कोरबा के बहुचर्चित सुभमा खुसरो हत्याकांड में बड़ा फैसला: पत्नी की हत्या के दोषी पति को उम्रकैद
1 min read



तकिए से मुंह-नाक दबाकर की हत्या, साक्ष्य मिटाने के लिए शव को जलाने की कोशिश; हत्या और सबूत मिटाने के अपराध में न्यायालय ने सुनाई कठोर सजा
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। जिले के बहुचर्चित सुभमा खुसरो हत्याकांड में लगभग एक वर्ष बाद न्याय का महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। तृतीय अपर सत्र न्यायालय, कोरबा के पीठासीन न्यायाधीश सुनील कुमार नंदे ने आरोपी अभिषेक कुमार लेंदरे को अपनी पत्नी की हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के प्रयास को भी गंभीर अपराध मानते हुए अलग से 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
प्रेम विवाह का रिश्ता पहुंचा हत्या तक
अभियोजन के अनुसार, अभिषेक कुमार लेंदरे और सुभमा खुसरो ने 5 मई 2024 को बिलासपुर स्थित आर्य समाज मंदिर में प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद दोनों कोरबा के गोकुल नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में किराए के मकान में रह रहे थे। शुरुआती दिनों का प्रेम धीरे-धीरे विवाद में बदल गया और अंततः यह रिश्ता एक दर्दनाक हत्या पर समाप्त हुआ।
तकिए से दबाया मुंह-नाक, फिर आग लगाकर मिटाने लगा सबूत
न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार 22 जुलाई 2025 को दोपहर के समय आरोपी ने अपनी पत्नी सुभमा खुसरो का तकिए से मुंह और नाक दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद घटना को आत्महत्या या दुर्घटना का रूप देने के उद्देश्य से आरोपी ने कमरे में कागज और कपड़े एकत्र कर आग लगा दी, ताकि अपराध के महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट हो जाएं और वह कानून की गिरफ्त से बच सके।
लेकिन वैज्ञानिक जांच, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों ने पूरी घटना की परतें खोल दीं और अभियोजन आरोपी का अपराध न्यायालय में सिद्ध करने में सफल रहा।
न्यायालय ने सुनाया कठोर फैसला
तृतीय अपर सत्र न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास एवं 100 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
इसके अलावा न्यायालय ने बीएनएस की धारा 238 (साक्ष्य मिटाने) के तहत 3 वर्ष के कारावास एवं 100 रुपये अर्थदंड की भी सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अभियोजन की मजबूत पैरवी बनी फैसले का आधार
मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष साक्ष्यों और गवाहों को मजबूती से प्रस्तुत किया। अभियोजन की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।
जेल भेजने के आदेश
न्यायालय ने दोषसिद्ध आरोपी को सजा भुगतने के लिए जिला जेल, कोरबा भेजने का आदेश दिया। साथ ही निर्णय की प्रमाणित प्रति दोषसिद्ध व्यक्ति, लोक अभियोजक तथा जिला दंडाधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
हत्या के मामलों में सख्त संदेश
इस फैसले को घरेलू हिंसा और हत्या जैसे गंभीर अपराधों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हत्या कर साक्ष्य मिटाने का प्रयास करने वाले अपराधियों को कानून किसी भी स्थिति में राहत नहीं देता। यह फैसला ऐसे मामलों में कठोर दंड और न्याय व्यवस्था की दृढ़ता का संदेश देता है।


