कोरबा में ‘ईंधन संकट’ से हाहाकार: 7 दिनों से पेट्रोल-डीजल की किल्लत, जनता सड़क पर आने को मजबूर



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***//** कोरबा,18 अप्रैल 2026
कोरबा नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों ईंधन संकट ने विकराल रूप ले लिया है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के पेट्रोल पंपों पर बीते 7 दिनों से पेट्रोल और डीजल की भारी कमी बनी हुई है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। स्थिति यह है कि सुबह से ही पंपों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं और अधिकांश वाहन बिना ईंधन लिए ही वापस लौटने को मजबूर हैं।
लंबी कतारों में इंतजार, फिर भी नहीं मिल रहा ईंधन
सुबह 6 बजे से ही पेट्रोल पंपों पर 2 से 3 किलोमीटर तक वाहनों की लाइनें लग जाती हैं। कई घंटों तक इंतजार करने के बाद जब उपभोक्ताओं की बारी आती है, तब तक “स्टॉक खत्म” का बोर्ड लगा दिया जाता है। इससे लोगों में भारी आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है।
किसानों पर संकट की मार, फसल पर खतरा
इस समय रबी फसल की कटाई और मिंजाई का कार्य अपने चरम पर है। डीजल की कमी के चलते थ्रेसर और ट्रैक्टर बंद पड़े हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा मंडरा रहा है। यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो फसल खराब होने की आशंका भी बढ़ती जा रही है।

आपात सेवाएं और स्कूल वाहन भी प्रभावित
ईंधन संकट का असर अब जरूरी सेवाओं पर भी साफ नजर आने लगा है। एम्बुलेंस और स्कूल बसों को भी डीजल के लिए भटकना पड़ रहा है, जिससे मरीजों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कालाबाजारी की आशंका से बढ़ी चिंता
स्थानीय स्तर पर यह भी शिकायतें सामने आ रही हैं कि कुछ निजी विक्रेता डीजल को 5 से 10 रुपये प्रति लीटर अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। इससे संकट और गहरा गया है तथा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनता की तीखी मांगें, आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय नागरिक संघर्ष समिति ने इस गंभीर स्थिति को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कई मांगें रखी हैं—
सभी पेट्रोल पंपों पर तत्काल पर्याप्त ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
जिला प्रशासन पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करे।
आपूर्ति सामान्य होने तक टोकन सिस्टम लागू कर किसानों और आपात सेवा वाहनों को प्राथमिकता दी जाए।
प्रतिदिन स्टॉक की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक की जाए ताकि अफरा-तफरी की स्थिति न बने।
समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो जनता को मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
ईंधन संकट के इस गहराते हालात ने प्रशासन और तेल कंपनियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार एजेंसियां इस समस्या का समाधान कितनी जल्द और प्रभावी तरीके से करती हैं।


