आंगनबाड़ी केंद्रों में सीधी भर्ती के विरोध में मुखर हुआ संयुक्त मंच, लंबित मांगों को लेकर मंत्रालय में गरजी कार्यकर्ता-सहायिकाओं की आवाज
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कम मानदेय, बढ़ते कार्यभार और मूलभूत सुविधाओं की कमी पर जताई नाराजगी — सचिव से मुलाकात कर मांगों पर शीघ्र निर्णय की मांग
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** रायपुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संयुक्त मंच छत्तीसगढ़ ने आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रस्तावित सीधी भर्ती प्रक्रिया का विरोध करते हुए अपनी लंबित मांगों को लेकर शासन के समक्ष आवाज बुलंद की है। गुरुवार को संयुक्त मंच के संयोजक मंडल एवं विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल मंत्रालय पहुंचा और महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं से लगातार बढ़ते दायित्वों के बीच उनकी मूलभूत सुविधाओं, मानदेय और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल में सुधा रात्रे, रुक्मणी सज्जन, अनिता नायक, दुर्गा यादव, सुरेखा शर्मा सहित विभिन्न जिलों के पदाधिकारी शामिल रहे। पदाधिकारियों ने बैठक के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की समस्याओं को विस्तार से रखा तथा सीधी भर्ती प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
50 वर्ष से अधिक पुरानी व्यवस्था, फिर भी सुविधाओं का इंतजार
संयुक्त मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) की स्थापना को पांच दशक से अधिक समय बीत चुका है। इस लंबी अवधि में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं गांव-गांव और बस्तियों तक शासन की योजनाओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं, लेकिन आज भी उन्हें अपेक्षित मानदेय और सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का इंतजार है।
मंच का कहना है कि कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा तथा पारिवारिक एवं स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों में पर्याप्त अवकाश जैसी सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। पदाधिकारियों ने शासन से मांग की कि लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मियों की समस्याओं को केवल विभागीय दायित्व के रूप में नहीं, बल्कि उनके सामाजिक एवं आर्थिक भविष्य से जुड़े विषय के रूप में देखा जाए।
बढ़ते काम के बोझ पर भी उठाई आवाज
संयुक्त मंच ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर लगातार काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के मूल दायित्वों के अलावा समय-समय पर अन्य विभागों से संबंधित कार्य भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कराए जाते हैं।
पदाधिकारियों के अनुसार, जमीनी स्तर पर शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त संसाधन, समय पर मानदेय और उनके कार्यभार के अनुरूप पारिश्रमिक नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है।
गैस सिलेंडर से लेकर मोबाइल-इंटरनेट तक सुविधाओं की मांग
संयुक्त मंच ने आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाने के लिए कई व्यावहारिक मांगें भी शासन के सामने रखीं। इनमें आंगनबाड़ी केंद्रों में गैस सिलेंडर एवं रसोई की सुविधा उपलब्ध कराने, प्रत्येक केंद्र को प्रतिवर्ष कम से कम छह गैस सिलेंडर देने, कार्यकर्ताओं को मोबाइल/टैबलेट एवं इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने की मांग प्रमुख रही।
इसके साथ ही मंच ने मानदेय का नियमित एवं एकमुश्त भुगतान, ईंधन एवं पोषण आहार की राशि में वृद्धि सहित अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की।
मातृ वंदना योजना की लंबित राशि का भी मुद्दा
प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत लंबित प्रोत्साहन राशि के भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। पदाधिकारियों ने मांग की कि योजना से संबंधित प्रोत्साहन राशि का भुगतान समयबद्ध तरीके से किया जाए, ताकि कार्यकर्ताओं को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
वहीं, अतिरिक्त विभागीय कार्य सौंपे जाने की स्थिति में लिखित आदेश एवं अतिरिक्त पारिश्रमिक देने तथा अनावश्यक रजिस्टरों और कागजी कार्यवाही के बोझ को कम करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।
“मांगें सुविधा नहीं, काम के लिए जरूरी संसाधन हैं”
संयुक्त मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी मांगें किसी विशेष सुविधा या अतिरिक्त लाभ तक सीमित नहीं हैं। ये मांगें आंगनबाड़ी केंद्रों के सुचारु संचालन तथा कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं द्वारा अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने के लिए आवश्यक मूलभूत संसाधनों, सामाजिक सुरक्षा और निर्धारित पारिश्रमिक से जुड़ी हैं।
उन्होंने शासन से मांग की कि ज्ञापन में शामिल सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए समयबद्ध निर्णय और ठोस कार्रवाई की जाए।
विभिन्न जिलों से पहुंचे पदाधिकारी
मंत्रालय में सचिव से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में कांकेर जिला अध्यक्ष जयश्री राजपूत, जगदलपुर जिला उपाध्यक्ष वंदना दास, जिला सचिव भुवनेश्वरी पुजारी, कोंडागांव जिला अध्यक्ष लक्ष्मी बघेल, बीजापुर जिला उपाध्यक्ष रेली ओयामी, सुकमा जिला अध्यक्ष दयावती यलम, प्रांतीय उपाध्यक्ष पार्वती नाग, रुक्मणी सज्जन, दंतेवाड़ा जिला अध्यक्ष रानी राव तथा अभनपुर से आमदी तारक सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
संयुक्त मंच ने उम्मीद जताई कि शासन उनकी समस्याओं और मांगों पर सकारात्मक पहल करते हुए जल्द निर्णय लेगा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्रों की सुविधाओं के साथ-साथ वहां काम करने वाले कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की समस्याओं का समाधान भी समान रूप से जरूरी है।







