जवाली में आवारा पशुओं की व्यवस्था पर तीसरी और अंतिम बैठक, गौठान से गौधाम तक उठे कई गंभीर सवाल
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53 ग्रामीणों की मौजूदगी में बनी व्यवस्था की रूपरेखा; चारा-पानी, चरवाहा, चौकीदार, किसानों की फसल और पंचायत के खर्च पर हुई खुली चर्चा
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** जवाली। ग्राम पंचायत जवाली में आवारा एवं लावारिस पशुओं की समस्या को लेकर तीसरी और अंतिम बैठक शनिवार शाम 5 बजे बाजारपारा मंच में आयोजित की गई। बैठक में ग्राम पंचायत के सरपंच, 21 पंचों में से 5 पंच तथा 47 अन्य ग्रामीणों सहित कुल 53 लोगों की उपस्थिति रही। बैठक का मुख्य उद्देश्य गांव में खुले में घूम रहे गाय-बैलों एवं अन्य पशुओं के कारण किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान को रोकने के साथ-साथ पशुओं के लिए व्यवस्थित संरक्षण व्यवस्था तैयार करना रहा।
कलेक्टर के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ग्राम पंचायत सरपंच के आदेश पर कोटवार फागून दास द्वारा मुनादी क्रमांक-12 के माध्यम से ग्रामीणों को बैठक की सूचना दी गई थी। बैठक में पुराने वर्षों की व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए आवारा पशुओं को गौठान में रखने, चरवाहे एवं चौकीदार नियुक्त करने तथा गौठान के संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
खुले में घूम रहे सैकड़ों पशु, किसानों की फसल पर बढ़ा खतरा
बैठक में ग्रामीणों ने सबसे प्रमुख समस्या के रूप में गांव की सड़कों और खेतों में खुले घूम रहे पशुओं का मुद्दा उठाया। ग्रामीणों के अनुसार कृषि कार्य शुरू होने के साथ ही किसानों के सामने फसल सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गई है। अकाल जैसी परिस्थितियों की चिंता के बीच किसानों ने बड़ी मुश्किल से कृषि कार्य शुरू किया है, ऐसे समय में खुले में घूमने वाले पशुओं द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति ने परेशानी और बढ़ा दी है।
बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि गांव में खुले में घूमने वाले आवारा पशुओं को ग्राम के गौठान में ले जाकर रखा जाए। इसके लिए चरवाहों, चौकीदार तथा आवश्यकता के अनुसार अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति उचित मानदेय पर करने की बात सामने आई।

1126 राशन कार्डधारकों से छह महीने तक एक किलो चावल लेने का प्रस्ताव
गौठान के संचालन और कर्मचारियों के मानदेय के लिए ग्रामीण स्तर पर आर्थिक व्यवस्था बनाने पर भी चर्चा हुई। बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि गांव के चार प्रकार के राशन कार्डधारकों से प्रति परिवार प्रति माह एक किलो चावल, लगातार छह माह तक जमा कराया जाए।
बैठक में राशन कार्डधारकों की संख्या लगभग 1126 बताई गई तथा इससे प्राप्त होने वाली संभावित राशि का अनुमान लगभग 22 से 25 हजार रुपये के बीच बताया गया। हालांकि इस व्यवस्था के अंतिम स्वरूप और इसके क्रियान्वयन को लेकर आगे की प्रक्रिया स्पष्ट की जानी बाकी है।
पशु विभाग के आंकड़ों ने बढ़ाई चुनौती
बैठक में पशु विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दिवाकर से प्राप्त जानकारी का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि उनके अधीन लगभग 13 गांवों में करीब 7420 पशुओं की देखरेख और उपचार संबंधी जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों के अनुसार जवाली में किसानों के पास लगभग 600 गाय-बैल, जबकि चाकाबूढ़ा में करीब 850 पशु हैं। इसके अलावा गांव में खुले रूप से घूमने वाले पशुओं की संख्या लगभग 1100 होने का अनुमान बैठक में सामने आया। यही पशु किसानों की फसल के लिए सबसे बड़ी समस्या बताए गए।
चाकाबूढ़ा पंचायत के सहयोग पर भी होगा फैसला
बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि पिछले वर्ष ग्राम पंचायत चाकाबूढ़ा द्वारा गौठान संचालन के लिए लगभग 20 हजार रुपये प्रतिमाह सहयोग दिया गया था। दोनों गांव आपस में जुड़े होने तथा दोनों पंचायतों के पशुओं को एक ही गौठान में रखे जाने के कारण यह सहयोग महत्वपूर्ण माना गया।
इस वर्ष चाकाबूढ़ा पंचायत से सहयोग राशि बढ़ाने अथवा वहां अलग से पशु प्रबंधन व्यवस्था लागू करने को लेकर दोनों पंचायतों के सरपंच एवं पंचों के बीच लिखित रूप से विचार-विमर्श किए जाने की बात कही गई।
चार चरवाहे और एक चौकीदार, 9-9 हजार रुपये मानदेय का प्रस्ताव
गौठान संचालन के लिए पिछले वर्ष की व्यवस्था के अनुसार इस वर्ष भी चार चरवाहों और एक चौकीदार की नियुक्ति का प्रस्ताव सामने आया। प्रत्येक को लगभग 9 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिए जाने पर चर्चा हुई।
साथ ही यह भी तय करने की बात कही गई कि जिन किसानों के अपने गाय-बैल हैं, वे स्वयं उनके लिए चराई की व्यवस्था करें या निजी चरवाहे की व्यवस्था करें। यदि पशु मालिक अपने पशुओं की देखरेख नहीं करते और पशु खुले में घूमते पाए जाते हैं, तो उन्हें आवारा पशुओं की श्रेणी में रखते हुए गौठान में ले जाने की व्यवस्था की जाएगी।
हालांकि पशु मालिकों के अधिकार, पशुओं की पहचान और उन्हें वापस करने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट नियम बनाना भी आवश्यक बताया गया, ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
गोबर खाद और पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
बैठक में गोबर खाद से संबंधित एक प्रस्ताव ने भी चर्चा का विषय बनाया। उपस्थित ग्रामीणों के बीच हुई चर्चा के अनुसार सक्रिय रूप से कार्य करने वाले पांच पंचों को उनके सहयोग के नाम पर एक-एक ट्रैक्टर गोबर खाद दिए जाने का प्रस्ताव सामने आया।
बैठक में यह भी बताया गया कि एक कार्यकाल में कम से कम 20 ट्रैक्टर गोबर खाद एकत्रित किया जाता है। वहीं कुछ ग्रामीणों ने पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा पशुओं की बिक्री से प्राप्त राशि तथा उससे जुड़े खर्चों को लेकर पारदर्शिता की आवश्यकता पर सवाल उठाए।
ग्रामीणों का कहना था कि यदि पशुओं की बिक्री से कोई राशि प्राप्त होती है तो उसकी कुल आय, खर्च, पशुओं की संख्या, बिक्री का कारण और शेष राशि का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद या आरोप-प्रत्यारोप पैदा न हो।
गौठान में पहले व्यवस्था मजबूत हो, फिर हजारों पशुओं वाले गौधाम की बात
बैठक में भविष्य में इसी गौठान को बड़े स्तर पर गौधाम के रूप में विकसित करने और संभावित रूप से करोड़ों रुपये की योजना पर भी चर्चा हुई। लेकिन इसी चर्चा के बीच ग्रामीणों ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया—जब वर्तमान गौठान में ही पर्याप्त चारा, पानी, छाया, सुरक्षा और रखरखाव की व्यवस्था पूरी तरह उपलब्ध नहीं है, तो भविष्य में हजारों पशुओं को रखने वाली बड़ी योजना जमीन पर कैसे सफल होगी?
ग्रामीणों ने सीमित स्थान में बड़ी संख्या में पशुओं को रखने से उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि यदि पशुओं को केवल एक परिसर में बंद कर दिया गया और उनके लिए पर्याप्त चारा, पानी, छाया, चिकित्सा तथा सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई, तो संरक्षण के बजाय समस्या और गंभीर हो सकती है।
111 दिनों में 240 पशुओं की मृत्यु का दावा, अंतिम संस्कार में 80 हजार खर्च का उल्लेख
बैठक में पिछले वर्ष की स्थिति का उल्लेख करते हुए ग्रामीणों की ओर से बताया गया कि लगभग 111 दिनों में 240 गाय-बैलों की मृत्यु हुई थी। इनके अंतिम संस्कार में करीब 80 हजार रुपये खर्च होने की बात भी बैठक में सामने आई।
यह आंकड़ा ग्रामीणों के लिए सबसे गंभीर चिंता का विषय रहा। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि बड़ी संख्या में पशु गौठान में रखे जाते हैं तो उनकी नियमित चिकित्सा, पौष्टिक चारा, स्वच्छ पानी, पर्याप्त स्थान और मौसम से बचाव की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करनी होगी।
टूटे घेरे, कमजोर दरवाजे और चारे की कमी पर चिंता
गौठान की मौजूदा स्थिति को लेकर भी बैठक में कई सवाल उठाए गए। ग्रामीणों के अनुसार गौठान में पशुओं के लिए पर्याप्त आश्रय नहीं है और बड़ी संख्या में पशुओं को रात में खुले आसमान के नीचे रहना पड़ता है।
घेरा और दरवाजे की स्थिति को लेकर भी चिंता


