⚡ कोरबा में लापरवाही पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन : डीईओ समेत कई अधिकारियों पर गिरी गाज, वेतन रोकने के आदेश से प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप
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जनहित और शासन की योजनाओं में ढिलाई अब नहीं होगी बर्दाश्त, कलेक्टर कुणाल दुदावत का सख्त संदेश— काम नहीं तो कार्रवाई तय
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा जिले में शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने अब सख्त प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है। लगातार समीक्षा बैठकों, चेतावनियों और कारण बताओ नोटिस के बावजूद कार्यशैली में सुधार नहीं होने पर कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) सहित कई अधिकारियों के वेतन रोकने और नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति बन गई है।
समय-सीमा (टीएल) बैठक में विभिन्न विभागों की प्रगति की समीक्षा के दौरान शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी जताई। पूर्व में दिए गए निर्देशों के पालन में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ उनका वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। बैठक में ही कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की योजनाओं में किसी भी प्रकार की ढिलाई अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
कार्रवाई केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं रही। पाली और छुरी नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (सीएमओ) के खिलाफ भी टीएल प्रकरणों के समय पर निराकरण नहीं करने पर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। वहीं पाली के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) के विरुद्ध भी लापरवाही पाए जाने पर नोटिस जारी कर वेतन रोकने की कार्रवाई के आदेश दिए गए।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने नशा मुक्ति अभियान की समीक्षा के दौरान भी सख्त रुख अपनाया। अभियान में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाने पर समाज कल्याण विभाग के उप संचालक का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन के प्राथमिकता वाले अभियानों में केवल कागजी प्रगति नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाई देने चाहिए।
बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, राजस्व, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा मुख्यमंत्री की फ्लैगशिप योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, खेल सुविधाओं का विस्तार और लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
कलेक्टर की इस सख्त कार्रवाई ने प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्ट संदेश दिया है कि अब लापरवाही, टालमटोल और आदेशों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी। शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भविष्य में भी इसी प्रकार की कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई को “जीरो टॉलरेंस” नीति का संकेत माना जा रहा है। अधिकारियों के बीच यह चर्चा तेज है कि अब केवल बैठकों में आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर योजना का परिणाम धरातल पर दिखाना होगा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के इस कड़े रुख से साफ हो गया है कि जनहित सर्वोपरि है और लापरवाही की कीमत अब सीधे जवाबदेही और कार्रवाई के रूप में चुकानी पड़ेगी।


