गणेश उत्सव में भक्ति की मर्यादा पर हिंदू नारायणी सेना की पहल, सार्वजनिक पूजा समितियों को दिया शास्त्रसम्मत धार्मिक सुधार का ज्ञापन
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। सार्वजनिक गणेश उत्सव को धार्मिक आस्था, मर्यादा और सनातन परंपराओं के अनुरूप आयोजित करने की दिशा में हिंदू नारायणी सेना ने महत्वपूर्ण पहल की है। संगठन के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल के नेतृत्व में टीम ने कोरबा शहर की विभिन्न सार्वजनिक गणेश पूजा समितियों को ज्ञापन सौंपकर गणेश उत्सव के दौरान आवश्यक धार्मिक सुधारों और मर्यादित आयोजन का आग्रह किया है।
हिंदू नारायणी सेना का कहना है कि गणेश उत्सव केवल मनोरंजन अथवा भोग-भंडारे तक सीमित आयोजन नहीं है, बल्कि यह भगवान श्री गणेश की आराधना, धार्मिक संस्कार और श्रद्धा से जुड़ा पर्व है। इसलिए सार्वजनिक पंडालों में होने वाली पूजा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भजनों और विसर्जन सहित सभी गतिविधियों में धार्मिक मर्यादा और परंपराओं का ध्यान रखा जाना आवश्यक है।
भगवान गणेश की प्रतिमा को लेकर भी जताई आपत्ति
ज्ञापन में संगठन ने सार्वजनिक गणेश समितियों से भगवान श्री गणेश की प्रतिमा के स्वरूप को लेकर विशेष सावधानी बरतने का आग्रह किया है। संगठन के अनुसार कुछ स्थानों पर कार्टून, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित अथवा मनोरंजन प्रधान स्वरूपों में प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। वहीं नाचते-गाते या अन्य मनोरंजनात्मक मुद्राओं वाली प्रतिमाओं को लेकर भी संगठन ने धार्मिक दृष्टि से विचार करने की आवश्यकता बताई है।

पंडाल में तिलक और गंगाजल की व्यवस्था का आग्रह
हिंदू नारायणी सेना ने गणेश पंडालों में आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के साथ धार्मिक शुचिता और संस्कारों पर भी जोर दिया है। संगठन ने पंडालों में श्रद्धालुओं को तिलक लगाने तथा गंगाजल उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्थाएं करने का आग्रह किया है।
फिल्मी गीतों की जगह भजन और आरती पर जोर
ज्ञापन में पंडालों में बजने वाले गीत-संगीत को लेकर भी सुधार की मांग उठाई गई है। संगठन का कहना है कि गणेश उत्सव के दौरान साउंड सिस्टम पर धार्मिक भजन, आरती और आध्यात्मिक गीतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी प्रकार विसर्जन यात्रा के दौरान भी फिल्मी अथवा अमर्यादित गीतों के स्थान पर धार्मिक भजन और जयघोष का वातावरण बनाए रखने का आग्रह किया गया है।
विसर्जन में नशे से दूर रहने की अपील
संगठन ने गणेश विसर्जन को श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न कराने की आवश्यकता बताई है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कुछ समितियों से जुड़े लोग नशे की स्थिति में विसर्जन में शामिल होते हैं। हिंदू नारायणी सेना ने ऐसी प्रवृत्ति से बचने और विसर्जन को पूरी धार्मिक गरिमा के साथ संपन्न कराने का आग्रह किया है।
धार्मिक झांकियों में मर्यादा बनाए रखने की अपील
झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर भी संगठन ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन का कहना है कि भगवान के स्वरूप को मनोरंजन के लिए नचाने जैसी गतिविधियों से बचना चाहिए और धार्मिक प्रसंगों को श्रद्धा तथा मर्यादा के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
हौजी-जुए के बजाय धार्मिक प्रश्नोत्तरी कराने का सुझाव
हिंदू नारायणी सेना ने गणेश पंडालों में हौजी अथवा जुए जैसे खेलों के स्थान पर धार्मिक ज्ञानवर्धक गतिविधियां आयोजित करने का सुझाव दिया है। संगठन ने हिंदू धर्म, देवी-देवताओं, धार्मिक ग्रंथों और सनातन परंपराओं से जुड़ी प्रश्नोत्तरी एवं क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित करने की बात कही है। सही उत्तर देने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित करने का भी सुझाव दिया गया है।
बच्चों के लिए भी धार्मिक एवं संस्कार आधारित कार्यक्रमों पर जोर
ज्ञापन में छोटे बच्चों से फिल्मी अथवा अमर्यादित गीतों पर नृत्य कराने के बजाय धार्मिक, सांस्कृतिक और संस्कार आधारित कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह किया गया है। संगठन का मानना है कि गणेश उत्सव बच्चों और युवाओं को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बन सकता है।
हिंदू नारायणी सेना ने कहा कि केवल भोग और भंडारे आयोजित कर देने से धार्मिक आयोजन का उद्देश्य पूरा नहीं होता, बल्कि पूजा पद्धति, धार्मिक वातावरण, सांस्कृतिक मर्यादा और धर्म से जुड़े ज्ञान का प्रसार भी उतना ही आवश्यक है।
समितियों से तत्काल आवश्यक सुधार करने का आग्रह
संगठन के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल के साथ पंडित शास्त्री महाराज, पंडित आनंद तिवारी महाराज, करुणा निधि, संदीप श्रीवास, राम साहू, तरुण मिश्रा, श्याम सारथी, मनोज केसरवानी, भरत यादव, रितेश श्रीवास, राजेश महंत, संजू अग्रवाल, कृष्णा वैष्णव सहित अन्य सदस्यों ने विभिन्न गणेश पूजा समितियों तक यह ज्ञापन पहुंचाया।
हिंदू नारायणी सेना ने सभी सार्वजनिक गणेश पूजा समितियों से आग्रह किया है कि ज्ञापन में दिए गए सुझावों को गंभीरता से पढ़ते हुए जो धार्मिक एवं व्यवस्थागत सुधार तत्काल संभव हैं, उन्हें गणेश उत्सव के दौरान लागू किया जाए, ताकि सार्वजनिक गणेश उत्सव भक्ति, श्रद्धा, धार्मिक ज्ञान, संस्कार और मर्यादा का प्रभावी माध्यम बन सके।







