August 18, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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चरक जयंती पर कोरबा में गूंजा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का संदेश, औषधीय पौधों के वितरण के साथ हुआ निःशुल्क आयुर्वेद-योग चिकित्सा शिविर

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आयुष मेडिकल एसोसिएशन एवं लायंस क्लब एवरेस्ट की अभिनव पहल — आंवला, गिलोय, नीम, तुलसी और एलोवेरा के पौधों का निःशुल्क वितरण, जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का दिया संदेश
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**  कोरबा। श्रावण शुक्ल पंचमी अर्थात नागपंचमी के पावन अवसर पर आयुर्वेदाचार्य महर्षि चरक की जयंती श्रद्धा, सेवा और जनकल्याण की भावना के साथ मनाई गई। आयुष मेडिकल एसोसिएशन एवं लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट के संयुक्त तत्वावधान में पतंजलि चिकित्सालय, श्री शिव औषधालय, महानदी कॉम्प्लेक्स, निहारिका रोड कोरबा में निःशुल्क आयुर्वेद-योग चिकित्सा परामर्श शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में जनस्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आंवला, गिलोय, नीम, तुलसी, एलोवेरा सहित विभिन्न आयुर्वेदिक औषधीय पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया। साथ ही इन औषधीय पौधों को विभिन्न स्थानों पर रोपित कर पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश भी दिया गया।
“चरक संहिता केवल चिकित्सा शास्त्र नहीं, जीवन का शास्त्र है”

 

इस अवसर पर डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने महर्षि चरक के जीवन, आयुर्वेद में उनके योगदान और चरक संहिता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद ग्रंथ भावप्रकाश के अनुसार श्रावण शुक्ल पंचमी, अर्थात नागपंचमी को आयुर्वेदाचार्य महर्षि चरक की जन्मतिथि माना गया है। इसी मान्यता के अनुरूप प्रतिवर्ष नागपंचमी के दिन महर्षि चरक जयंती मनाई जाती है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि “चरक संहिता केवल चिकित्सा शास्त्र नहीं है, अपितु जीवन का शास्त्र है।” इसमें चिकित्सा के साथ-साथ स्वस्थ जीवन जीने की व्यापक दृष्टि प्रदान की गई है। आचार्य चरक ने औषधि चिकित्सा के सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत कर मानव समाज के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में अमूल्य योगदान दिया।
निरोगी जीवन के लिए चरक के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान
डॉ. शर्मा ने कहा कि आज के बदलते जीवनशैली के दौर में महर्षि चरक के सिद्धांत और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य चरक के बताए मार्ग पर चलकर व्यक्ति स्वस्थ और संतुलित जीवन की ओर बढ़ सकता है।
उन्होंने चरक संहिता में वर्णित श्लोक के माध्यम से स्वस्थ जीवन का संदेश दिया—
“नरो हिताहार विहार सेवी समीक्ष्यकारी विषयेष्वसक्तः।
दातासमः सत्यपरः क्षमावान् आप्तोपसेवी च भवत्यरोगः।। ”
उन्होंने इसका भावार्थ बताते हुए कहा कि हितकर आहार-विहार का सेवन करने वाला, विचारपूर्वक कार्य करने वाला, विषयों के प्रति अनावश्यक आसक्ति न रखने वाला, दानशील, समदृष्टि रखने वाला, सत्य बोलने वाला, क्षमाशील तथा सज्जनों की संगति करने वाला व्यक्ति स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर रहता है।
औषधीय पौधों के जरिए घर-घर तक पहुंचे आयुर्वेद का संदेश
चरक जयंती के अवसर पर आयोजित शिविर में लोगों को आयुर्वेद और योग से संबंधित निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। इसके साथ ही आंवला, गिलोय, नीम, तुलसी और एलोवेरा जैसे उपयोगी औषधीय पौधों का वितरण किया गया।
आयोजकों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल पौधों का वितरण करना नहीं, बल्कि लोगों को अपने आसपास औषधीय पौधे लगाने, प्रकृति से जुड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम के माध्यम से “स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज” की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
चिकित्सकों और समाजसेवियों की रही सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम में डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा, डॉ. संजय वैष्णव, डॉ. सुरेंद्र मिश्रा, डॉ. सुधांशु शर्मा, डॉ. जितेंद्र नारायण शर्मा, डॉ. लव कुमार साहू, डॉ. प्रदीप कश्यप, डॉ. अजय निर्मलकर, डॉ. नंदिनी तिवारी, डॉ. राजेश राठौर एवं डॉ. वागेश्वरी शर्मा सहित अन्य चिकित्सकों ने सहभागिता की।
वहीं श्री शिव औषधालय की संचालिका श्रीमती प्रतिभा शर्मा, लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट के क्लब डायरेक्टर लायन शिव जायसवाल, सचिव लायन प्रत्युष सक्सेना, कोषाध्यक्ष लायन सुधीर सक्सेना के साथ नेत्रनन्दन साहू, अश्वनी बुनकर, अरुण मानिकपुरी, धीरज तंबोली, कुश गुप्ता, मनीष कौशिक, कमल धारिया, देवबली कुंभकार, सिद्धराम शाहनी, अनुराग कंवर, गुनगुन राठीया, खुशबु कुमार, कांची सिंह, शैल निषाद एवं पंचकर्म टेक्नीशियन पिंकी बरेठ ने विशेष रूप से उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी ने मिलकर “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की प्रार्थना की तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति के उत्तम स्वास्थ्य, सुख और कल्याण की कामना की।
चरक जयंती पर आयोजित यह आयोजन चिकित्सा सेवा, आयुर्वेदिक परंपरा, औषधीय पौधों के संरक्षण और जनस्वास्थ्य जागरूकता को एक साथ जोड़ने वाली सार्थक पहल के रूप में सामने आया।

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