कोरबा की सड़कों को मिलेगी नई मजबूती, 24 करोड़ से अधिक की लागत से 20 प्रमुख मार्गों का होगा डामरीकरण
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उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने सोनालिया पुल से ओवरब्रिज मार्ग पर चल रहे कार्य का किया निरीक्षण, अधिकारियों को गुणवत्ता और समय-सीमा का पालन करने के निर्देश
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा शहर की प्रमुख सड़कों को बेहतर, मजबूत और सुगम बनाने के लिए डामरीकरण कार्य शुरू हो गया है। शहर की सड़कों की स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से नगर निगम क्षेत्र के 20 प्रमुख मार्गों के डामरीकरण के लिए 24 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। शनिवार को उद्योग, वाणिज्य एवं आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन और महापौर संजू देवी राजपूत ने सोनालिया पुल से ओवरब्रिज मार्ग पर चल रहे डामरीकरण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएं।
सिर्फ डामर बिछाना नहीं, लंबे समय तक टिकाऊ सड़क बनाना हो प्राथमिकता
कोरबा में सड़कों के डामरीकरण को लेकर आम नागरिकों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि सड़कें केवल कुछ महीनों तक अच्छी दिखाई देने के बजाय लंबे समय तक मजबूत बनी रहें। अक्सर बरसात के दौरान सड़कों पर पानी भरने, जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने और निर्माण की गुणवत्ता में कमी के कारण सड़कें उखड़ने तथा गड्ढे बनने की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसी स्थिति में जनता की परेशानी बढ़ने के साथ सरकारी धन के दोबारा खर्च होने की आशंका भी बनी रहती है।
इसीलिए शहर में शुरू हुए डामरीकरण कार्यों में इस बात पर विशेष ध्यान देना जरूरी है कि सड़क की मजबूती के साथ जल निकासी की व्यवस्था भी दुरुस्त हो। सड़क निर्माण से पहले उसकी मौजूदा स्थिति, आधार की मजबूती, आवश्यकतानुसार सतह की तैयारी और ढलान का तकनीकी परीक्षण किया जाना चाहिए। जहां जरूरत हो, वहां नालियों और पानी की निकासी के रास्तों को भी दुरुस्त किया जाए, ताकि बारिश का पानी सड़क पर जमा न रहे और डामर की परत को नुकसान न पहुंचे।
तकनीकी मानकों के अनुरूप हो निर्माण, तभी बचेगा सरकारी खजाना
सड़क की गुणवत्ता केवल डामर की मोटाई से तय नहीं होती। इसके लिए सड़क के आधार की मजबूती, निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार डामर मिश्रण, बिछाने के समय उचित तापमान, मशीनों से सही तरीके से दबाई गई परत और सड़क की निर्धारित मोटाई जैसे पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है। इसके साथ ही सड़क के किनारों, चौराहों, नालियों और पहले से मौजूद गड्ढों वाले हिस्सों का भी समुचित सुधार किया जाना चाहिए।
निर्माण के दौरान तकनीकी अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण और आवश्यक गुणवत्ता परीक्षण किए जाने चाहिए। यदि किसी हिस्से में मानकों के अनुरूप काम नहीं होता है, तो समय रहते सुधार कराया जाना चाहिए। इससे सड़क की आयु बढ़ाने, बार-बार मरम्मत की जरूरत कम करने और जनता के पैसे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बरसात में सड़क न उखड़े, इसके लिए अभी से हो ठोस तैयारी
कोरबा जैसे शहर में सड़क निर्माण के दौरान वर्षा जल की निकासी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि सड़क की सतह पर पानी लगातार जमा रहता है, तो समय के साथ डामर की परत और नीचे की संरचना प्रभावित हो सकती है। इसलिए डामरीकरण के साथ उचित ढलान, जल निकासी और सड़क के आसपास की नालियों की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है।
नागरिकों की अपेक्षा है कि इस बार तैयार होने वाली सड़कें बारिश के दौरान भी टिकाऊ रहें और जगह-जगह गड्ढे बनने से लोगों को परेशानी न उठानी पड़े। सड़क निर्माण का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब उसकी गुणवत्ता का असर कई वर्षों तक दिखाई दे। मजबूत सड़कें दुर्घटनाओं और यातायात संबंधी परेशानियों को कम करने में भी सहायक हो सकती हैं।

24 करोड़ से अधिक की स्वीकृति, 20 प्रमुख मार्गों पर होगा काम
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के प्रयासों से नगर निगम क्षेत्र के 20 प्रमुख मार्गों के डामरीकरण के लिए 24 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इन कार्यों का भूमिपूजन 19 अक्टूबर को कोसाबाड़ी चौक पर किया गया था। इसके बाद शनिवार को सोनालिया पुल से ओवरब्रिज मार्ग पर डामरीकरण कार्य प्रारंभ हुआ, जिसका मंत्री और महापौर ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान मंत्री देवांगन ने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने तथा नागरिकों को बेहतर और सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया। साथ ही निर्माण के दौरान यातायात व्यवस्था का ध्यान रखने और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से बचाने के निर्देश भी दिए।
जनता के पैसे का हो सदुपयोग, जवाबदेही के साथ पूरे हों कार्य
सड़कों के निर्माण पर खर्च होने वाली राशि जनता के पैसे से आती है। इसलिए यह जरूरी है कि प्रत्येक मार्ग का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार हो और उसकी गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाए। काम पूरा होने के बाद भी सड़क की स्थिति पर नजर रखी जाए, ताकि शुरुआती खराबियों को समय रहते ठीक किया जा सके और छोटी समस्या बड़ी क्षति में न बदले।
कोरबा के नागरिकों को उम्मीद है कि 24 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृत राशि से होने वाले इन कार्यों का लाभ लंबे समय तक मिलेगा। शहर को ऐसी सड़कें चाहिए, जिन पर आवागमन सुगम हो, बारिश के मौसम में पानी जमा होने से नुकसान न हो और कुछ ही समय बाद मरम्मत की नौबत न आए। गुणवत्तापूर्ण निर्माण, बेहतर जल निकासी और प्रभावी निगरानी से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि विकास कार्य टिकाऊ हों और सरकारी धन का सदुपयोग हो।
इस अवसर पर नगर निगम के अधीक्षण अभियंता भूषण उरांव, प्रभारी कार्यपालन अभियंता रुचि वर्मा, एमआईसी सदस्य नरेंद्र देवांगन, चंद्रलोक सिंह, मुकुंद कंवर, प्रफुल्ल तिवारी, योगेश मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
