February 11, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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सेव वर्ल्ड’ की पुकार: जैव विविधता संरक्षण पर डॉ सुनीरा वर्मा की पुस्तक का भव्य विमोचन, पर्यावरण चेतना को मिला अकादमिक आयाम

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//* कोरबा तेजी से बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य, जैव विविधता पर मंडराते खतरों और संरक्षण की ठोस रणनीतियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती जीवविज्ञानी डॉ सुनीरा वर्मा के संपादन में प्रकाशित महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग के संचालनालय में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। पुस्तक का विमोचन छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ संतोष कुमार देवांगन द्वारा किया गया।

 

 

इस अवसर पर डॉ सुनीरा वर्मा ने कहा कि ‘सेव वर्ल्ड’ थीम पर आधारित यह पुस्तक प्रकृति, वन्यजीव, जल, थल और वायु सहित संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे बदलावों तथा उसके मानव समाज पर पड़ने वाले गहरे प्रभावों पर केंद्रित है। पुस्तक में जैव विविधता की अवधारणा, अनियंत्रित दोहन से उत्पन्न वर्तमान व भावी खतरे तथा संरक्षण की वैज्ञानिक और व्यावहारिक रणनीतियों को सरल एवं तथ्यपरक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
इसी क्रम में सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विषय पर आधारित एक अन्य पुस्तक का विमोचन अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेयी द्वारा किया गया। यह पुस्तक स्नातक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है, जिसमें पाठ्यक्रमानुसार इकाईवार प्रश्नों का सरल, सुव्यवस्थित और उपयोगी संग्रहण किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन में सहजता मिले।
कमला नेहरू महाविद्यालय, कोरबा में जूलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ सुनीरा वर्मा, सहायक प्राध्यापक श्रीमती निधि सिंह तथा विषय विशेषज्ञों की टीम द्वारा तैयार इस पुस्तक में जैव विविधता की अहमियत को रेखांकित करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि यदि समय रहते संरक्षण के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने पड़ सकते हैं। पुस्तक भावी पीढ़ी के लिए शुद्ध वातावरण, सुरक्षित पारिस्थितिकी और संतुलित विकास की आवश्यकता पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करती है।
इस उल्लेखनीय अकादमिक उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कमला नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ प्रशांत बोपापुरकर ने बुधवार को डॉ सुनीरा वर्मा एवं निधि सिंह को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विषय विशेषज्ञों के अनुभव और शोध पर आधारित यह पुस्तक न केवल शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सोचने और ठोस पहल करने की प्रेरणा भी देगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और पर्यावरण के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होगी और पर्यावरणीय चेतना को नई दिशा प्रदान करेगी।

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