February 11, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ जिलान्तर्गत 10, 11,12 जनवरी को वनवासी कल्याण आश्रम ‌द्वारा संचालित महर्षि वाल्मीकि आश्रम आईटीआई चौक बालको रोड कोरबा में गौरा पूजा महोत्सव एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन का आयोजन किया गया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामविचार नेताम आदिम जाति कल्याण विभाग अनुसूचित जाति पिछड़ा वर्ग, एवं कृषि मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, अध्यक्षता लखनलाल देवांगन वाणिज्य, उ‌द्योग एवं श्रम मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, विशिष्ट अतिथि प्रेमचंद पटेल विधायक कटघोरा, उमेश कच्छप प्रांतीय अध्यक्ष वनवासी विकास समिति रायपुर, पनत राम भगत कार्यकारी अध्यक्ष वनवासी कल्याण आश्रम जशपुर होंगे।
छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर में 26 दिसंबर 1952 ई को पूज्य रमाकांत केशव बालासाहेब देशपांडे ने जनजाति समाज के धर्म संस्कृति का संरक्षण एवं सर्वांगीण विकास के लिए अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना की गई। कोरबा में 1988 को आईटीआई के पीछे रामपुर में महर्षि वाल्मीकि आश्रम की स्थापना चार-पांच बच्चों को लेकर बालक छात्रावास के रूप में शुरू हुई, वर्तमान में 46 बालक महर्षि वाल्मीकि आश्रम कोरबा में रहकर अध्ययन कर रहे हैं।
वनवासी कल्याण आश्रम का कार्य पूरे देश भर में 14 आयाम के माध्यम से कार्य चल रहा है जिसमें शिक्षा, छात्रावास चिकित्सालय, ग्राम विकास, हित रक्षा, श्रद्धा जागरण, लोक कला प्रचार-प्रसार जनजाति संपर्क, जनजाति सुरक्षा मंच खेलकूद, नगरी कार्य, महिला कार्य युवा कार्य, के माध्यम से जनजाति समाज में कार्य चल रहा है।
जानकारी के अनुसार वर्तमान में देशभर के 63,926 ग्रामों में संपर्क कुल प्रकल्प संख्या 21,829 इन प्रकल्पों में कुल लाभार्थी 12,37,197 छात्रावास एवं वि‌द्यालय में वि‌द्यार्थी 11,1,323 अध्यनरत हैं, चिकित्सा कार्य में आरोग्य रक्षक चिकित्सा शिविर चिकित्सालय के माध्यम से वर्ष भर में 10,82,839 लोग लाभांवित हो रहे है।
श्रद्धा जागरण एवं जनजाति लोककला यह कल्याण आश्रम का प्रकल्प है इसी प्रकल्प के द्वारा गौरा पूजा महोत्सव एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन का आयोजन रखा गया है, जनजाति समाज वर्ष भर 12 माह 13 उत्सव मनाता है। कोरबा जिला के सभी जनजाति समाज परंपरागत रूप से गौरा पूजा को मानते हैं, यही पर्व महर्षि वाल्मीकि आश्रम में मना रहे हैं।
जानकारी देते हुए बताया जा रहा हैं की बैगा पुजेरी सम्मेलन करने का उद्देश्य ग्राम की सारी परंपरागत पूजा-पद्धति जन्म से मृत्यु तक के सारे संस्कार में इनका महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए इनका सम्मेलन करके बैगा एवं पुजेरी को सम्मानित करना और आज के अनुरूप इनका धार्मिक सामाजिक कार्य करने का प्रबोधन करने के लिए सम्मेलन रखा गया है।

 

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