घंटाघर में ‘द चाय बार’ पर गंभीर आरोप: सार्वजनिक सीढ़ी पर कब्जा, दीवार खड़ी कर रास्ता बंद… छात्रों और आमजन में भारी आक्रोश



नगर निगम, कलेक्टर और पुलिस तक पहुंची शिकायत — कॉम्प्लेक्स की सीढ़ी, बरामदा और सार्वजनिक स्थल पर अवैध कब्जे का आरोप, कार्रवाई की उठी मांग
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा शहर के व्यस्ततम और संवेदनशील क्षेत्र घंटाघर स्थित आई.डी.एस.एम.टी. कॉम्प्लेक्स में संचालित “द चाय बार” नामक दुकान के संचालक पर सार्वजनिक स्थल पर अवैध कब्जा, सीढ़ी बंद करने, दीवार खड़ी कर रास्ता रोकने और सार्वजनिक सुविधा को निजी उपयोग में लेने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
इस पूरे मामले को लेकर अब स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों और आसपास के नागरिकों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पालिक निगम कोरबा के आयुक्त को लिखित शिकायत सौंपते हुए तत्काल वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत की प्रतिलिपि महापौर, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और नगर निगम सभापति को भी भेजी गई है, जिससे मामला अब केवल स्थानीय असुविधा नहीं, बल्कि सार्वजनिक अधिकारों के हनन का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, घंटाघर स्थित आई.डी.एस.एम.टी. (बिलासा ब्लड बैंक के पास) कॉम्प्लेक्स में संचालित “द चाय बार” के संचालक द्वारा नगर निगम द्वारा सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाई गई सीढ़ी पर दीवार उठाकर अवैध कब्जा कर लिया गया है।
आरोप यह भी है कि सीढ़ी को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे वहां आने-जाने वाले लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी कहा गया है कि निगम के बरामदे को भी दुकान में समाहित कर लिया गया है और उसका उपयोग निजी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला सीधे तौर पर सार्वजनिक संपत्ति के अतिक्रमण और जनसुविधा में बाधा का गंभीर उदाहरण माना जाएगा।
सार्वजनिक रास्ता बंद, आमजन परेशान
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस सीढ़ी का उपयोग कॉम्प्लेक्स में आने-जाने वाले आम नागरिकों, दुकानदारों, छात्रों और अभिभावकों द्वारा किया जाता था, उसके बंद हो जाने से रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
रास्ता बाधित होने से लोगों को अनावश्यक रूप से घूमकर जाना पड़ रहा है, जिससे आमजन में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

शिकायत में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि सार्वजनिक उपयोग की जगह को निजी कब्जे में लेकर आम लोगों की सुविधा पर सीधा प्रहार किया गया है।
शहर के बीचों-बीच इस तरह का अतिक्रमण प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
नाबालिगों और छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा बुरा असर
मामले को और गंभीर बनाता है शिकायत का वह हिस्सा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उक्त दुकान के आसपास नशा, सिगरेट और हुक्का/धूम्रपान जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि दुकान के करीब 100 मीटर के दायरे में कई शिक्षण संस्थान और कोचिंग सेंटर संचालित हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आते-जाते हैं।
ऐसे में इस प्रकार का वातावरण शैक्षणिक और सामाजिक माहौल को दूषित कर सकता है।
अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों की चिंता यह है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो इसका सीधा नकारात्मक असर बच्चों और युवाओं पर पड़ सकता है।
प्रशासन से मांगी गई कड़ी कार्रवाई
शिकायत में प्रशासन से स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि “द चाय बार” के संचालक के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए:
सार्वजनिक सीढ़ी पर किए गए अवैध कब्जे को हटाया जाए
बनाई गई दीवार और अवैध निर्माण को तोड़ा जाए
सार्वजनिक बरामदे और रास्ते को फिर से आमजन के लिए खोला जाए
यदि आसपास आपत्तिजनक गतिविधियां हो रही हैं, तो उस पर भी कड़ी निगरानी और कार्रवाई की जाए
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में सख्त कदम नहीं उठाया गया, तो यह आने वाले समय में अवैध कब्जों को बढ़ावा देने वाला उदाहरण बन सकता है।
अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर
शहर के हृदय स्थल घंटाघर में इस प्रकार का मामला सामने आने के बाद अब निगाहें नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
लोगों का सवाल है कि क्या सार्वजनिक सुविधा को निजी कब्जे से मुक्त कराया जाएगा?
क्या आम जनता, छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की आवाज सुनी जाएगी?
या फिर शहर के बीचों-बीच सार्वजनिक स्थल पर अतिक्रमण यूं ही जारी रहेगा?
यह मामला अब केवल एक दुकान या एक कॉम्प्लेक्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह शहर की सार्वजनिक व्यवस्था, नागरिक अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन गया है।


