B.Ed. अभिलेख सत्यापन में अनिल रात्रे की डिग्री सही, पदोन्नति योग्यता पर उठे सवालों के बीच शिक्षा विभाग की जांच से स्थिति स्पष्ट
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विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड से छह सेमेस्टर की मार्कशीट का हुआ मिलान, अभिलेख वास्तविक एवं विश्वविद्यालय द्वारा जारी होना प्रमाणित
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। पदोन्नति में B.Ed. योग्यता को लेकर उठे सवालों के बीच कोरबा शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक अनिल रात्रे के शैक्षणिक अभिलेखों का विश्वविद्यालय स्तर पर सत्यापन कराया गया। सत्यापन प्रक्रिया में उनकी B.Ed. की मार्कशीट एवं संबंधित अभिलेख विश्वविद्यालय के उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल खाते पाए गए हैं। 17 अगस्त 2026 को जारी सत्यापन पत्र में सरदार पटेल विश्वविद्यालय, बालाघाट द्वारा अभिलेखों को वास्तविक एवं विश्वविद्यालय द्वारा जारी होना प्रमाणित किया गया है।
विश्वविद्यालय के सत्यापन के अनुसार अनिल रात्रे, पिता रमेश्वर प्रसाद रात्रे, रोल नंबर 01ED22BEDP2037 के नाम से B.Ed. के छह सेमेस्टर से संबंधित अभिलेख विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। दिसंबर 2022 से जून 2025 तक आयोजित परीक्षाओं की सेमेस्टरवार मार्कशीट तथा उनके क्रमांक का उपलब्ध विश्वविद्यालयीन रिकॉर्ड से मिलान किया गया, जिसमें अभिलेख सही पाए गए।
सवालों के बीच हुई जांच ने तस्वीर की साफ
B.Ed. योग्यता और विभागीय अनुमति को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन जिला कोरबा के महासचिव ओमप्रकाश बघेल द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई थी। उन्होंने सेवा अवधि के दौरान B.Ed. अध्ययन, परीक्षा में उपस्थिति तथा विभागीय अनुमति से जुड़े दस्तावेजों का नियमानुसार मिलान किए जाने की मांग की थी।
इसी क्रम में समाचारों में अनिल रात्रे का नाम सामने आने के बाद मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के उद्देश्य से उनके शैक्षणिक दस्तावेजों का विश्वविद्यालय से सत्यापन कराया गया। सत्यापन के बाद विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में उनके अभिलेखों की पुष्टि होने से B.Ed. उपाधि की प्रामाणिकता को लेकर लगाए जा रहे सवालों पर विराम लगता दिखाई दे रहा है।
पार्ट टाइम अध्ययन को लेकर भी विश्वविद्यालय ने दी अहम जानकारी
सत्यापन के दौरान अंकसूची में दर्ज ‘नियमित’ स्टेटस को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय ने बताया है कि पार्ट टाइम अध्ययन में कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं होतीं, जबकि परीक्षा में उपस्थिति नियमित रूप से दर्ज होती है। ऐसे में केवल अंकसूची में दर्ज स्थिति के आधार पर B.Ed. की वैधता पर सवाल उठाना उचित नहीं माना जा सकता।
अब विभागीय अनुमति और पदोन्नति में योग्यता दर्ज करने का रास्ता साफ?
विश्वविद्यालय द्वारा अंकसूची एवं अभिलेखों की सत्यता प्रमाणित किए जाने के बाद अब मुख्य सवाल सेवा अवधि के दौरान विभागीय अनुमति तथा पदोन्नति के लिए B.Ed. योग्यता को दर्ज किए जाने से जुड़ा है। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर संबंधित पक्ष का कहना है कि यदि विभागीय नियमों के अनुरूप अन्य आवश्यक शर्तें भी पूरी होती हैं, तो विभागीय अनुमति तथा पदोन्नति में B.Ed. योग्यता दर्ज किए जाने संबंधी आवेदन पर नियमानुसार विचार किया जाना उचित होगा।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि जिस B.Ed. डिग्री की सत्यता को लेकर सवाल खड़े हुए थे, उसके अभिलेखों का संबंधित विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड से सत्यापन कराया गया और विश्वविद्यालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर दस्तावेजों को वास्तविक एवं अपने द्वारा जारी होना प्रमाणित किया है।
आरोपों से ज्यादा अहम है आधिकारिक सत्यापन
शैक्षणिक योग्यता को लेकर किसी भी कर्मचारी या शिक्षक पर सवाल उठना गंभीर विषय है, लेकिन ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक अभिलेखों और सक्षम संस्था के सत्यापन के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। अनिल रात्रे के मामले में विश्वविद्यालय द्वारा जारी सत्यापन पत्र ने कम से कम B.Ed. अभिलेखों की प्रामाणिकता के संबंध में महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट कर दी है।
अब आगे की प्रक्रिया में सेवा अवधि के दौरान विभागीय अनुमति, अध्ययन की प्रकृति और पदोन्नति के लिए लागू विभागीय नियमों की जांच संबंधित सक्षम अधिकारी द्वारा की जानी है। इस सत्यापन के बाद मामले को लेकर चल रही चर्चाओं में नया मोड़ आया है और B.Ed. की डिग्री फर्जी या अमान्य होने संबंधी आशंकाओं पर आधिकारिक सत्यापन से स्पष्टता सामने आई है।







