April 24, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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सप्तम दिवस की कथा में गूंजा भक्ति और भाव का महासागर: भगवान के 16108 विवाह, सुदामा चरित्र और परीक्षित के स्वर्गारोहण का भावपूर्ण वर्णन

 

 

महापौर संजू देवी राजपूत की गरिमामयी उपस्थिति, श्रद्धालुओं ने लिया कथा अमृत का रसपान
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//**📍 कोरबा। नगर निगम कोरबा क्षेत्र में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के सप्तम दिवस पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के सातवें दिन कथा वाचक पंडित श्रीकांत दुबे जी ने भगवान श्रीकृष्ण के 16108 विवाह, सुदामा चरित्र तथा राजा परीक्षित के स्वर्गारोहण का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायक वर्णन किया।
कथा के दौरान पंडित दुबे जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा 16108 विवाह केवल एक लीला नहीं, बल्कि यह संदेश है कि प्रभु हर भक्त को समान रूप से अपनाते हैं और उनकी रक्षा करते हैं। उन्होंने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए मित्रता, समर्पण और सच्ची भक्ति की मिसाल प्रस्तुत की, जिससे पांडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। वहीं राजा परीक्षित के स्वर्गारोहण प्रसंग में जीवन के अंतिम क्षणों में भक्ति और सत्संग के महत्व को विस्तार से समझाया गया।

 

 

 

कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। भजनों और संगीतमय प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा का श्रवण करते रहे और “हरे कृष्ण” के जयघोष से पूरा पंडाल गुंजायमान हो उठा।
इस अवसर पर नगर निगम कोरबा की महापौर संजू देवी राजपूत विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने कथा का श्रवण कर आयोजन की सराहना की और आयोजकों को शुभकामनाएं दीं।
🗣 महापौर संजू देवी राजपूत ने कहा:
“श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान है। भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र से हमें सेवा, समर्पण और मानवता का संदेश मिलता है। सुदामा चरित्र हमें सच्ची मित्रता और निस्वार्थ भाव का महत्व सिखाता है। ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का अवसर मिलता है। मैं इस भव्य आयोजन के लिए सभी आयोजकों को बधाई देती हूं।”
कार्यक्रम के अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ दिन की कथा का समापन हुआ। आयोजकों ने अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं से आगामी दिवसों में भी उपस्थित होकर कथा का लाभ लेने की अपील की।

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