लोकगीतों की गूंज, आस्था का रंग और भोजली दाई को भावभीनी विदाई—तुमान में उमड़ा छत्तीसगढ़ी संस्कृति का सैलाब
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“देवी गंगा, देवी गंगा लहर तुरंगा…” के पारंपरिक सुरों से गूंजा गांव; सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छी फसल की कामना के साथ हुआ भोजली विसर्जन
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** तुमान। मिट्टी की खुशबू, लोकगीतों की मधुर गूंज और आस्था से सराबोर वातावरण के बीच ग्राम तुमान में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकपर्व भोजली का श्रद्धापूर्वक समापन हुआ। भोजली विसर्जन के अवसर पर गांव की गलियां पारंपरिक गीतों और जयघोष से गूंज उठीं। महिलाओं और ग्रामीणों ने पूरे विधि-विधान एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भोजली दाई की पूजा-अर्चना कर उन्हें भावपूर्ण विदाई दी।
भोजली विसर्जन के लिए ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक रूप से सजी भोजली लेकर विसर्जन स्थल की ओर रवाना हुईं। इस दौरान वातावरण में छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति की अनूठी छटा दिखाई दी। महिलाओं के सामूहिक स्वर में गूंजता पारंपरिक भोजली गीत “देवी गंगा, देवी गंगा लहर तुरंगा…” पूरे वातावरण को भक्तिमय बनाता रहा। गीतों की लय, जयकारों की गूंज और ग्रामीणों की सहभागिता ने आयोजन को यादगार बना दिया।
भोजली दाई से मांगी गांव की खुशहाली
विसर्जन से पूर्व भोजली की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीण महिलाओं ने भोजली दाई के समक्ष गांव में सुख-शांति, समृद्धि, खुशहाली और अच्छी फसल की कामना की। किसानों के जीवन से गहरे रूप से जुड़े इस लोकपर्व में प्रकृति और कृषि के प्रति सम्मान की भावना भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

ग्रामीणों का मानना है कि भोजली पर्व केवल धार्मिक आस्था का अवसर नहीं, बल्कि गांव के लोगों को एक सूत्र में बांधने वाली लोकपरंपरा भी है। यही कारण रहा कि विसर्जन कार्यक्रम में महिलाओं के साथ बच्चे, युवा, बुजुर्ग और जनप्रतिनिधि भी उत्साह के साथ शामिल हुए।
लोकगीतों ने जीवंत की पुरखों की परंपरा
भोजली विसर्जन के दौरान छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की प्रस्तुति ने आयोजन में विशेष रंग भर दिया। आधुनिकता के दौर में भी ग्रामीण महिलाओं द्वारा पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को उसी आत्मीयता के साथ निभाना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।
भोजली के गीतों में प्रकृति, प्रेम, भाईचारे, कृषि और लोकजीवन की भावनाएं जुड़ी होती हैं। तुमान में हुए आयोजन में भी यही लोकभावना दिखाई दी। गीतों के बीच महिलाएं भोजली दाई को लेकर विसर्जन स्थल तक पहुंचीं और परंपरागत तरीके से विसर्जन की रस्म पूरी की।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की रही सक्रिय भागीदारी
भोजली विसर्जन कार्यक्रम में ग्राम पंचायत तुमान की सरपंच श्रीमती सुषमा कंवर, उपसरपंच नोनी बाई, सोम श्रीवास, शिवशरण गिरी, शुक्रवार चौहान, गोकुल सिदार, छतराम, ग्राम बैगा प्रह्लाद सिंह, फूल सिंह, संजू महाराज एवं नत्थू पटेल सहित ग्राम पंचायत के पंचगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण तथा गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
सभी ने मिलकर भोजली पर्व की परंपरा को आगे बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों को छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति से जोड़ने का संकल्प लिया।
विसर्जन के साथ खत्म नहीं हुई परंपरा, बल्कि मजबूत हुआ सांस्कृतिक संकल्प
भोजली विसर्जन के साथ पर्व का विधिवत समापन जरूर हुआ, लेकिन ग्रामीणों के मन में लोकसंस्कृति को जीवित रखने का संकल्प और मजबूत हुआ। कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल उसके प्राकृतिक सौंदर्य से नहीं, बल्कि उसकी जीवंत लोकपरंपराओं, गीत-संगीत और सामुदायिक एकजुटता से भी है।
आयोजन के अंत में ग्रामीणों ने एक-दूसरे को भोजली पर्व की शुभकामनाएं दीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान गांव में आत्मीयता, भाईचारे और सौहार्द का वातावरण बना रहा।
तुमान का यह भोजली विसर्जन केवल एक धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि मिट्टी, प्रकृति, कृषि और लोकसंस्कृति से जुड़े उस भाव का उत्सव रहा, जो पीढ़ियों से छत्तीसगढ़ के गांवों की पहचान बना हुआ है।







