“सिर्फ एक यात्रा नहीं, मोक्ष और मानवता का महापर्व है भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा; जानिए क्यों खींचा जाता है रथ और क्यों उमड़ता है करोड़ों श्रद्धालुओं का जनसैलाब”



रथ की रस्सी खींचने को माना जाता है सौभाग्य का प्रतीक, भगवान स्वयं निकलते हैं भक्तों के बीच; आस्था, समानता और सेवा का देता है संदेश
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा,15 जुलाई 2026। गुरुवार, 16 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा पूरे देश के साथ कोरबा के दादरखुर्द में भी श्रद्धा और भक्ति के साथ निकाली जाएगी। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, मानवता, समानता और ईश्वर के प्रति समर्पण का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों-करोड़ों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ की एक झलक पाने और उनके रथ की रस्सी खींचने के लिए उमड़ पड़ते हैं।
भगवान स्वयं आते हैं अपने भक्तों के द्वार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्ष में एक बार भगवान श्री जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं। यह संदेश देता है कि ईश्वर केवल मंदिरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर भक्त के जीवन में उपस्थित हैं। रथयात्रा इस बात का प्रतीक है कि भगवान स्वयं अपने भक्तों का हाल-चाल जानने निकलते हैं।
क्यों खींचा जाता है रथ?
सनातन परंपरा में भगवान के रथ की रस्सी खींचना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से रथ खींचने वाला व्यक्ति भगवान की विशेष कृपा का पात्र बनता है। यह केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि यह अहंकार त्यागकर ईश्वर की सेवा और समाज की एकता का प्रतीक भी है। रथ की रस्सी में अमीर-गरीब, जाति-पंथ और ऊँच-नीच का कोई भेद नहीं होता। सभी मिलकर भगवान के रथ को आगे बढ़ाते हैं, जो सामाजिक समरसता का अद्भुत संदेश देता है।
रथयात्रा क्यों मनाई जाती है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्री जगन्नाथ अपनी मौसी के घर (गुंडीचा मंदिर) जाने के लिए रथयात्रा करते हैं। इसी यात्रा की स्मृति में यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। नौ दिनों तक भगवान अपने भक्तों के बीच रहते हैं और फिर पुनः अपने धाम लौटते हैं। यह यात्रा प्रेम, सेवा, करुणा और लोककल्याण का संदेश देती है।
रथयात्रा में क्यों शामिल होना चाहिए?
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन, रथयात्रा में सहभागिता और रथ की रस्सी खींचने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। यह पर्व हमें सेवा, सहयोग, समानता और सामूहिकता का संदेश देता है। परिवार सहित इस यात्रा में शामिल होना केवल धार्मिक अनुभव ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का भी एक श्रेष्ठ अवसर है।
दादरखुर्द में 126 वर्षों की गौरवशाली परंपरा
कोरबा जिले के दादरखुर्द स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में पिछले 126 वर्षों से भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा निरंतर निकाली जा रही है। यह आयोजन आज पूरे क्षेत्र की पहचान बन चुका है। इस वर्ष भी 16 जुलाई को सुबह विशेष पूजा-अर्चना, दोपहर में महाभंडारा तथा शाम 4 बजे भव्य रथयात्रा निकलेगी, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
आस्था के इस महापर्व में बनें सहभागी
आयोजन समिति ने समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे परिवार सहित रथयात्रा में शामिल होकर भगवान श्री जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें। भक्तों के जयघोष, भजन-कीर्तन, शंखनाद और श्रद्धा के वातावरण के बीच निकलने वाली यह ऐतिहासिक रथयात्रा निश्चित ही सभी के लिए अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बनेगी।
जय जगन्नाथ!
जय बलभद्र!
जय माता सुभद्रा!


