दो मौतों ने खोली सड़क सुरक्षा व्यवस्था की पोल, कुसमुंडा में फूटा जनआक्रोश; प्रशासन के सामने उठी जवाबदेही की मांग
1 min read

विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में मृतकों को श्रद्धांजलि देकर सड़क पर उतरे क्षेत्रवासी, कुसमुंडा थाने में सौंपा ज्ञापन; वैकल्पिक मार्ग, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने पर बनी सहमति, आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कुसमुंडा/कोरबा। कुसमुंडा क्षेत्र में हुए भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। दो परिवारों की खुशियां उजड़ने के बाद क्षेत्रवासियों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। हादसे ने एक बार फिर क्षेत्र की सड़क सुरक्षा व्यवस्था, आवागमन के सुरक्षित विकल्प और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कब तक लोग असुरक्षित सड़कों पर अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करते रहेंगे? क्या सड़क सुरक्षा के इंतजाम करने के लिए प्रशासन को हर बार किसी बड़े हादसे और दो अनमोल जिंदगियों के जाने का इंतजार करना पड़ेगा?
इसी आक्रोश के बीच विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष अमरजीत सिंह के नेतृत्व में कुसमुंडा एवं आसपास के क्षेत्रवासी एकजुट होकर सामने आए। लोगों ने हादसे में जान गंवाने वाले दोनों मृतकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कुसमुंडा थाना पहुंचकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं। इस दौरान सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से क्षेत्र में सड़क सुरक्षा के स्थायी इंतजाम करने, दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

दो मौतों के बाद जागा आक्रोश, अब केवल आश्वासन नहीं ठोस कार्रवाई चाहिए
प्रदर्शन के दौरान क्षेत्रवासियों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सड़क हादसे में दो लोगों की जान जाना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यदि समय रहते सुरक्षा संबंधी जरूरी इंतजाम किए जाएं तो ऐसी घटनाओं की आशंका को कम किया जा सकता है। लोगों का कहना था कि सड़क पर सुरक्षित आवागमन के लिए पर्याप्त व्यवस्था, वैकल्पिक मार्ग और अंधेरे स्थानों पर रोशनी बेहद जरूरी है। अब जरूरत केवल संवेदना व्यक्त करने की नहीं, बल्कि उन समस्याओं का स्थायी समाधान करने की है, जिनसे आम नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
तहसीलदार और थाना प्रभारी की मध्यस्थता में हुई चर्चा, मुआवजे पर बनी सहमति
क्षेत्रवासियों की मांगों और आक्रोश को देखते हुए तहसीलदार एवं कुसमुंडा थाना प्रभारी की मध्यस्थता में प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा की गई। बातचीत के दौरान मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग पर सहमति बनी। इसके साथ ही क्षेत्र में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की आवश्यकता को भी स्वीकार किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखी गई मांगों पर सकारात्मक चर्चा के बाद क्षेत्रवासियों को आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया।
अंधेरी सड़कों पर रोशनी की मांग, वैकल्पिक मार्ग को लेकर भी उठाई आवाज
क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट रूप से मांग की कि सड़क पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाई जाएं, ताकि रात के समय आवागमन करने वाले लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। कई स्थानों पर प्रकाश व्यवस्था का अभाव दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ाता है। ऐसे में केवल हादसे के बाद व्यवस्था बनाने के बजाय पहले से ही सुरक्षा के इंतजाम किए जाने चाहिए। लोगों ने वैकल्पिक मार्ग विकसित करने पर भी जोर दिया, ताकि यातायात का दबाव कम हो और नागरिकों को सुरक्षित आवागमन का विकल्प मिल सके।

मुआवजे के साथ जवाबदेही और स्थायी समाधान भी जरूरी
क्षेत्रवासियों का कहना है कि मृतकों के परिजनों को मुआवजा देना मानवीय जिम्मेदारी है, लेकिन इससे उन सवालों का जवाब नहीं मिलता जो इस हादसे के बाद खड़े हुए हैं। सड़क सुरक्षा की कमियों को दूर करना, दुर्घटना संभावित स्थानों को सुरक्षित बनाना और आवश्यक प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। लोगों की मांग है कि प्रशासन द्वारा किए गए वादों पर समयबद्ध कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह का दुख न सहना पड़े।
आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त, अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
ज्ञापन सौंपने और अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद मांगों पर सहमति एवं आश्वासन मिलने पर क्षेत्रवासियों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। हालांकि, आंदोलन समाप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि लोगों की चिंताएं भी समाप्त हो गई हैं। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। वैकल्पिक मार्ग का निर्माण, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था और मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिलाने संबंधी आश्वासनों को धरातल पर उतारना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कुसमुंडा का यह हादसा पूरे क्षेत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी है। दो लोगों की मौत के बाद उठी यह आवाज अब सड़क सुरक्षा के स्थायी इंतजाम की मांग बन चुकी है। क्षेत्रवासियों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें केवल घटना के बाद मिलने वाली संवेदनाएं और आश्वासन नहीं चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें आम नागरिक सुरक्षित घर से निकले और सुरक्षित घर लौट सके। दो जिंदगियां जा चुकी हैं, अब कम से कम तीसरी जिंदगी बचाने के लिए व्यवस्था को समय रहते जागना होगा।
