August 20, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। स्मार्टफोन आज जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन यही स्मार्टफोन जरा-सी लापरवाही में निजी जिंदगी, तस्वीरों, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंकिंग सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा भी बन सकता है। साइबर अपराधियों के बढ़ते जाल के बीच कमला नेहरू महाविद्यालय में आयोजित ‘साइबर सुरक्षा की पाठशाला’ में पुलिस ने छात्र-छात्राओं को डिजिटल दुनिया में सतर्कता का पाठ पढ़ाया। कार्यक्रम में प्रशिक्षु उपनिरीक्षक सुश्री मंजू रात्रे ने छात्राओं को खास तौर पर सचेत करते हुए कहा कि “कोई कितना भी करीबी क्यों न हो, अपना मोबाइल फोन किसी के साथ शेयर न करें।”
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में कोरबा जिला पुलिस की टीम ने साइबर फ्रॉड, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
“करीबी रिश्ते में भी डिजिटल लापरवाही न करें”
प्रशिक्षु एसआई मंजू रात्रे ने छात्राओं से कहा कि साइबर अपराध के मामलों में कई बार विश्वास ही सबसे बड़ा जोखिम बन जाता है। कोई दोस्त, परिचित या बेहद करीबी व्यक्ति हो, तब भी अपना मोबाइल फोन उसके हाथ में देना अथवा निजी डिजिटल जानकारी साझा करना भविष्य में गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि छात्राएं अपनी तस्वीरों और निजी जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा करते समय विशेष सावधानी बरतें। सोशल मीडिया अकाउंट को यथासंभव प्राइवेट मोड में रखें, ताकि अनजान लोग निजी तस्वीरों अथवा जानकारी का गलत इस्तेमाल न कर सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर साइबर ठगी या डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हो जाएं तो घबराने के बजाय तत्काल पुलिस से संपर्क करें और 1930 पर सूचना देकर मदद प्राप्त करें। समय पर शिकायत करना नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
“पुलिस से डरें नहीं, उसे अपना सहयोगी समझें”
मंजू रात्रे ने छात्र-छात्राओं से कहा कि पुलिस से बेवजह घबराने की जरूरत नहीं है। पुलिस को समाज का सहयोगी और मित्र समझकर किसी भी संदिग्ध घटना की जानकारी तत्काल दें। उन्होंने कहा कि अपराधियों का हौसला अक्सर लोगों की चुप्पी और डर से बढ़ता है। इसलिए स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार, दोस्तों तथा आसपास के लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।
साइबर अपराध का बदला चेहरा, अब अपराधी घर बैठे कर रहे वार
अपर सहायक उपनिरीक्षक टंकेश्वर यादव ने भी छात्र-छात्राओं से अपने अनुभव साझा करते हुए साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय बताए। उन्होंने डिजिटल दुनिया में सतर्कता, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और समय पर पुलिस को सूचना देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में प्रशिक्षु एसआई नीरज वर्मा, आरक्षक आलोक पांडेय, कौशल प्रसाद एवं महिला आरक्षक श्रीमती अर्चना तिर्की सहित पुलिस परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। महाविद्यालय परिवार से टीपी नरसिम्हम, शिक्षा संकाय की प्रभारी डॉ. भारती कुलदीप, डॉ. रश्मि शुक्ला एवं श्रीमती अनीता यादव की भी उपस्थिति रही।
बॉक्स — साइबर जागृति अभियान से जुड़ें, खुद भी जागें और दूसरों को भी जगाएं : नीरज वर्मा
प्रशिक्षु एसआई नीरज वर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा कोरबा सहित पूरे प्रदेश में साइबर जागृति अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक जारी रहेगा। अभियान के अंतर्गत स्कूलों, महाविद्यालयों और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से आम नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले अपराधी अक्सर घटनास्थल पर पहुंचकर अपराध करते थे, लेकिन इंटरनेट और स्मार्टफोन के दौर में अपराध का तरीका बदल गया है। अब अपराधी दूर बैठकर भी लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग में जागरूकता अपेक्षाकृत अधिक है, लेकिन बुजुर्ग और बच्चे कई बार साइबर ठगी का आसान शिकार बन जाते हैं। ऐसे में युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी लगातार जागरूक करें।
बॉक्स — डिजिटल युग में स्मार्ट यूजर बनना ही सबसे बड़ी सुरक्षा : डॉ. प्रशांत
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर ने कहा कि इंटरनेट और स्मार्टफोन आज हमारी बुनियादी जरूरतों में शामिल हो चुके हैं, लेकिन इनके साथ साइबर अपराध का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। साइबर अपराधी लोगों के लालच, डर और अज्ञानता का फायदा उठाते हैं।
उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक करना, संदिग्ध संदेश पर भरोसा करना या किसी अनजान व्यक्ति के झांसे में आना भारी पड़ सकता है। इसलिए डिजिटल दुनिया में सुविधा के साथ सावधानी भी जरूरी है। स्मार्टफोन का स्मार्ट उपयोग ही साइबर अपराध से बचाव की पहली सीढ़ी है।
संदेश साफ है—डिजिटल दुनिया में भरोसा करें, लेकिन आंखें बंद करके नहीं; सुविधा का इस्तेमाल करें, मगर सुरक्षा को नजरअंदाज किए बिना।

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