बारिश ने खोली कोरबा के ड्रेनेज सिस्टम की पोल: शहर का सबसे बड़ा नाला बना ‘सैलाब का रास्ता’, 100 से ज्यादा घर डूबे
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हर साल वही कहानी, हर बार वही शिकायत… फिर भी नहीं जागा निगम! सीतामणी में घरों से लेकर प्राचीन राम गुफा मंदिर तक पहुंचा पानी, लोगों का फूटा गुस्सा
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर कोरबा शहर की जल निकासी व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी है। शहर का सबसे बड़ा नाला उफान पर आते ही सीतामणी बस्ती के वैष्णो दरबार मोहल्ला, केवट मोहल्ला और आसपास के रिहायशी क्षेत्रों के लिए मुसीबत बन गया। नाले का पानी तेजी से बस्तियों में घुसने से 100 से अधिक घर जलभराव की चपेट में आ गए, वहीं ऐतिहासिक और आस्था के केंद्र प्राचीन राम गुफा मंदिर परिसर तक पानी पहुंचने से हालात की गंभीरता साफ नजर आई।
बारिश बढ़ते ही नाले का जलस्तर अचानक ऊपर पहुंचा और देखते ही देखते पानी रिहायशी इलाकों में फैल गया। कई परिवारों को अपने घरों से पानी निकालने के साथ-साथ जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर रखने की जद्दोजहद करनी पड़ी। सड़क और गलियों में पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई।
हर साल बारिश आती है, पानी भरता है और शिकायतें भी… लेकिन समाधान क्यों नहीं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। बारिश का मौसम आते ही इस इलाके में जलभराव की समस्या खड़ी हो जाती है। वर्षों से लोग नाले की सफाई, उसकी क्षमता बढ़ाने और व्यवस्थित जल निकासी की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन बारिश थमते ही समस्या और लोगों की शिकायतें दोनों मानो फाइलों में दब जाती हैं।
लोगों का सवाल है कि जब हर साल एक ही स्थान पर जलभराव होता है तो स्थायी समाधान के लिए अब तक ठोस योजना क्यों नहीं बनाई गई?
नाले की नियमित सफाई और गहराईकरण से लेकर जल निकासी की पर्याप्त क्षमता विकसित करने तक कई स्तरों पर काम की जरूरत है। बावजूद इसके हर बारिश में हालात फिर उसी मोड़ पर पहुंच जाते हैं।
निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जलभराव से परेशान लोगों में नगर निगम प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि चुनाव और निरीक्षण के दौरान समस्याओं को गंभीरता से सुनने की बातें होती हैं, लेकिन बरसात में जब जनता को वास्तविक राहत की जरूरत पड़ती है, तब वही समस्या फिर विकराल रूप ले लेती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अगर हर साल घरों में पानी घुस रहा है तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है?
जनता अब केवल अस्थायी रूप से पानी निकालने की कार्रवाई नहीं चाहती। लोगों की मांग है कि नाले की क्षमता का तकनीकी सर्वे कराया जाए और यह पता लगाया जाए कि बारिश के दौरान पानी का दबाव इतना बढ़ क्यों जाता है।
घर में पानी, बाहर पानी… आखिर जाएं तो जाएं कहां?
जलभराव के कारण प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी परेशानी घर के भीतर जमा पानी और घरेलू सामान को सुरक्षित रखने की है। जिन लोगों ने बड़ी मुश्किल से अपने आशियाने खड़े किए हैं, उनके लिए हर बारिश अब चिंता का कारण बनती जा रही है।
लोगों का कहना है कि सामान्य बारिश में ही यदि नाला उफनकर घरों में पानी पहुंचा देता है तो भविष्य में इससे भी अधिक बारिश होने पर स्थिति कितनी भयावह हो सकती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
राम गुफा मंदिर तक पानी पहुंचना भी बना चिंता का विषय
सीतामणी क्षेत्र का प्राचीन राम गुफा मंदिर भी जलभराव से प्रभावित हुआ है। मंदिर परिसर तक पानी पहुंचने की स्थिति ने स्थानीय श्रद्धालुओं और नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले इस स्थल को भी जलभराव से बचाने के लिए उचित जल निकासी व्यवस्था जरूरी है।
अब राहत नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल पानी निकासी की व्यवस्था की जाए और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दल तैनात किए जाएं। साथ ही नाले की तत्काल सफाई कराकर उसमें जमा मलबा और अवरोध हटाया जाए।
लेकिन इसके साथ ही लोगों ने स्पष्ट किया है कि हर साल बारिश के समय मोटर लगाकर पानी निकालना स्थायी समाधान नहीं है।
जरूरत है—
नाले की पूरी लंबाई की तकनीकी जांच कराने की।
नाले की सफाई और गहरीकरण कराने की।
पानी के प्राकृतिक बहाव में आने वाले अवरोध हटाने की।
नाले की जल निकासी क्षमता बढ़ाने की।
प्रभावित बस्तियों में वैज्ञानिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की।
जलभराव वाले स्थानों की स्थायी पहचान कर कार्ययोजना बनाने की।
बरसात से पहले नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने की।
जनता का सीधा सवाल—हर साल शिकायत के बाद भी आखिर कार्रवाई कहां है?
सीतामणी और आसपास के रहवासियों की परेशानी ने नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर साल बारिश, हर साल जलभराव, हर साल शिकायत और फिर हर साल वही बदहाल तस्वीर—यह सिलसिला आखिर कब टूटेगा?
जनता अब आश्वासन नहीं, जमीन पर काम चाहती है। लोगों का कहना है कि यदि समस्या पुरानी है और उसका कारण भी प्रशासन के सामने स्पष्ट है, तो फिर स्थायी समाधान में देरी किस बात की है?
लगातार बारिश ने फिलहाल हालात बिगाड़ दिए हैं, लेकिन इस जलभराव ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—क्या प्रशासन हर बारिश के बाद पानी निकालने तक सीमित रहेगा या अगली बारिश से पहले ऐसा इंतजाम करेगा कि लोगों के घरों में पानी पहुंचने की नौबत ही न आए?
फिलहाल सीतामणी क्षेत्र में जलभराव ने कोरबा की जल निकासी व्यवस्था की तैयारियों की पोल खोल दी है। अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर हैं कि वह इस बार भी केवल तत्काल राहत देकर मामला शांत करता है या वर्षों पुरानी इस समस्या का कोई ठोस और स्थायी समाधान सामने लाता है।







