“आज से शुरू हुई आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: माँ दुर्गा की गुप्त आराधना का दिव्य पर्व, पहले दिन होती है माँ शैलपुत्री की पूजा”



साधना, शक्ति और सिद्धि का महापर्व; जानिए गुप्त नवरात्रि क्यों मनाई जाती है, पहले दिन किस देवी की पूजा होती है और क्या मिलता है इसका पुण्यफल
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा,15 जुलाई आज से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि पूरे देश में सार्वजनिक रूप से उत्सव के रूप में मनाई जाती हैं, वहीं गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से साधना, उपासना, शक्ति आराधना और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व मानी जाती है।
पहले दिन होती है माँ शैलपुत्री की पूजा
गुप्त नवरात्रि के प्रथम दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है। हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। माता को शुद्ध घी अर्पित करना, लाल या सफेद पुष्प चढ़ाना और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि माँ शैलपुत्री की आराधना से जीवन में स्थिरता, सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
क्यों मनाई जाती है गुप्त नवरात्रि?
गुप्त नवरात्रि देवी शक्ति की विशेष साधना का पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन नौ दिनों में मां दुर्गा की उपासना करने से साधक को आध्यात्मिक शक्ति, आत्मबल और देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस नवरात्रि को “गुप्त” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें साधना और पूजा अपेक्षाकृत एकांत और शांत वातावरण में की जाती है। यह आत्मचिंतन, संयम और ईश्वर के प्रति समर्पण का पर्व भी माना जाता है।
साल में दो बार क्यों आती है गुप्त नवरात्रि?
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में दो गुप्त नवरात्रियां मनाई जाती हैं—एक माघ मास में और दूसरी आषाढ़ मास में। इसके अलावा चैत्र और आश्विन (शारदीय) नवरात्रि भी होती हैं। इस प्रकार वर्ष में कुल चार नवरात्रियां आती हैं। प्रत्येक नवरात्रि का अपना अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है, जबकि गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से शक्ति उपासना और आत्मिक साधना के लिए जानी जाती है।
गुप्त नवरात्रि की पूजा से क्या मिलता है फल?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना करने पर—
परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
नकारात्मक ऊर्जा दूर होकर सकारात्मकता का संचार होता है।
आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति बढ़ती है।
जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रेरणा और शक्ति मिलती है।
घर-परिवार में मंगल, उन्नति और खुशहाली बनी रहती है।
कैसे करें पहले दिन की पूजा?
प्रातः स्नान के बाद घर के पूजा स्थल की साफ-सफाई कर कलश स्थापना करें। माँ शैलपुत्री का ध्यान करते हुए दीप प्रज्ज्वलित करें, फल-फूल, अक्षत, रोली और शुद्ध घी अर्पित करें। “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें तथा दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की प्रार्थना करें।
गुप्त नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, सेवा और शक्ति की उपासना का अवसर भी है। श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ मां भगवती की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन को नई शक्ति एवं शांति प्राप्त होती है।
जय माता दी।


