600 ग्राम से 2.070 किलो तक: 90 दिन NICU में जूझता रहा नन्हा जीवन, अब घर लौटने की तैयारी
1 min read



25 सप्ताह में जन्मे अति-प्रीमैच्योर बच्चे ने कठिन चिकित्सा सफर में हासिल की बड़ी कामयाबी, डॉ. नागेंद्र बागरी और NICU टीम की सतत निगरानी में लगातार बढ़ा वजन
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// कोरबा। चार साल के लंबे इंतजार के बाद जब विजय समर्थ और उनकी पत्नी के घर खुशियों ने दस्तक दी, तो उनके सामने एक ऐसी चुनौती भी आ खड़ी हुई, जिसने पूरे परिवार को चिंता में डाल दिया। महज 25 सप्ताह के गर्भकाल में जन्मे इस नवजात का वजन सिर्फ 600 ग्राम था। बेहद कम वजन और समय से पहले जन्म के कारण बच्चे को तत्काल विशेष नवजात देखभाल की आवश्यकता पड़ी। शिवाय हॉस्पिटल, कोरबा की NICU टीम ने बच्चे को तत्काल भर्ती कर उपचार और लगातार निगरानी शुरू की।
15 जून 2026 की रात करीब 1 बजे सर्वमंगला नगर निवासी गर्भवती महिला को गंभीर एवं आपात स्थिति में शिवाय हॉस्पिटल लाया गया। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद स्थिति को देखते हुए तत्काल आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की गई और करीब 2:20 बजे प्रसव हुआ। जन्म के समय नवजात का वजन महज 600 ग्राम था। इसके बाद उसे तत्काल NICU में विशेषज्ञ चिकित्सा निगरानी में रखा गया।
90 दिन का सफर… हर दिन उम्मीद की नई किरण
600 ग्राम के इस अति-प्रीमैच्योर नवजात के लिए शुरुआती दौर बेहद चुनौतीपूर्ण था। करीब 90 दिनों तक NICU में बच्चे की लगातार निगरानी की गई। उसे विशेष नवजात देखभाल, श्वसन संबंधी सहायता, नियंत्रित तापमान और नियमित स्वास्थ्य मॉनिटरिंग की जरूरत रही।
इस चुनौतीपूर्ण उपचार के दौरान पैडियाट्रिक विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र बागरी के मार्गदर्शन में NICU टीम ने बच्चे की निरंतर देखभाल की। आरएमओ डॉ. प्रवीण और डॉ. बरखा ने भी बच्चे की देखरेख में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपचार के साथ-साथ बच्चे की स्थिति में होने वाले हर छोटे-बड़े बदलाव पर लगातार नजर रखी गई।
परिवार के लिए NICU के बाहर बीतने वाला हर दिन उम्मीद और चिंता से भरा था। लेकिन धीरे-धीरे बच्चे की स्थिति में सुधार आने लगा और वजन भी लगातार बढ़ता गया।
600 ग्राम से शुरू हुआ सफर अब 2 किलो 70 ग्राम तक पहुंचा
जन्म के समय महज 600 ग्राम वजन वाला यह नन्हा अब 2 किलो 70 ग्राम तक पहुंच चुका है। 19 सितंबर तक बच्चे का वजन 2.070 किलोग्राम दर्ज किया गया। करीब तीन महीने के कठिन उपचार और निगरानी के बाद उसकी स्थिति में लगातार सुधार हुआ है और अब उसे घर ले जाने की तैयारी की जा रही है।
परिवार के लिए 600 ग्राम से 2.070 किलो तक का यह सफर केवल वजन बढ़ने की कहानी नहीं, बल्कि करीब 90 दिनों की चिंता, इंतजार, उम्मीद और लगातार चिकित्सा देखभाल का परिणाम है।
चार साल के इंतजार के बाद मिली सबसे बड़ी खुशी
विजय समर्थ और उनकी पत्नी करीब चार वर्षों से संतान की किलकारी का इंतजार कर रहे थे। जब बच्चा आया तो खुशी के साथ उसकी नाजुक स्थिति ने परिवार की चिंता बढ़ा दी। पिता विजय समर्थ के मुताबिक शुरुआती समय बेहद कठिन था। अपने बच्चे को इतने छोटे और नाजुक रूप में देखना परिवार के लिए भावुक कर देने वाला क्षण था।
उन्होंने बताया कि अस्पताल के चिकित्सकों और नर्सिंग टीम ने उपचार के साथ परिवार को लगातार हिम्मत दी। हर दिन बच्चे की स्थिति में सुधार की खबर परिवार के लिए नई उम्मीद लेकर आती रही। अब जब बच्चा पहले से काफी मजबूत होकर घर जाने की स्थिति में पहुंचा है, तो परिवार के लिए यह लंबे इंतजार के बाद मिली बड़ी खुशी है।
डॉक्टरों की निगरानी और NICU टीम की सतत देखभाल
डॉ. नागेंद्र बागरी के अनुसार बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ है और अब उसे डिस्चार्ज किए जाने की तैयारी है। 600 ग्राम जैसे बेहद कम जन्म वजन वाले नवजात की देखभाल में लगातार विशेषज्ञ निगरानी और विशेष नवजात चिकित्सा की आवश्यकता होती है।
शिवाय हॉस्पिटल की NICU टीम के लिए भी यह मामला चुनौतीपूर्ण नवजात देखभाल का उदाहरण रहा। डॉ. नागेंद्र बागरी, डॉ. बरखा, आरएमओ डॉ. प्रवीण और NICU टीम की निरंतर निगरानी में बच्चे ने धीरे-धीरे स्वास्थ्य की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए।
600 ग्राम का नन्हा जीवन… 90 दिनों की जंग… और अब 2 किलो 70 ग्राम का मजबूत सफर। चार साल के इंतजार के बाद समर्थ परिवार के लिए यह पल उस उम्मीद की जीत जैसा है, जिसे मुश्किल परिस्थितियों के बीच भी उन्होंने कभी टूटने नहीं दिया।







