May 23, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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अहिरन नदी में मचा हड़कंप, बड़ी संख्या में मरी मिलीं मछलियां

 

विस्फोटक डालकर मछली शिकार की आशंका, जहरीले पानी को लेकर ग्रामीणों में दहशत
प्रशासन से जांच, पानी परीक्षण और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//  कोरबा। पश्चिम विकास नगर क्षेत्र अंतर्गत आईबीपी प्लांट के नीचे बह रही अहिरन नदी में शुक्रवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब नदी किनारे और पानी में बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां तैरती दिखाई दीं। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण और कॉलोनीवासी मौके पर पहुंच गए। नदी में सैकड़ों मछलियों के मृत मिलने से क्षेत्र में दहशत और नाराजगी का माहौल है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि देर रात कुछ अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा नदी में विस्फोटक और बारूद का इस्तेमाल कर अवैध तरीके से मछलियों का शिकार किया गया। ग्रामीणों के अनुसार तेज धमाकों के बाद पानी में जहरीले तत्व फैल गए, जिससे नदी में मौजूद मछलियां बड़ी संख्या में मर गईं। लोगों का कहना है कि विस्फोटक के प्रभाव से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा अचानक कम हो गई, जिसके कारण मछलियां तड़प-तड़पकर मर गईं।
घटना के बाद चिंताजनक स्थिति तब बन गई जब कुछ बच्चे और ग्रामीण नदी से मरी हुई मछलियों को निकालकर घर ले जाते दिखाई दिए। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि यदि जहरीले पानी में मरी मछलियों का सेवन किया गया तो इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसे लेकर क्षेत्र में भय और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीणों ने बताया कि अहिरन नदी का पानी आसपास की बस्तियों में घरेलू उपयोग और अन्य जरूरतों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में नदी का पानी दूषित होने की आशंका से लोग चिंतित हैं। कॉलोनीवासियों ने प्रशासन से तत्काल पानी का सैंपल लेकर जांच कराने तथा उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
स्थानीय नागरिकों ने यह भी मांग उठाई कि नदी में पड़ी मरी हुई मछलियों को तत्काल हटाया जाए, ताकि पानी और अधिक प्रदूषित न हो। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई और जांच नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग, मत्स्य विभाग और पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों की पहचान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विस्फोटक का उपयोग कर मछली मारना न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि यह वन्य जीव संरक्षण कानून के तहत गंभीर अपराध भी है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जानी चाहिए।

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