एंबुलेंस सेवा के दावों पर बड़ा सवाल! घायल महिला को अस्पताल पहुंचाने ग्रामीणों ने खोजा निजी वाहन, डोकरमना में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल
1 min read



घर की दीवार गिरने से मलबे में दबी महिला गंभीर घायल, समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने पर सरपंच ने निजी वाहन से पहुंचाया अस्पताल
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा/डोकरमना। कोरबा जिले के अंतिम छोर और दूरस्थ क्षेत्र डोकरमना के ग्राम कुदरी चिंगार में मंगलवार को घर की दीवार गिरने से एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे के बाद महिला मलबे के नीचे दब गई, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई और घायल महिला को तत्काल उपचार दिलाने की कोशिश शुरू हुई।
बताया गया कि हादसे के तुरंत बाद परिजनों ने एंबुलेंस सेवा के लिए संपर्क किया, लेकिन जरूरत के समय समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। महिला की हालत गंभीर देख परिजन और ग्रामीण एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए आखिरकार ग्राम पंचायत के सरपंच को हस्तक्षेप करना पड़ा।
एंबुलेंस का इंतजार छोड़ निजी वाहन बना सहारा
घायल महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्राम पंचायत के सरपंच ने तत्काल निजी वाहन की व्यवस्था की। इसके बाद घायल महिला को निजी वाहन से लेमरू अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे उपचार के लिए पहुंचाया गया।

घटना ने दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और उनकी त्वरित पहुंच को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे या गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज के लिए एक-एक मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचती तो परिजनों के सामने निजी वाहन की व्यवस्था करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचता।
दूरस्थ क्षेत्र में इमरजेंसी सेवा की रफ्तार पर उठे सवाल
डोकरमना क्षेत्र भौगोलिक रूप से जिले के अंतिम छोर में स्थित है। ऐसे इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच पहले से ही चुनौतीपूर्ण रहती है। सड़क की दूरी और अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाला समय गंभीर मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।
ग्रामीणों का सवाल सीधा है—जब आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस की जरूरत पड़ती है, तब सेवा कितनी तेजी से उपलब्ध होती है? यदि गंभीर घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को निजी वाहन का सहारा लेना पड़े, तो ऐसी व्यवस्था का सबसे ज्यादा असर दूरस्थ गांवों के गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ता है।
हादसे के बाद व्यवस्था को लेकर उठी आवाज
ग्रामीणों ने मांग की है कि अंतिम छोर के गांवों में एंबुलेंस सेवा की उपलब्धता, रिस्पॉन्स टाइम और वास्तविक संचालन व्यवस्था की समीक्षा की जाए। विशेषकर ऐसे क्षेत्रों में जहां अस्पताल तक पहुंचने में अधिक समय लगता है, वहां आपातकालीन वाहन की उपलब्धता को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत है।
यह घटना केवल एक परिवार की परेशानी का मामला नहीं, बल्कि दूरस्थ इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी तत्पर है, इसकी जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा करती है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज को एंबुलेंस के इंतजार में समय न गंवाना पड़े।
ग्रामीणों की उम्मीद साफ है—आपात स्थिति में एंबुलेंस केवल व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि समय पर पहुंचने वाली जीवनरक्षक सेवा होनी चाहिए।
इस समाचार को और अधिक जाकर आक्रामक खबर बनाकर भेजिए हैडलाइन सहित विस्तार विवरण सहित क्या कारण है क्यों निजी अस्पताल में भर्त केयाया गया







