कोरबा में आस्था की बड़ी पहल: आपत्ति के बाद 100 से ज्यादा गणेश प्रतिमाओं का हुआ सुधार, मूर्तिकारों ने लिया शास्त्रसम्मत स्वरूप का संकल्प
1 min read



हिंदू नारायणी सेना और मूर्तिकारों की बैठक में बनी सहमति, धार्मिक स्वरूप से अनावश्यक छेड़छाड़ रोकने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। गणेश उत्सव से पहले कोरबा में धार्मिक आस्था और परंपराओं के सम्मान को लेकर एक सराहनीय पहल सामने आई है। हिंदू नारायणी सेना की आपत्ति के बाद जिले के मूर्तिकारों ने भगवान श्री गणेश की 100 से अधिक बड़ी प्रतिमाओं में तत्काल आवश्यक सुधार किया। साथ ही भविष्य में प्रतिमाओं के स्वरूप में अनावश्यक बदलाव नहीं करने और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप प्रतिमा निर्माण करने का संकल्प लिया गया।

माटी मूर्तिकार विकास समिति कोरबा के अध्यक्ष बिसाहू राम कुंम्भकार के तत्वावधान में जिले के मूर्तिकारों की आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में हिंदू नारायणी सेना के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल के साथ संगठन के करुणा निधि, श्याम सारथी, राम साहू, तरुण मिश्रा, संदीप श्रीवास, भरत यादव और राजेश महंत सहित पदाधिकारी एवं सदस्य तथा दो पंडित शामिल हुए।
बैठक का मुख्य उद्देश्य भगवान श्री गणेश की निर्माणाधीन प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर सामने आ रही विसंगतियों पर चर्चा करना और उन्हें समय रहते दूर करना था। हिंदू नारायणी सेना द्वारा पूर्व में इसी विषय को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर धार्मिक प्रतिमाओं के स्वरूप में अनावश्यक बदलाव तथा पीओपी से प्रतिमा निर्माण जैसे मामलों पर कार्रवाई की मांग की गई थी।
आपत्ति पर टकराव नहीं, सुधार का रास्ता चुना
बैठक में भगवान श्री गणेश की अलग-अलग निर्माणाधीन प्रतिमाओं का निरीक्षण और उनके स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की गई। संगठन की ओर से कुछ प्रतिमाओं में आसन, सिर, पेट एवं अन्य स्वरूपगत विसंगतियों पर आपत्ति जताई गई। इसके बाद मूर्तिकारों ने इन बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक सुधार करने पर सहमति जताई।
बैठक के बाद हिंदू नारायणी सेना की टीम और पंडितों ने शहर के विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर निर्माणाधीन गणेश प्रतिमाओं का निरीक्षण किया। जहां आवश्यक सुधार की बात सामने आई, वहां मूर्तिकारों ने तत्काल काम शुरू किया। संगठन के अनुसार कोरबा शहर में 100 से अधिक बड़ी गणेश प्रतिमाओं में सुधार कार्य कराया गया।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि गणेश उत्सव से पहले प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का कार्य तेजी से चल रहा है। ऐसे समय में आपत्तियों को लेकर विवाद बढ़ाने के बजाय मूर्तिकारों और संगठन के बीच बैठक कर समाधान निकालना और मौके पर सुधार कराना एक सकारात्मक कदम के रूप में सामने आया है।

‘भगवान को आधुनिक नहीं, आस्था के अनुरूप स्वरूप मिले’
हिंदू नारायणी सेना ने पूजा समितियों और मूर्तिकारों से आग्रह किया कि केवल आकर्षक या आधुनिक दिखाने के प्रयास में भगवान श्री गणेश के पारंपरिक धार्मिक स्वरूप में अनावश्यक परिवर्तन न किया जाए। संगठन ने धार्मिक ग्रंथों, वेदों और शास्त्रों में वर्णित मान्यताओं के अनुरूप प्रतिमा निर्माण को प्राथमिकता देने की अपील की।
संगठन का कहना है कि भगवान की प्रतिमा श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होती है, इसलिए उसके निर्माण में धार्मिक भावनाओं और परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही पीओपी जैसी पर्यावरणीय दृष्टि से विवादित सामग्री के स्थान पर पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
मूर्तिकारों ने दिया बड़ा भरोसा
बैठक में मूर्तिकारों ने भविष्य में प्रतिमाओं के धार्मिक स्वरूप को लेकर ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होने देने का प्रस्ताव पारित किया। इस दौरान यह भी तय किया गया कि भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं के निर्माण में धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक स्वरूप का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
कोरबा में दिखी संवाद से समाधान की मिसाल
हिंदू नारायणी सेना की पहल पर आयोजित यह बैठक केवल आपत्ति दर्ज कराने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसके बाद प्रतिमाओं का स्थल निरीक्षण और तत्काल सुधार भी कराया गया। धार्मिक आस्था, मूर्तिकारों की कला और पर्यावरण—तीनों पहलुओं को साथ लेकर आगे बढ़ने की यह पहल गणेश उत्सव से पहले कोरबा में एक सकारात्मक संदेश दे रही है।
हिंदू नारायणी सेना के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि संगठन का उद्देश्य हिंदू धर्म, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के सम्मान के लिए आवाज उठाना है। उन्होंने पूजा समितियों से आग्रह किया कि भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं का चयन और निर्माण करते समय धार्मिक स्वरूप एवं परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाए।
संगठन की ओर से करुणा निधि, श्याम सारथी, राम साहू, तरुण मिश्रा, संदीप श्रीवास, भरत यादव और राजेश महंत सहित उपस्थित सदस्यों ने भी इस पहल को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। वहीं माटी मूर्तिकार विकास समिति के अध्यक्ष बिसाहू राम कुंम्भकार के नेतृत्व में मूर्तिकारों द्वारा सुधार की दिशा में दिखाई गई तत्परता को इस पूरे प्रयास का महत्वपूर्ण पक्ष माना जा रहा है।
गणेश उत्सव से पहले कोरबा में हुआ यह प्रयास एक स्पष्ट संदेश देता नजर आ रहा है—भगवान की प्रतिमा में आकर्षण से पहले आस्था, परंपरा और धार्मिक स्वरूप का सम्मान जरूरी है।







