*’बस्तर पण्डुम’ समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं का एक भव्य उत्सव : देव*






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** *रायपुर।* भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने इस वर्ष बस्तर में ग्राम पंचायत स्तर से सम्भाग स्तर तक तीन चरणों में चल रहे ‘बस्तर पण्डुम’ को बस्तर संभाग की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं का एक भव्य उत्सव बताया है। श्री देव ने कहा कि इससे बस्तर की मिट्टी उसकी आत्मा और उसकी पहचान सजीव हो रही है। बस्तर पण्डुम का यह साफ संदेश है कि बस्तर की संस्कृति आज भी जीवित है और गर्व के साथ खड़ी है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि बस्तर पण्डुम में 12 पारंपरिक विधाओं (नृत्य, संगीत, शिल्प) के माध्यम से आदिवासी विरासत का प्रदर्शन हो रहा है। इसके जरिए आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और उसे विश्वव्यापी पहचान दिलाने का लक्ष्य है। इस कार्यक्रम में 12 प्रमुख विधाओं में बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन, और वन-औषधि शामिल हैं। यह आयोजन बस्तर की आत्मा और सामुदायिक जीवन को जीवंत रूप में प्रदर्शित करता है। बस्तर पण्डुम का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि स्थानीय लोक संस्कृति को एक बड़ा मंच प्रदान करना है। श्री देव ने कहा कि जिस जनजातीय विरासत को गढ़ने में लाखों पीढ़ियां लगीं और उसे बचाने में अनगिनत बलिदान हुए, उस सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की पहल मील का पत्थर है। बस्तर की असली पहचान उसके जंगल, झरने और गुफाएँ ही नहीं, बल्कि यहाँ के सीधे-सादे लोग हैं। बस्तर की वनस्पतियाँ केवल सम्पदा नहीं, बल्कि जीवनदायिनी औषधियाँ हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि बस्तर पण्डुम अपनी जड़ों की ओर लौटने का अवसर है। बस्तर की जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को दुनिया में वैश्विक पहचान मिली है। बस्तर पण्डुम में लोगों की स्वस्फूर्त भागीदारी इस बात का साफ संकेत है कि बस्तर की तरुणाई अब नक्सली आतंक की अंधेरी सुरंगों से बाहर निकलकर विकास, शांति और सुरक्षा के निर्भीक वातावरण में नए सूर्योदय के आलोक में अपना भविष्य गढ़ने के लिए तत्पर है। श्री देव ने कहा कि संसद सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अपने अभिभाषण में बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे की चर्चा प्रसन्नतादायक है। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में नक्सलवाद के खात्मे और बस्तर की आंतरिक सुरक्षा और शांति पर बात करके कहा है कि माओवादियों के बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण से लाखों लोगों के जीवन में सुरक्षा और खुशहाली लौटी है। बस्तर के युवा अब हथियारों के बजाय खेलों के जरिए अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। बस्तर के युवा अब ओलंपिक में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। हथियार छोड़ चुके व्यक्ति अब लोगों की सेवा कर रहे हैं। श्री देव ने बताया कि बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के लिए आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ का 7 फरवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी उद्घाटन करेंगी तथा नौ फरवरी को समापन सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी शामिल होंगे।
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