August 10, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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मौत के बाद उठे सवालों पर अस्पताल का विस्तृत पक्ष—ICU से NIV, वेंटिलेटर और एडवांस लाइफ सपोर्ट तक चला जिंदगी बचाने का संघर्ष
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। 62 वर्षीय सविता जायसवाल की मौत के बाद इलाज को लेकर उठे सवालों के बीच शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन ने अपना विस्तृत पक्ष सामने रखा है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सविता जायसवाल को जब अस्पताल लाया गया, उस समय उनकी चिकित्सकीय स्थिति पहले से ही बेहद गंभीर थी। सांस लेने में भारी परेशानी, बेहद कम ऑक्सीजन लेवल और निम्न रक्तचाप जैसी गंभीर परिस्थितियों के बीच चिकित्सकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मरीज की जान बचाना थी।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, मरीज को अस्पताल पहुंचते ही तत्काल ICU में भर्ती कर उपचार प्रारंभ किया गया। चिकित्सकों की टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लगातार निगरानी रखी और आवश्यकतानुसार NIV सपोर्ट से लेकर वेंटिलेटर तथा एडवांस लाइफ सपोर्ट तक की चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई।
एक-एक सांस के लिए डॉक्टरों की टीम करती रही संघर्ष
शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन का कहना है कि यह ऐसा मामला था, जहां हर गुजरता पल बेहद महत्वपूर्ण था। मरीज की हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। ICU में उनकी निरंतर निगरानी की गई। ऑक्सीजन सपोर्ट से संबंधित किसी भी स्थिति में मेडिकल स्टाफ ने तत्काल हस्तक्षेप किया।
स्थिति बिगड़ने पर मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया तथा चिकित्सकों की टीम ने एडवांस लाइफ सपोर्ट के माध्यम से उन्हें स्थिर करने का हर संभव प्रयास किया। अस्पताल के मुताबिक उपचार के दौरान उपलब्ध चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक कदम उठाए गए।
अस्पताल प्रबंधन का स्पष्ट कहना है कि मरीज को बचाने के प्रयासों में कोई कमी नहीं छोड़ी गई। इसके बावजूद मरीज की अत्यंत गंभीर चिकित्सकीय स्थिति के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
‘कोरे कागज पर हस्ताक्षर’ के आरोप पर अस्पताल ने दी सफाई
मरीज के परिजनों की ओर से लगाए गए कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने के आरोप को भी शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन ने खारिज किया है।
प्रबंधन के अनुसार गंभीर मरीज के उपचार के दौरान परिजनों को मरीज की स्थिति, प्रस्तावित उपचार तथा संभावित जोखिमों के संबंध में जानकारी दी जाती है और नियमानुसार Informed Consent लिया जाता है। अस्पताल का कहना है कि इसे कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने के रूप में प्रस्तुत करना वास्तविक प्रक्रिया से अलग है।
बिना लाइसेंस और योग्य डॉक्टरों के संचालन के आरोप भी नकारे
शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन ने अस्पताल के बिना आवश्यक अनुमति, योग्य चिकित्सकों और जरूरी चिकित्सा सुविधाओं के संचालन से जुड़े आरोपों को भी निराधार बताया है।
प्रबंधन के अनुसार अस्पताल में आवश्यक अनुमतियां, प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ, विशेषज्ञ चिकित्सक तथा मरीजों की गंभीर स्थिति में उपचार के लिए जरूरी चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हैं। अस्पताल का कहना है कि गंभीर मरीजों के उपचार में आवश्यक चिकित्सा संसाधनों का उपयोग किया जाता है और सविता जायसवाल के मामले में भी उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया गया।
मौत का दुख अपनी जगह, लेकिन इलाज में लापरवाही का आरोप स्वीकार नहीं
शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन ने कहा कि किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोने से बड़ा दुख कोई नहीं हो सकता। सविता जायसवाल की मृत्यु निश्चित रूप से अत्यंत दुखद है और अस्पताल परिवार भी इस घटना को लेकर संवेदनशील है।
हालांकि प्रबंधन का कहना है कि दुखद परिणाम को सीधे चिकित्सा लापरवाही का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अस्पताल के अनुसार मरीज की स्थिति अस्पताल पहुंचने के समय ही अत्यंत गंभीर थी और डॉक्टरों एवं मेडिकल स्टाफ ने ICU से लेकर वेंटिलेटर और एडवांस लाइफ सपोर्ट तक उन्हें बचाने के लिए लगातार प्रयास किए।
सवालों के बीच अस्पताल का भरोसा—रिकॉर्ड और चिकित्सा प्रक्रिया बताएगी पूरी सच्चाई
इस पूरे मामले में फिलहाल एक ओर मृतका के परिजनों की ओर से लगाए गए आरोप हैं, तो दूसरी ओर शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन अपना मेडिकल पक्ष रखते हुए उपचार प्रक्रिया को उचित बता रहा है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज की स्थिति, उपचार के दौरान उठाए गए कदम और उपलब्ध चिकित्सा रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले को देखा जाना चाहिए। यदि किसी स्तर पर जांच होती है तो अस्पताल प्रबंधन अपने मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार संबंधी दस्तावेज संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए तैयार है।
‘आखिरी सांस तक कोशिश की’—यही अस्पताल का दावा
शिवाय हॉस्पिटल का कहना है कि डॉक्टरों के लिए हर मरीज की जिंदगी महत्वपूर्ण होती है। सविता जायसवाल की हालत गंभीर होने के बावजूद चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ी। ICU की निगरानी से लेकर NIV, वेंटिलेटर और एडवांस लाइफ सपोर्ट तक हर जरूरी चिकित्सकीय प्रयास किया गया।
अस्पताल प्रबंधन का संदेश साफ है—मरीज को खोने का दुख अपनी जगह है, लेकिन उन्हें बचाने की कोशिश में डॉक्टरों की मेहनत और चिकित्सा प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
अब इस पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष भावनाओं या आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार प्रक्रिया और यदि आवश्यक हो तो विशेषज्ञ अथवा सक्षम प्राधिकारी की निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा।
शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन का दावा है कि सविता जायसवाल को बचाने के लिए टीम ने आखिरी सांस तक संघर्ष किया—मौत को टालने की हर संभव कोशिश की, लेकिन गंभीर चिकित्सकीय स्थिति के सामने आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई।

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