परिजनों के लिए नई उम्मीद लेकर आया।
लक्ष्मी सोरी की यह कहानी बताती है कि गंभीर बीमारी के बाद स्वस्थ होने की राह में समय पर चिकित्सा, मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार, नियमित पुनर्वास और परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, प्रत्येक मरीज की स्थिति और रिकवरी अलग होती है तथा परिणाम बीमारी की गंभीरता और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
शिवाय हॉस्पिटल की चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों की चर्चा
लक्ष्मी सोरी की रिकवरी शिवाय हॉस्पिटल की चिकित्सा सेवाओं और पुनर्वास संबंधी प्रयासों का एक उल्लेखनीय मामला है। डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा देखभाल, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और मेडिसिन विभाग के समन्वय से मरीज को बेहतर स्थिति में घर लौटने में सहयोग मिला।
यह मामला इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि ब्रेन स्ट्रोक के बाद मरीज की देखभाल में पुनर्वास को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित अभ्यास, निगरानी और आगे की देखभाल मरीज की कार्यक्षमता में सुधार लाने में मदद कर सकती है।
स्ट्रोक के लक्षणों को न करें नजरअंदाज, हर मिनट है महत्वपूर्ण
ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सा आपातस्थिति है। इसके लक्षण अचानक सामने आ सकते हैं। चेहरे का एक ओर झुकना, एक हाथ या पैर में कमजोरी अथवा सुन्नपन, बोलने या बात समझने में परेशानी, अचानक संतुलन बिगड़ना या देखने में दिक्कत होना इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं।
ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें और घरेलू उपचार के भरोसे समय न गंवाएं। लक्षण शुरू होने का समय याद रखें और चिकित्सकों को इसकी जानकारी दें। स्ट्रोक के कुछ उपचार सीमित समय के भीतर ही दिए जा सकते हैं, इसलिए जल्द अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।
शिवाय हॉस्पिटल, न्यू बस स्टैंड, टी.पी. नगर, कोरबा से जुड़ा लक्ष्मी सोरी का यह मामला एक परिवार की चिंता से राहत तक के सफर को सामने लाता है। गंभीर बीमारी के बीच समय पर चिकित्सा सहायता और पुनर्वास ने उनके स्वस्थ होने की राह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके घर लौटने से परिवार में फिर खुशियां लौटीं और यह संदेश मिला कि स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानकर तत्काल कदम उठाना जिंदगी की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
