July 22, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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त्रिनेत्र टाइम्स  कोरबा जिले में भोजली का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। भोजली का त्यौहार सिर्फ मित्रता का ही उत्सव नहीं है, बल्कि नई फसल की कामना के लिए गांवों में यह त्यौहार मनाया गया। जिले के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं एक-दूसरे को भोजली का दूब भेंट कर जीवन भर मित्रता का धर्म निभाने का संकल्प लेती हैं।
भोजली त्यौहार के मौके पर गाजा बाजा और राउत नाचा के साथ पुरुषों, महिलाएं और युवतियों ने भोजली की टोकरियां सिर पर रखकर तालाब किनारे पहुंची और विसर्जन किया गया। सभी पारंपरिक रस्मों के साथ तालाब में भोजली का विसर्जन किया गया।
कान में भोजली खोंस कर मितानी के अटूट बंधन में बंधने का पर्व भोजली तिहार 20 अगस्त को मनाया गया। छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक वैभव के प्रतीक भोजली पर्व की अपनी महत्ता है। परंपरागत के विभिन्न तालाबों और नदियों में विसर्जन की परंपरा है। भोजली विसर्जन के बाद इसके ऊपरी हिस्से को बचा कर रख लिया जाता है। जिसे लोग एक-दूसरे के कानों में खोंच कर भोजली, गियां, मितान, सखी, महाप्रसाद, मितान, दीनापान बदते हैं। तो वही भोजली को अच्छी फसल के संकेत से भी जोड़कर देखा जाता है।

 

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