कैंसर के इलाज में दूरी बनी बाधा तो बीएमसी ने बढ़ाया उम्मीद का हाथ, मध्य भारत में 75 हजार से अधिक मरीजों को मिला विशेषज्ञ उपचार
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नया रायपुर बना कैंसर उपचार का मजबूत केंद्र, 8 वर्षों में 5 लाख ओपीडी परामर्श, 96 हजार से अधिक कीमोथेरेपी सत्र और 13,500 से ज्यादा सर्जरी
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** नया रायपुर। कैंसर का नाम सामने आते ही मरीज और परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल बीमारी से लड़ना नहीं होती, बल्कि सही और विशेषज्ञ उपचार तक पहुंचना भी होती है। मध्य भारत के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को कई बार उपचार के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। बार-बार की यात्रा, रहने की व्यवस्था, काम से छुट्टी, जांच, परामर्श, कीमोथेरेपी, सर्जरी और फॉलो-अप का खर्च परिवार पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ाता है। ऐसे समय में नया रायपुर स्थित बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) ने मध्य भारत में कैंसर उपचार को मरीजों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वर्ष 2018 में स्थापित बालको मेडिकल सेंटर ने आठ वर्षों के सफर में विशेषज्ञ कैंसर उपचार की अपनी मजबूत पहचान बनाई है। अब तक बीएमसी में 75,000 से अधिक मरीजों का उपचार, लगभग 5 लाख ओपीडी परामर्श, 96,000 से अधिक कीमोथेरेपी सत्र और 13,500 से अधिक सर्जरी की जा चुकी हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि नया रायपुर अब केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए भी कैंसर उपचार का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।
250 किलोमीटर दूर से पहुंचे मरीज को एक ही केंद्र में मिला पूरा उपचार
कोंडागांव के 28 वर्षीय मरीज का उपचार बीएमसी की इस व्यवस्था की अहमियत को सामने लाता है। नया रायपुर से करीब 250 किलोमीटर दूर रहने वाले इस मरीज को दुर्लभ और गंभीर रक्त कैंसर का पता चला था। बीएमसी में कई चरणों की कीमोथेरेपी के बाद उनका ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया। उपचार के अलग-अलग चरणों के लिए उन्हें विभिन्न संस्थानों के बीच भटकना नहीं पड़ा और पूरी उपचार प्रक्रिया एक ही केंद्र में पूरी हुई।
इसी तरह 48 वर्षीय एक मरीज में पैंक्रियाज के ऐसे कैंसर का पता चला, जिसकी सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वित प्रयास से बीएमसी में उनका उपचार किया गया। दो वर्ष बाद फॉलो-अप के लिए लौटे मरीज के स्वस्थ होने और सामान्य जीवन में वापस आने का अनुभव उपचार की निरंतरता के महत्व को दर्शाता है।
एक छत के नीचे विशेषज्ञों की टीम, संयुक्त समीक्षा से तैयार होती उपचार योजना
कैंसर उपचार में केवल एक विशेषज्ञ की भूमिका पर्याप्त नहीं होती। मरीज की स्थिति के अनुसार कई विशेषज्ञों के समन्वय की आवश्यकता होती है। बीएमसी में मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ हेमेटोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक, फिजियोथेरेपिस्ट, पोषण विशेषज्ञ और पैलिएटिव केयर टीम मिलकर काम करती है।
मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड के माध्यम से मरीज की स्थिति की संयुक्त समीक्षा कर उपचार की योजना तैयार की जाती है। बीएमसी ने मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के साथ न्यूक्लियर मेडिसिन, उन्नत जांच और हेमेटोलॉजी जैसी विशेषज्ञ सेवाओं का भी विस्तार किया है। यहां अब तक 180 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।
उपचार के साथ मरीज और परिवार की जरूरतों पर भी ध्यान
दूरदराज से आने वाले मरीजों के लिए उपचार के साथ रहने, आने-जाने और पोषण जैसी चुनौतियां भी महत्वपूर्ण होती हैं। बीएमसी की ओर से उपचार के दौरान सुख सराय में रियायती आवास, दूरदराज के मरीजों के लिए परिवहन सहायता तथा कीमोथेरेपी से गुजर रहे मरीजों के लिए उच्च प्रोटीन युक्त आहार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
पात्र मरीजों को उपचार और जांच के लिए बीएमसी चैरिटेबल फंड से आर्थिक सहायता भी दी जाती है। इसमें सरकारी योजनाओं के दायरे से बाहर रहने वाले मरीज भी शामिल हैं। बीएमसी में आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत उपचार के साथ बीमा कंपनियों के माध्यम से कैशलेस उपचार की सुविधा भी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।
‘शुरुआती पहचान से बढ़ते हैं उपचार के विकल्प’
बीएमसी के वरिष्ठ मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. यशवंत कश्यप के अनुसार कैंसर के उपचार में बीमारी की शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण है। बीमारी किस अवस्था में सामने आती है, इसका असर उपचार के विकल्पों और परिणामों पर पड़ सकता है। इसी उद्देश्य से बीएमसी ने छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीण एवं शहरी समुदायों में 500 से अधिक कैंसर जांच एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
इन अभियानों में विशेष रूप से स्तन कैंसर, बच्चेदानी के मुख का कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और मुख के कैंसर की जांच एवं जागरूकता पर ध्यान दिया गया है।
छत्तीसगढ़ से बाहर भी पहुंच रही बीएमसी की सेवाएं
बालको मेडिकल सेंटर में अब छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से भी मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इससे नया रायपुर की क्षेत्रीय कैंसर उपचार केंद्र के रूप में भूमिका और मजबूत हुई है।
विशेषज्ञ उपचार, अत्याधुनिक जांच, ट्रांसप्लांट सुविधा, बहु-विषयक चिकित्सा व्यवस्था, आर्थिक सहायता, आवास, परिवहन और कैंसर की शुरुआती पहचान—इन सभी को एक ही व्यवस्था में जोड़कर बीएमसी मरीजों की उपचार यात्रा को आसान बनाने का प्रयास कर रहा है।
बालको मेडिकल सेंटर का मूल प्रयास यही है कि मरीज के घर और उपचार के बीच की दूरी उसकी उम्मीद के रास्ते में बाधा न बने।







