‘डंपिंग पॉलिसी’ का शिकार हुए भूपेश बघेल? पंजाब से हटाकर असम भेजे जाने पर भाजपा का वार—‘जहां जाएंगे, कांग्रेस की जमीन खिसकेगी’
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//*// रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब के प्रभार से हटाकर असम कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत में घमासान तेज हो गया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता नलिनीश ठोकने ने कांग्रेस आलाकमान के इस फैसले पर करारा तंज कसते हुए इसे पार्टी की कथित ‘राजनीतिक डंपिंग पॉलिसी’ करार दिया है।
ठोकने ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आलाकमान अब बघेल की राजनीतिक उपयोगिता और विश्वसनीयता को लेकर सवालों के बीच उन्हें एक राज्य से दूसरे राज्य में जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बघेल जहां भी कांग्रेस के चुनावी या संगठनात्मक दायित्व में रहे, वहां पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
‘पंजाब में नहीं संभला घमासान, अब असम की जिम्मेदारी’
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पंजाब में कांग्रेस के अंदरूनी विवादों को सुलझाने में बघेल सफल नहीं रहे और अब उन्हें असम की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने इसे कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति पर सवाल खड़ा करने वाला फैसला बताया।
ठोकने ने बघेल के राजनीतिक प्रदर्शन पर निशाना साधते हुए उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की चुनावी स्थिति का हवाला दिया और आरोप लगाया कि उनके नेतृत्व में पार्टी को लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
‘असम में भी कांग्रेस की बची जमीन खिसक जाएगी’
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि असम में कांग्रेस पहले से ही राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही है और बघेल को वहां की जिम्मेदारी सौंपना पार्टी के लिए कोई संजीवनी साबित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि “बघेल जहां जाएंगे, वहां कांग्रेस का सूपड़ा साफ होना तय है।”
उन्होंने कांग्रेस पर विभाजनकारी और तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि असम की जनता विकास और मजबूत नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है।
भाजपा का सीधा निशाना—कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर सवाल
नलिनीश ठोकने ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सत्ता गंवाने के बाद बघेल को अब असम की जिम्मेदारी दिया जाना कांग्रेस संगठन की रणनीति को उजागर करता है। हालांकि, ये सभी आरोप भाजपा प्रवक्ता के राजनीतिक दावे हैं, जिन पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
भूपेश बघेल को लेकर भाजपा के इस हमले ने प्रदेश की राजनीति में नया सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। पंजाब से असम तक बघेल की नई भूमिका अब सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि भाजपा-कांग्रेस के बीच एक नए राजनीतिक वार-पलटवार का मुद्दा बनती दिखाई दे रही है।







