फाल्गुन माह में कैसा हो खान-पान और दिनचर्या? जानें आयुर्वेदाचार्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा से



फाल्गुन माह में चने का सेवन न करें, नीमपत्र का सेवन करें – डॉ. नागेंद्र शर्मा
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **** हिंदी पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह 13 फरवरी 2025, गुरुवार से प्रारंभ होकर 14 मार्च 2025, शुक्रवार तक रहेगा। आयुर्वेदाचार्य एवं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के अनुसार, ऋतुचर्या का पालन करते हुए आहार-विहार में परिवर्तन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।
फाल्गुन माह में वातावरण शुद्ध एवं हरियाली से भरपूर होता है। यह समय ठंड से गर्मी की ओर बढ़ने का संकेत देता है, जिससे शरीर में कफ दोष बढ़ने की संभावना रहती है। इस कारण सर्दी, खांसी, बुखार, त्वचा रोग (खाज-खुजली) आदि होने की संभावना अधिक रहती है।
फाल्गुन माह में क्या खाएं?
✅ अनाज: जौ, चावल, बाजरा, ज्वार, मक्का, तुअर दाल, मूंग दाल
✅ फल: पपीता, केला, आँवला, अंगूर
✅ सब्जियाँ: गाजर, चुकंदर, बैंगन, गोभी, टमाटर, अदरक, सहजन की फली, पालक, बथुआ
✅ मसाले: हल्दी, काली मिर्च, सौंफ, दालचीनी, मीठा नीम, सूखा धनिया, जीरा
फाल्गुन माह में क्या न खाएं?
❌ अनाज: चना, मोंठ दाल, उड़द दाल
❌ सब्जियाँ: मूली, ककड़ी, अरबी
❌ फल: तरबूज, खरबूज, इमली
❌ अन्य: दही, खमीर वाली चीजें
दिनचर्या संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव
✅ क्या करें?
- सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- हल्का एवं सुपाच्य भोजन करें।
- शारीरिक व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें।
- नीम के 4-5 कोमल पत्तों का सेवन करें, जिससे शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलें और त्वचा रोगों से बचाव हो।
❌ क्या न करें?
- आलस्य न करें, श्रम एवं व्यायाम को नज़रअंदाज न करें।
- अधपके एवं कच्चे अन्न का सेवन न करें।
- दिन में सोने और रात में देर तक जागने से बचें।
विशेष परहेज
डॉ. नागेंद्र शर्मा के अनुसार, फाल्गुन माह में चने का सेवन वर्जित है। इससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, और व्यक्ति बीमार भी हो सकता है। अतः ऋतु के अनुसार आहार-विहार अपनाकर स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ें।



