एक तीर, एक कमान और एकजुट आदिवासी समाज का संकल्प—करतला में गूंजा स्वाभिमान का संदेश
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30 किलोमीटर की स्वाभिमान मोटरसाइकिल रैली से वनांचल हुआ राष्ट्र और समाज की एकता के नारों से गूंजायमान, पारंपरिक वेशभूषा, व्यंजन, खेल और संस्कृति ने मोहा मन
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** करतला। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर वनांचल ग्राम करतला में सर्व आदिवासी समाज द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम ने इस बार संस्कृति, परंपरा, सामाजिक एकता और स्वाभिमान का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान पूरा वनांचल “एक तीर, एक कमान—आदिवासी एक समान” और “जल, जंगल, जमीन की रक्षा कौन करेगा—हम करेंगे, हम करेंगे” जैसे नारों से गूंज उठा। करीब 30 किलोमीटर लंबी स्वाभिमान मोटरसाइकिल रैली ने आदिवासी समाज में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री फूलसिंह राठिया, विधायक रामपुर रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती फूलबाई राठिया, सरपंच करतला ने की। विशिष्ट अतिथियों में श्रीमती बीज मोती राठिया, अध्यक्ष जनपद पंचायत कोरबा, श्रीमती रेणुका राठिया, जिला पंचायत सदस्य क्रमांक 01, समस्त बीडीसी करतला कोरबा विकासखंड, समस्त सरपंच तथा सर्व आदिवासी समाज के प्रमुख उपस्थित रहे।
परंपरा के अनुरूप हुआ अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम का शुभारंभ आदिवासी पुरखा शक्ति ठाकुर देव, भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर का पूजन कर किया गया। इसके बाद आदिवासी परंपरा के अनुरूप अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया। राठिया महिला प्रकोष्ठ की सदस्यों ने सांकेतिक रूप से हाथ धुलाकर, पीला गमछा पहनाकर और पीले चावल से तिलक लगाकर अतिथियों का सम्मान किया।
स्वागत की यह परंपरागत शैली कार्यक्रम की विशेष पहचान बनी और उपस्थित लोगों ने आदिवासी संस्कृति की इस जीवंत झलक की सराहना की।
30 किलोमीटर की रैली ने भरा समाज में जोश
कार्यक्रम से पहले सर्व आदिवासी समाज के युवाओं द्वारा विशाल स्वाभिमान मोटरसाइकिल रैली निकाली गई। लगभग 30 किलोमीटर की इस रैली में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। रैली के दौरान आदिवासी एकता, जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और सामाजिक स्वाभिमान से जुड़े नारों ने पूरे वनांचल में उत्साह का वातावरण बना दिया।
करतला बस स्टैंड पहुंचने पर राठिया महिला प्रकोष्ठ एवं सर्व आदिवासी समाज की महिलाओं ने आरती उतारकर और तिलक लगाकर रैली का स्वागत किया। विधायक फूलसिंह राठिया एवं समाज प्रमुखों का श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया। इसके बाद महिला-पुरुष कर्मा पार्टी की उत्साहपूर्ण प्रस्तुति के साथ अतिथियों एवं रैली में शामिल लोगों को सद्भावना भवन लाया गया।
फूलसिंह राठिया बोले—संस्कृति और परंपरा को बचाना हमारी जिम्मेदारी
मुख्य अतिथि विधायक फूलसिंह राठिया ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और तीज-त्योहार हमारी पहचान हैं। इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के जीवन से जुड़ी पारंपरिक वस्तुएं एवं प्राचीन जीवनशैली धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं। ढेंकी, तिरही जैसी परंपरागत वस्तुओं को सहेजकर रखना और नई पीढ़ी को इनके महत्व से परिचित कराना जरूरी है। उन्होंने आयोजन समिति को इतने सुंदर एवं ऐतिहासिक आयोजन के लिए बधाई दी।
दुबराज राठिया ने कहा—परंपरा से जुड़कर ही अधिकारों की समझ मजबूत होगी
स्वागत भाषण में श्री दुबराज सिंह राठिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्व आदिवासी दिवस के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज से अपनी संस्कृति, परंपरा, तीज-त्योहार और देवी-देवताओं से जुड़े सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने की अपील की।
उन्होंने कहा कि समाज को अपनी पहचान और परंपराओं को समझते हुए अपने अधिकारों के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए।

हर गांव तक पहुंचे विश्व आदिवासी दिवस का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री दुर्गा प्रसाद राठिया ने कहा कि ऐसे आयोजन का विस्तार आदिवासी समाज के प्रत्येक गांव तक होना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी विश्व आदिवासी दिवस के महत्व और अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझ सके।
श्री अभिमन्यु राठिया ने समाज से एकजुटता के साथ प्रत्येक वर्ष इस दिवस को हर्षोल्लास से मनाने का आह्वान किया। वहीं अगरिया समाज के पुजेरीराम ने अगरिया और चोख जाति से जुड़े विषय पर अपनी बात रखी और समाज की चिंताओं को सामने रखा।
श्रीमती रेणुका राठिया ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज में एकता और भाईचारा बनाए रखते हुए संगठित होकर आगे बढ़ने की बात कही। उनके शायराना अंदाज में दिए गए संबोधन को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम में स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत आदिवासी संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। बच्चों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा और आदिवासी संस्कृति की रंग-बिरंगी छटा मंच पर जीवंत कर दी।
विलुप्त होते पारंपरिक व्यंजनों ने याद दिलाई मिट्टी की खुशबू
राठिया महिला प्रकोष्ठ द्वारा इस अवसर पर बालिकाओं एवं महिलाओं के लिए फुगड़ी, कुर्सी दौड़ और पतरी सिलाई प्रतियोगिता आयोजित की गई।
इसके साथ ही आदिवासी समाज के पारंपरिक एवं विलुप्त होते व्यंजनों का विशेष प्रदर्शन किया गया। महुआ लाटा, घोरिया रोटी, थोपोर्री रोटी, अइरसा रोटी, गुलगुल भजिया, हिंरवा रोटी, गूझा तथा मीठा-नमकीन चीला रोटी जैसे पारंपरिक व्यंजनों ने आयोजन को अलग पहचान दी। अतिथियों ने इन व्यंजनों का स्वाद लेकर महिला प्रकोष्ठ की पूरी टीम की सराहना की।
पारंपरिक वेशभूषा बनी आकर्षण का केंद्र
राठिया महिला प्रकोष्ठ द्वारा इस वर्ष कुछ नया करने की पहल के तहत आदिवासी पारंपरिक वेशभूषा का विशेष प्रदर्शन भी किया गया। पारंपरिक परिधान और संस्कृति की इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया और जमकर सराहना बटोरी।
बड़ी संख्या में समाज के लोग हुए शामिल
कार्यक्रम में राठिया, अगरिया, पैंकरा, उरांव और बिरहोर समाज सहित विभिन्न आदिवासी समाजों के पदाधिकारी एवं समाज प्रमुख उपस्थित रहे। इनमें बीज मोती राठिया, दीनानाथ राठिया, मुकेश राठिया, अंतराम राठिया, दुलार राठिया, घनश्याम राठिया, विनय सिंह राठिया, नुकेश राठिया, टिकेश्वर सिंह राठिया, कैलाश राम राठिया, तेजेश्वरी राठिया, विष्णु प्रसाद मंझवार, महेंद्र सिंह राठिया, छत्रपाल सिंह राठिया, गेवराज सिंह कंवर, जोतराम, राजाराम सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं समाज प्रमुख मौजूद रहे।
राठिया कंवर विकासशील समिति से यादनसिंह राठिया, करमसिंह राठिया, दुबराज सिंह राठिया, कुमार सिंह राठिया, नरेश्वर सिंह राठिया, सागर सिंह राठिया, रामलाल राठिया, निर्मल सिंह राठिया, सत्यपाल सिंह राठिया, चनेशराम राठिया एवं ऋषि राठिया सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।
राठिया महिला प्रकोष्ठ से भावना राठिया, बिमला राठिया, त्रिवेणी राठिया, संतोषी राठिया, रामेश्वरी राठिया, नीरा राठिया, चन्द्रमा राठिया, चंद्रकांति राठिया, दीना राठिया, रजमोती राठिया, लीला राठिया, लीलावती राठिया, शैल कुमारी राठिया, कपिला राठिया, कनक कंवर, मंजू कंवर एवं मनियारो राठिया, नीतू राठिया सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं।
कार्यक्रम के अंत में श्री मनमोहन सिंह राठिया एवं श्री देवेंद्र सिंह राठिया ने अतिथियों और उपस्थित समाजजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन रामलाल राठिया खुंटाकुड़ा एवं दुबराज सिंह राठिया ने किया।
करतला का यह आयोजन केवल विश्व आदिवासी दिवस का उत्सव नहीं रहा, बल्कि अपनी संस्कृति बचाने, परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सामाजिक एकता को मजबूत करने के सामूहिक संकल्प का प्रभावशाली मंच बनकर सामने आया।


