वेतन के लिए तरस रहे लघु वेतन कर्मचारी, अब आर-पार की राह! रिक्त पदों पर समायोजन और नियमित वेतन की मांग को लेकर 15 सितंबर को सांकेतिक आंदोलन
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा के विभागीय आश्रम-छात्रावासों में कार्यरत कलेक्टर दर कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ा, संघ ने आयुक्त को भेजा पत्र; सहायक आयुक्त के स्थानांतरण की भी उठाई मांग
कोरबा। विभागीय आश्रम एवं छात्रावासों में कार्यरत कलेक्टर दर (आदिवासी कर्मचारी) चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को रिक्त पदों पर युक्तियुक्तकरण (समायोजन) के बाद भी नियमित वेतन का लाभ नहीं मिलने का मुद्दा अब जोर पकड़ता दिखाई दे रहा है। छत्तीसगढ़ शासकीय लघु वेतन कर्मचारी संघ, जिला कोरबा ने कर्मचारियों की मांगों को लेकर अब सांकेतिक आंदोलन का ऐलान किया है। संघ ने 15 सितंबर 2026 को एकदिवसीय सांकेतिक ध्यानाकर्षण आंदोलन किए जाने की सूचना आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त को दी है।
संघ के जिला अध्यक्ष गोपीचंद जगत द्वारा आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कोरबा जिले के विभागीय आश्रम एवं छात्रावासों में कार्यरत कलेक्टर दर कर्मचारियों को रिक्त पदों पर युक्तियुक्तकरण (समायोजन) करते हुए नियमित वेतन का लाभ नहीं दिए जाने से कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है।
आदेशों के बावजूद नहीं मिला नियमित वेतन का लाभ
संघ ने अपने पत्र में कार्यालय कलेक्टर (आदिवासी विकास) कोरबा के 27 जून 2025 तथा 3 अगस्त 2026 के आदेशों का संदर्भ देते हुए कर्मचारियों की स्थिति और मांगों को सामने रखा है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों को रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित वेतन का लाभ दिए जाने की मांग को लेकर पूर्व में भी पत्राचार किया गया है।
पत्र में संघ ने यह भी उल्लेख किया है कि संगठन की ओर से 31 अगस्त 2026 और 11 सितंबर 2026 को आंदोलन संबंधी सूचना दी गई थी। संघ के अनुसार, इसके बावजूद संगठन के पदाधिकारियों को चर्चा के लिए नहीं बुलाया गया, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
रसोइया, जलवाहक और चौकीदार भी आंदोलन की राह पर
संघ के मुताबिक विभागीय आश्रम एवं छात्रावासों में सेवाएं दे रहे रसोइया, जलवाहक, चौकीदार सहित अन्य कलेक्टर दर कर्मचारी नियमित वेतन के लाभ और रिक्त पदों पर समायोजन की मांग कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने 15 सितंबर 2026 को आश्रम परिसर में एकदिवसीय सांकेतिक ध्यानाकर्षण आंदोलन करने का निर्णय लिया।
इस आंदोलन को कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे विभागीय आश्रम एवं छात्रावासों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, ऐसे में उनके वेतन और सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाना चाहिए।
आयुक्त से वेतन निर्धारण और स्थानांतरण की मांग
छत्तीसगढ़ शासकीय लघु वेतन कर्मचारी संघ ने आयुक्त से स्पष्ट रूप से मांग की है कि कोरबा जिले के कर्मचारियों का वेतन निर्धारण कराया जाए तथा सहायक आयुक्त, आदिम जाति विकास विभाग कोरबा को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जाए।
संघ के पत्र में संगठन ने कर्मचारियों की समस्याओं पर तत्काल संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई किए जाने का आग्रह किया है। अब मामला विभागीय स्तर पर पहुंचने के बाद कर्मचारियों की मांगों पर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर कर्मचारियों और संगठन की नजर बनी हुई है।
वेतन और सेवा संबंधी मांगों को लेकर उठी यह आवाज अब विभागीय कार्यालयों तक पहुंच चुकी है। कर्मचारियों का सांकेतिक आंदोलन इस बात का संकेत है कि लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान के लिए संगठन अब अपनी आवाज और मजबूती से उठाने की तैयारी में है।







