ग्रामीण अंचल की बेटियों के सपनों को उड़ान दे रहा बालको का ‘कनेक्ट कोचिंग प्रोग्राम’


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** बालकोनगर, 12 फरवरी। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) सामुदायिक विकास के क्षेत्र में केवल शिक्षा सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं को सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य के तहत बालको सामुदायिक विकास द्वारा समर्थित भोरमदेव विद्यापीठ के माध्यम से कबीरधाम जिले के दूरस्थ और संसाधन-विहीन क्षेत्रों के युवाओं को निःशुल्क कोचिंग, मार्गदर्शन एवं अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल ग्रामीण अंचलों के मेधावी युवाओं के सपनों को नई दिशा और नई उड़ान दे रही है।

इस कनेक्ट कोचिंग कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित 20 अभ्यर्थियों को अनुभवी शिक्षकों द्वारा निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया गया। सभी विद्यार्थी विभिन्न गांवों से आते हैं और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि रखते हैं। किसी के माता-पिता खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं, तो किसी के पास पढ़ाई के लिए मूलभूत संसाधन तक उपलब्ध नहीं थे। इसके बावजूद विद्यार्थियों ने प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर तक की दूरी तय कर बालको द्वारा संचालित कोचिंग सेंटर में नियमित रूप से अध्ययन किया। आर्थिक सीमाएं, संसाधनों की कमी और दूर-दराज से रोज़ाना यात्रा जैसी चुनौतियों के बावजूद इन युवाओं के हौसले कभी कमजोर नहीं पड़े।
संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए सहयोगपूर्ण, अनुशासित और प्रेरणादायक वातावरण ने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को नई मजबूती दी। सही मार्गदर्शन, नियमित कक्षाएं, अध्ययन सामग्री और मेंटरशिप ने उनके भीतर यह विश्वास जगाया कि सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। यह कार्यक्रम केवल कोचिंग नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के जीवन को नई दिशा देने वाला एक मजबूत मंच बनकर उभरा है।
किसान परिवार से आने वाली अनुपा के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं कभी एक दूर का सपना हुआ करती थीं। सीमित संसाधनों और सुविधाओं के कारण उच्च स्तरीय तैयारी करना उनके लिए बेहद कठिन था। लेकिन बालको कनेक्ट कोचिंग पहल द्वारा संचालित भोरमदेव विद्यापीठ से जुड़ने के बाद उनके सपनों को नई उड़ान मिली। कवर्धा जिले के छोटे से गांव मंझोली से निकलकर अनुपा ने अपने समाज की पहली बेटी बनकर सरकारी परीक्षा में सफलता हासिल की। उन्होंने एसएससी-जीडी परीक्षा के माध्यम से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में चयन पाकर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है।
अनुपा ने भावुक होकर कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से सरकारी परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब संसाधन और सही मार्गदर्शन उपलब्ध न हों। बालको के कनेक्ट कोचिंग प्रोग्राम से जुड़े भोरमदेव विद्यापीठ ने मुझे एक व्यवस्थित अध्ययन वातावरण, निरंतर मेंटरशिप और लक्ष्य पर केंद्रित रहने का आत्मविश्वास दिया। मैं बालको की बेहद आभारी हूं कि उन्होंने यह केंद्र शुरू किया और मुझ जैसी छात्राओं पर भरोसा किया। इस अवसर ने मेरी ज़िंदगी बदल दी है। मुझे उम्मीद है कि मेरे जैसे गांवों की और भी बेटियां बड़े सपने देखने का साहस करेंगी।
कार्यक्रम से लाभान्वित अन्य युवाओं ने भी अपनी सफलता का श्रेय बालको सामुदायिक विकास, भोरमदेव विद्यापीठ के शिक्षकों और प्रबंधन को देते हुए आभार व्यक्त किया। सभी चयनित युवाओं ने नौकरी के साथ-साथ भविष्य में उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखने का संकल्प लिया है।
इन युवाओं की सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व के तहत समुदाय की वास्तविक जरूरतों को समझकर पहल की जाती है, तो वह केवल शिक्षा नहीं देती, बल्कि ग्रामीण भारत की बेटियों और युवाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल देती है। सही मार्गदर्शन, संसाधन और विश्वास मिल जाए, तो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले युवा भी अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। बालको सामुदायिक विकास भविष्य में भी ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को अवसर प्रदान कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और एक सशक्त, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य करता रहेगा।

