झीरम के हत्यारों पर न्याय का प्रहार, 13 साल बाद 10 माओवादियों को मृत्युदंड; मुख्यमंत्री साय बोले—आतंक को प्रश्रय देने वालों को भी सबक लेने की जरूरत



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// रायपुर। झीरम घाटी का खूनी नरसंहार छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह काला अध्याय है, जिसकी पीड़ा प्रदेश कभी नहीं भूल सकता। वर्षों पहले हुए इस जघन्य माओवादी हमले में प्रदेश के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। अब करीब 13 वर्ष बाद इस मामले में अदालत का बड़ा फैसला सामने आया है। जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए 10 माओवादी आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अदालत के फैसले को झीरम के दिवंगतों को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह फैसला उन परिवारों के लिए भी अहम है, जिन्होंने इस भयावह हमले में अपने प्रियजनों को खोया। उन्होंने मामले की जांच को अंजाम तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की भूमिका की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झीरम की त्रासदी केवल एक हिंसक घटना नहीं थी, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और छत्तीसगढ़ की सामाजिक शांति पर किया गया गंभीर हमला था। उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा ने दशकों तक बस्तर के लोगों को भय और असुरक्षा के वातावरण में रखा, लेकिन अब बस्तर शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के लगातार प्रयासों से माओवादी हिंसा के खिलाफ अभियान को निर्णायक दिशा मिली है। उनका कहना है कि बस्तर में आज विकास और शांति का वातावरण मजबूत हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो माओवादी हिंसा को वैचारिक या बौद्धिक समर्थन देने का आरोप झेलते रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंक और हिंसा को किसी भी विचारधारा, स्वार्थ या राजनीतिक तर्क की आड़ में उचित नहीं ठहराया जा सकता। लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ हिंसक रास्ता अपनाने वाली ताकतों को यह समझना होगा कि हिंसा का परिणाम अंततः विनाश ही होता है।
उन्होंने कहा कि झीरम घाटी की घटना से जुड़े हर पहलू की स्मृति प्रदेश के लिए हमेशा पीड़ादायक रहेगी। मुख्यमंत्री ने हमले में जान गंवाने वाले सभी दिवंगतों को नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।







