September 21, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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1 छत्तीसगढ़ बटालियन से शुरू हुआ सफर एआईटीएससी तक पहुंचा, अनुशासन और मेहनत के दम पर हासिल की बड़ी उपलब्धि
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**//  कोरबा। सपनों को मंजिल तक पहुंचाने के लिए सिर्फ प्रतिभा ही नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य और लगातार मेहनत की जरूरत होती है। कमला नेहरू कॉलेज के बीबीए अंतिम वर्ष के एनसीसी कैडेट राहुल विश्वकर्मा ने इसी जज्बे को साबित करते हुए अखिल भारतीय थल सैनिक कैंप (एआईटीएससी) में शानदार प्रदर्शन कर कोरबा और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। दिल्ली में 1 से 11 सितंबर तक आयोजित प्रतिष्ठित थल सैनिक कैंप में शामिल होकर राहुल ने अपनी प्रतिभा और प्रशिक्षण का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
दिल्ली से लौटने के बाद राहुल विश्वकर्मा ने कमला नेहरू कॉलेज पहुंचकर प्राचार्य डाॅ. प्रशांत बोपापुरकर से मुलाकात की। प्राचार्य ने राहुल की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें उपहार प्रदान कर सम्मानित किया और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर कॉलेज की एनसीसी प्रभारी लेफ्टिनेंट अनिता यादव भी उपस्थित रहीं।
राहुल की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि अखिल भारतीय थल सैनिक कैंप तक पहुंचने का सफर बेहद कठिन और प्रतिस्पर्धात्मक होता है। कैडेट्स को शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन, प्रशिक्षण और विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में लगातार खुद को साबित करना पड़ता है। राहुल ने हर चुनौती को स्वीकार करते हुए अपने प्रदर्शन को लगातार बेहतर बनाया और आखिरकार दिल्ली के राष्ट्रीय स्तर के कैंप तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
प्राचार्य डाॅ. प्रशांत बोपापुरकर ने कहा कि राहुल विश्वकर्मा की उपलब्धि महाविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। उनकी सफलता अन्य विद्यार्थियों और एनसीसी कैडेट्स के लिए प्रेरणादायी है। राहुल ने यह साबित किया है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर परिश्रम के बल पर कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
राहुल की इस सफलता पर उनके पिता राजेश कुमार और माता श्रीमती रमा विश्वकर्मा ने भी खुशी जताई तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
छह कठिन पड़ाव पार कर दिल्ली तक पहुंचा राहुल का सफर
अखिल भारतीय थल सैनिक कैंप तक पहुंचना किसी एक परीक्षा को पास करने भर की उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसके लिए चयन और प्रतिस्पर्धा के कई कठिन पड़ाव पार करने पड़ते हैं। राहुल विश्वकर्मा ने सबसे पहले 1 छत्तीसगढ़ बटालियन, कोरबा की चयन प्रक्रिया में प्रथम स्थान हासिल किया। इसके बाद उनके सामने लगातार कई स्तरों की कड़ी प्रतिस्पर्धा रही।
चयन प्रक्रिया के दौरान यूनिट-बटालियन स्तर से आगे बढ़ते हुए कंबाइंड एनुअल ट्रेनिंग कैंप, इंटर-बटालियन कैंप, इंटर ग्रुप कॉम्पिटिशन/ग्रुप कैंप, प्री-टीएससी कैंप और अंत में फाइनल थल सैनिक कैंप यानी एआईटीएससी तक का सफर तय करना पड़ा।
हर चरण में कैडेट्स को अपनी क्षमता साबित करनी होती है और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ना पड़ता है। कई स्तरों पर टॉप प्रदर्शन करने के बाद ही अगले पड़ाव का रास्ता खुलता है। राहुल ने इसी कठिन चयन प्रक्रिया में निरंतर बेहतर प्रदर्शन करते हुए दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय थल सैनिक कैंप तक अपनी जगह बनाई।
राहुल विश्वकर्मा की यह उपलब्धि सिर्फ एक कैडेट की सफलता नहीं, बल्कि कोरबा की युवा प्रतिभा, एनसीसी प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प की मिसाल बनकर सामने आई है।

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