14 वर्षीय बेटी की मौत का सच कब आएगा सामने? पिता ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
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राजेश यादव को सौंपा पत्र, मोबाइल-चैट से लेकर थाने के CCTV तक जांच कराने की मांग; कहा—समय रहते शिकायत पर कार्रवाई होती तो शायद बच जाती बेटी
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** हरदी बाजार, कोरबा। हरदी बाजार क्षेत्र में 14 वर्षीय नाबालिग की मौत का मामला अब गंभीर जांच और जवाबदेही की मांग तक पहुंच गया है। मृतका के पिता नरेश कुमार चौहान ने अपनी बेटी की मौत के पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं गहन जांच की मांग करते हुए 20 अगस्त 2026 को भाजपा झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ के प्रदेश सह संयोजक राजेश यादव को लिखित पत्र सौंपा है। पिता ने पत्र में कथित रूप से सोशल मीडिया पर निजी तस्वीरें प्रसारित किए जाने, मानसिक प्रताड़ना और शिकायत के बावजूद समय पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
पिता की मांग है कि मामले की जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, मैसेज, सोशल मीडिया गतिविधियों और थाने में शिकायत से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि घटना से पहले मृतका और उसके परिजन शिकायत लेकर थाने पहुंचे थे या नहीं और यदि पहुंचे थे तो उस समय पुलिस स्तर पर क्या कार्रवाई की गई।
“शिकायत पर समय रहते कार्रवाई होती तो शायद मेरी बेटी आज जिंदा होती”
पिता ने अपने पत्र में दावा किया है कि उनकी बेटी ने 24 जुलाई 2026 को आत्महत्या कर ली। इससे पहले कथित तौर पर उसकी निजी तस्वीरें बिना अनुमति सोशल मीडिया पर प्रसारित कर उसे मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। पिता के अनुसार, उनकी बेटी ने 21 और 22 जुलाई को हरदी बाजार थाने पहुंचकर शिकायत करने का प्रयास किया था।
यहीं से मामले का सबसे बड़ा सवाल सामने आता है—यदि नाबालिग वास्तव में मदद की गुहार लेकर थाने पहुंची थी, तो उस समय उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई?
पिता का आरोप है कि शिकायत को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया और तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों ने पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग को गंभीर बना दिया है।
मोबाइल बना सकता है पूरे घटनाक्रम की अहम कड़ी
मृतका के मोबाइल फोन को लेकर भी परिवार ने गंभीर आशंका जताई है। पिता का कहना है कि मोबाइल में घटना से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य हो सकते हैं। इसलिए मोबाइल को सुरक्षित तरीके से जब्त कर उसकी फोरेंसिक जांच कराए जाने की मांग की गई है।
जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि घटना से पहले मृतका के संपर्क में कौन-कौन लोग थे, किस तरह के संदेशों का आदान-प्रदान हुआ, सोशल मीडिया पर क्या गतिविधियां हुईं और कथित तस्वीरें किस माध्यम से प्रसारित हुईं। यदि कोई डिजिटल साक्ष्य मिलता है तो उसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग परिवार ने की है।
थाने के CCTV और रजिस्टर भी जांच के दायरे में आएं
पिता ने हरदी बाजार थाने के CCTV फुटेज, शिकायत संबंधी रजिस्टर और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग रखी है। उनका कहना है कि इससे यह तथ्य सामने आ सकता है कि मृतका या उसके परिजन 21 और 22 जुलाई को थाने पहुंचे थे या नहीं और यदि पहुंचे थे तो वहां उनकी शिकायत पर क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
परिवार की मांग है कि मामले की जांच में किसी भी संभावित तथ्य को नजरअंदाज न किया जाए और घटनाक्रम की पूरी कड़ी को समयक्रम के अनुसार जोड़कर देखा जाए।
पिता ने रखीं छह प्रमुख मांगें
मृतका के पिता ने पत्र के माध्यम से छह प्रमुख मांगें सामने रखी हैं—
1. मृतका के मोबाइल को जब्त कर कथित आरोपी निखिल एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जाए।
2. कॉल डिटेल, मैसेज, सोशल मीडिया गतिविधियों एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गंभीरता से जांच कराई जाए।
3. हरदी बाजार थाने के CCTV फुटेज एवं संबंधित रजिस्टरों की जांच कर शिकायत से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जाए।
4. जांच में पुलिस स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
5. डिजिटल एवं अन्य साक्ष्यों की जांच के लिए विशेषज्ञ टीम गठित की जाए।
6. जांच में आरोप सिद्ध होने पर संबंधित दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
राजेश यादव बोले—संवेदनशील मामले में हर पहलू की निष्पक्ष जांच जरूरी
भाजपा झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ के प्रदेश सह संयोजक राजेश यादव ने कहा कि नाबालिग बच्ची की मौत से जुड़ा मामला अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच होनी चाहिए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि पुलिस स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
राजेश यादव ने परिवार को भरोसा दिलाया कि उनकी न्याय की मांग को संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आवश्यक स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।
सवाल सिर्फ एक परिवार का नहीं, व्यवस्था की जवाबदेही का भी
इस पूरे मामले ने एक बेहद गंभीर सवाल खड़ा किया है—जब कोई नाबालिग कथित मानसिक प्रताड़ना या डिजिटल उत्पीड़न से परेशान होकर मदद की तलाश में पहुंचती है, तो उसकी शिकायत को कितनी गंभीरता से लिया जाता है?
हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी, लेकिन परिवार की ओर से उठाए गए सवालों को निष्पक्ष जांच के जरिए स्पष्ट किया जाना जरूरी है। मोबाइल से लेकर सोशल मीडिया तक और थाने के CCTV से लेकर शिकायत रजिस्टर तक—हर संभावित साक्ष्य की जांच ही घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है।
एक पिता अपनी बेटी को वापस नहीं ला सकता, लेकिन वह उसकी मौत से जुड़े हर सवाल का जवाब जरूर चाहता है। परिवार की मांग साफ है—घटना की सच्चाई सामने आए, दोषी कोई भी हो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो और यदि कहीं लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय हो।







