January 22, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

कोरबा 54 गांव के हजारों ग्रामीणों ने बोला हल्ला, भू-विस्थापितों ने खदान कराया बंद

 


कुसमुंडा में कोयला परिवहन किया ठप्प
एसईसीएल ने छीना हमारे अधिकारों को-प्रशांत झा
कोरबा  सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया की अनुसांगिक कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित कुसमुंडा परियोजना में महाप्रबंधक कार्यालय के सामने 54 गांव के हजारों भू-विस्थापितों ने प्रदर्शन किया।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में हड़ताल की। जिससे कुसमुंडा खदान में कोयला परिवहन ठप्प रहा। खदान के अंदर गाड़ियों की लाइन लग गई। भू-विस्थापितों ने लंबित रोजगार प्रकरण, जमीन वापसी, पट्टा, बसावट और प्रभावित गांव की समस्याओं को लेकर मोर्चा खोला। इस दौरान कोयले की एक भी गाड़ी को अंदर या बाहर आने-जाने नहीं दिया गया। आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं।
इस आर्थिक नाकेबंदी को सफल बनाने के लिए गांव-गांव में चावल, दाल संग्रहण, मशाल जुलूस और अधिकार यात्रा का जत्था निकलकर नुक्कड़ सभाएं की गई। पर्चे वितरण के बाद हजारों भू-विस्थापित सड़क पर आंदोलन के लिए उतरे। आंदोलन को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी समर्थन दिया।​​​​​​​
* एसईसीएल के अधिकारियों ने बरती लापरवाही
माकपा जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि एसईसीएल के कुसमुंडा, गेवरा, दीपका और कोरबा सभी क्षेत्रों के भू-विस्थापितों के लंबित रोजगार, जमीन वापसी, पट्टा, बसावट और प्रभावित गांव की मूलभूत समस्याओं से निजात के लिए एसईसीएल के अधिकारियों ने कोई ठोस पहल नहीं की है, जिससे सब्र का बांध अब टूट चुका है।
उन्होंने आगे कहा कि एसईसीएल के अधिकारियों का ध्यान केवल भू-विस्थापितों के अधिकारों को छीन कर आपस में लड़वाना है। केवल कोयला उत्पादन को बढ़ाने और उच्च अधिकारियों को खुश करने की है, जिसमें जिला प्रशासन भी एसईसीएल के साथ खड़ा नगर आ रहा है। प्रबंधन और प्रशासन पहले एकजुट था अब सभी भू-विस्थापित संगठन अपने अधिकार को लेने के लिए एकजुट हो रहे हैं। भू-विस्थापित किसानों की एकजुटता के सामने कोई प्रबंधन टिकने वाली नहीं है।
* कोयला परिवहन रहेगा बंद
इस दौरान सभी ने एकजुट होकर एसईसीएल के खिलाफ संघर्ष करने का ऐलान कया। साथ ही कहा कि एसईसीएल पर भू-विस्थापितों को भरोसा नहीं है। एसईसीएल को कार्य धरातल पर करते हुए कार्यों का रिजल्ट दिखाना होगा। हर बार आंदोलन के बाद झूठा आश्वासन प्रबंधन देता है, जब तक निर्णायक निर्णय भू-विस्थापितों के पक्ष में नहीं होगा, तब तक कोयला परिवहन बंद रहेगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.