“बोरे-बासी के नाम पर 8 करोड़ का खेल! कांग्रेस पर केदार कश्यप का तीखा हमला, बताया ‘भ्रष्टाचार का प्रतीक’”



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***//**// रायपुर। प्रदेश के वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने मजदूर दिवस के अवसर पर ‘बोरे-बासी’ को लेकर दिए गए बयान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और कांग्रेस पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। कश्यप ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति को भी नहीं छोड़ा और ‘बोरे-बासी’ जैसे सांस्कृतिक प्रतीक के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला कर डाला।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भ्रष्टाचार अब एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। मजदूर दिवस जैसे पवित्र अवसर पर, जब श्रमिकों के सम्मान की बात होनी चाहिए थी, तब कांग्रेस नेताओं ने ‘बोरे-बासी’ के नाम पर करीब 8 करोड़ रुपए का घोटाला कर जनता के साथ विश्वासघात किया। कश्यप ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जनधन की लूट के लिए कोई अवसर नहीं छोड़ा और हर आयोजन को “इवेंट मैनेजमेंट” बनाकर सरकारी खजाने पर डाका डाला।
कश्यप ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पार्टी छत्तीसगढ़ की परंपरा और संस्कृति से कभी जुड़ी ही नहीं रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस “विलायती सोच” से प्रेरित होकर केवल दिखावे की राजनीति करती है, जबकि असल में उसकी प्राथमिकता सिर्फ सत्ता और संसाधनों की लूट है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सम्मान दिलाया है। डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य की परंपराओं को सहेजने और आगे बढ़ाने का काम हुआ, जबकि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही इन्हें नजरअंदाज कर दिया। कश्यप के अनुसार, कांग्रेस शासनकाल में ‘बोरे-बासी तिहार’ को सिर्फ प्रचार का माध्यम बनाया गया और इसके नाम पर करोड़ों रुपए विज्ञापन और आयोजनों में खर्च कर दिए गए, लेकिन मजदूर और किसान की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
कश्यप ने दीपक बैज के बयान को “छत्तीसगढ़िया अस्मिता का अपमान” बताते हुए कहा कि कांग्रेस अब संस्कृति के नाम पर राजनीतिक ढोंग कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन नेताओं ने पांच वर्षों तक ‘बोरे-बासी’ के नाम पर भ्रष्टाचार किया, वे आज किस मुंह से इसकी बात कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा के लिए छत्तीसगढ़ की संस्कृति कोई “वोट बैंक” नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा है। प्रदेश की जनता कांग्रेस के “दोमुंहे चरित्र” और “सांस्कृतिक पाखंड” को भली-भांति समझ चुकी है और आने वाले समय में इसका करारा जवाब देगी।
कश्यप ने अंत में कहा कि कांग्रेस ने संस्कृति के नाम पर जो “फिजूलखर्ची और बंदरबांट” की, वह गरीब जनता के साथ सीधा अन्याय है। अब समय आ गया है कि कांग्रेस अपने कृत्यों का जवाब दे और बताए कि आखिर ‘बोरे-बासी’ जैसे आयोजन के नाम पर करोड़ों रुपए कहां और कैसे खर्च किए गए।


