फाल्गुन कृष्ण विजया एकादशी 2025: व्रत तिथि, महत्व और पौराणिक कथा




।।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है, जो इस वर्ष 24 फरवरी 2025, सोमवार को पड़ रही है। इस व्रत का विशेष धार्मिक महत्व है, क्योंकि इसके पालन से सभी पापों का नाश होता है और विजयश्री की प्राप्ति होती है।
विजया एकादशी व्रत तिथि एवं पारण समय
🔹 एकादशी तिथि प्रारंभ: 23 फरवरी 2025, रविवार दोपहर 01:36 बजे
🔹 एकादशी तिथि समापन: 24 फरवरी 2025, सोमवार दोपहर 01:15 बजे
🔹 व्रत पारण का समय: 25 फरवरी 2025, मंगलवार प्रातः 06:52 बजे से 09:08 बजे तक
व्रत के नियम एवं विशेष निर्देश
✅ व्रत उदय तिथि अनुसार 24 फरवरी 2025, सोमवार को रखें।
❌ चावल या चावल से बनी चीजों का सेवन न करें, भले ही व्रत न रखा हो।
विजया एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब रावण ने माता सीता का हरण कर लिया, तब भगवान श्रीराम ने हनुमान और सुग्रीव की सहायता से लंका पर आक्रमण करने की योजना बनाई। समुद्र पार करने की समस्या के समाधान के लिए उन्होंने ऋषि वकदाल्भ्य से परामर्श लिया।
ऋषि ने श्रीराम को विजया एकादशी का व्रत करने का सुझाव दिया। विधिपूर्वक इस व्रत का पालन करने के बाद श्रीराम ने समुद्र पार किया और लंका पर विजय प्राप्त की। इस व्रत को करने से हर कार्य में सफलता मिलती है और जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं।
विजया एकादशी व्रत का महात्म्य
ब्रह्माजी ने नारदजी से कहा था कि जो व्यक्ति इस व्रत को करता है या इसकी कथा सुनता है, उसे वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य लाभ मिलता है। यह व्रत समस्त संकटों से मुक्ति दिलाने वाला और विजयश्री प्रदान करने वाला है।



