नक्सलवाद का ‘काउंटडाउन’ शुरू: 2026 तक भयमुक्त होगा बस्तर, भाजपा का कांग्रेस पर सीधा प्रहार!


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में दशकों से जारी हिंसा के दौर पर अब पूर्णविराम लगने वाला है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय ने हुंकार भरते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में ‘डबल इंजन’ सरकार ने नक्सलवाद की कमर तोड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब बस्तर में गोलियों की गूँज नहीं, बल्कि विकास की गूँज सुनाई देगी।
31 मार्च 2026: लाल आतंक की अंतिम विदाई
भाजपा प्रवक्ता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य अब केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि धरातल पर उतरती हकीकत है। बस्तर में अब नक्सलवाद कुछ ही पंचायतों तक सिमट कर रह गया है। सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और सरकार की सटीक रणनीति के कारण बड़े नक्सली कमांडर या तो ढेर हो चुके हैं या आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।
DRDO की 18 टीमें करेंगी ‘लैंडमाइन’ का सफाया
बस्तर की धरती को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है:
विशेष अभियान: नक्सलियों द्वारा बिछाए गए IED और प्रेशर बमों को खोजने के लिए DRDO की 18 विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
आधुनिक तकनीक: ये टीमें अत्याधुनिक उपकरणों के जरिए जमीन के नीचे छिपे ‘मौत के जाल’ को नष्ट करेंगी।
उद्देश्य: जवानों और स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ताकि बस्तर का कोना-कोना ‘निरापद’ हो सके।
कांग्रेस पर तीखा हमला: “नक्सलवाद की राजनीतिक लाभार्थी है कांग्रेस”
शिवनारायण पाण्डेय ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए उसे नक्सलियों का ‘संरक्षक’ करार दिया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
”कांग्रेस ने हमेशा नक्सलियों को ‘छोटा किसान’ बताकर सुरक्षा बलों का मनोबल गिराया है। झीरम घाटी जैसी दर्दनाक घटना पर राजनीति करने वाली कांग्रेस ने कभी नक्सलियों के खिलाफ कड़ा रुख नहीं अपनाया। इनके जनप्रतिनिधि नक्सलियों के सहयोग से चुनाव जीतते रहे हैं, इसीलिए कांग्रेस का ‘नक्सल प्रेम’ जगजाहिर है।”
बंदूक की जगह अब ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘विकास’
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बस्तर अब बदल रहा है। विकास का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है:
जनविश्वास: ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पण्डुम’ जैसे आयोजनों में हजारों आदिवासियों की भागीदारी शासन के प्रति बढ़ते विश्वास का प्रतीक है।
समृद्धि का मॉडल: सरकार केवल शांति नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे का ऐसा वर्ल्ड-क्लास मॉडल खड़ा कर रही है, जो पूरे देश के लिए मिसाल बनेगा।
विकास की मुख्यधारा: बस्तर का युवा अब बंदूक छोड़कर खेल और शिक्षा के जरिए अपना भविष्य संवार रहा है।

