स्कूल पहुंचे मंडल अध्यक्ष, बच्चों से पूछे सवाल तो खुली पढ़ाई की हकीकत
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देवपहरी के कनसरा और डीडासराई स्कूलों का औचक निरीक्षण, उपस्थिति से लेकर शिक्षा गुणवत्ता और मध्यान्ह भोजन तक की परखी व्यवस्था
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// कोरबा। गांव के स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति दर्ज होना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है या नहीं, इसकी भी लगातार निगरानी जरूरी है। इसी उद्देश्य को लेकर देवपहरी पंचायत अंतर्गत प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों का भाजपा मंडल अध्यक्ष हरिशंकर यादव ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विद्यालयों की व्यवस्थाओं, बच्चों की उपस्थिति, पढ़ाई के स्तर, शिक्षकों की उपलब्धता और मध्यान्ह भोजन व्यवस्था की जमीनी स्थिति का जायजा लिया गया।

कनसरा माध्यमिक शाला में बच्चों से सीधे संवाद
माध्यमिक शाला कनसरा पहुंचकर हरिशंकर यादव ने शिक्षकों से विद्यालय की व्यवस्थाओं और बच्चों की पढ़ाई के संबंध में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने विद्यार्थियों से सामान्य विषयों पर सवाल-जवाब किए। बातचीत के दौरान कुछ बच्चों के जवाब अपेक्षित स्तर के नहीं मिलने पर शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंता सामने आई। निरीक्षण के दौरान कुछ कर्मचारियों के अनुपस्थित होने की जानकारी भी मिली।
विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति लगभग 50 से 60 प्रतिशत रहने की बात शिक्षकों द्वारा बताई गई। इस पर अभिभावकों से लगातार संपर्क करने, बैठक आयोजित करने और बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

मध्यान्ह भोजन व्यवस्था भी जांची
निरीक्षण के दौरान विद्यालय में मिलने वाले मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था का भी जायजा लिया गया। स्कूल में बच्चों को केवल कक्षा तक सीमित रखने के बजाय उनकी नियमित उपस्थिति, भोजन और पढ़ाई—तीनों व्यवस्थाओं को साथ लेकर चलने की जरूरत पर चर्चा हुई।
डीडासराई में 99 प्रतिशत उपस्थिति, लेकिन पढ़ाई में सुधार की जरूरत
इसके बाद प्राथमिक शाला डीडासराई का निरीक्षण किया गया। यहां बच्चों की उपस्थिति लगभग 99 प्रतिशत बताई गई। बड़ी संख्या में बच्चों के नियमित स्कूल पहुंचने के बावजूद उनकी शैक्षणिक स्थिति में और सुधार की आवश्यकता महसूस की गई।
निरीक्षण के दौरान रसोइया के हड़ताल पर होने की जानकारी मिली। ऐसी स्थिति में बच्चों और शिक्षिका के सहयोग से मध्यान्ह भोजन तैयार किया गया। वहीं शिक्षिका द्वारा बच्चों की पढ़ाई के प्रति किए जा रहे प्रयास भी निरीक्षण के दौरान सामने आए।
स्कूल आ रहे बच्चे, लेकिन घर पर पढ़ाई की कमी
शिक्षिका ने बताया कि बच्चे नियमित रूप से विद्यालय आते हैं, लेकिन घर पर गृहकार्य करने और पढ़ाई दोहराने की आदत काफी कम है। इससे यह सवाल भी सामने आता है कि विद्यालय में होने वाली पढ़ाई को घर के वातावरण और अभिभावकों के सहयोग से किस तरह मजबूत किया जाए।
गांव के स्कूलों की चुनौती सिर्फ उपस्थिति नहीं
ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों के सामने कई तरह की व्यावहारिक चुनौतियां होती हैं। दूर-दराज के गांवों में अभिभावकों की आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियां, घर पर पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल की कमी और स्कूल की व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याएं बच्चों की शिक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में केवल उपस्थिति का आंकड़ा पर्याप्त नहीं है। बच्चों को नियमित उपस्थिति के साथ कक्षा के अनुरूप पढ़ने-लिखने और समझने का स्तर हासिल कराना भी उतना ही जरूरी है।
स्कूल में क्या होना चाहिए?
विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक एवं कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति, स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण, व्यवस्थित मध्यान्ह भोजन, नियमित शैक्षणिक मूल्यांकन, बच्चों के साथ संवाद और अभिभावक-शिक्षक बैठकों की निरंतरता जरूरी है। खासकर जिन बच्चों को पढ़ाई में कठिनाई हो रही है, उनके लिए अतिरिक्त अभ्यास और व्यक्तिगत मार्गदर्शन की व्यवस्था शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर कर सकती है।
अगले महीने फिर होगी स्थिति की समीक्षा
मंडल अध्यक्ष हरिशंकर यादव ने बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जो बच्चे नियमित रूप से विद्यालय आते हैं, उनकी पढ़ाई में भी अपेक्षित गुणवत्ता दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार के लिए प्रयास करने तथा अगले माह पुनः विद्यालयों का जायजा लेने की बात कही।
देवपहरी के इन विद्यालयों का निरीक्षण एक महत्वपूर्ण सवाल सामने रखता है—बच्चे स्कूल तक पहुंच रहे हैं, लेकिन क्या स्कूल उन्हें उस स्तर की शिक्षा दे पा रहा है जिसकी उन्हें भविष्य के लिए जरूरत है? इस सवाल का जवाब केवल निरीक्षण से नहीं, बल्कि विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक और संबंधित विभाग के निरंतर संयुक्त प्रयास से ही सुनिश्चित किया जा सकता है।







