महादेव सट्टा सिंडिकेट का मास्टरमाइंड आखिर कानून के शिकंजे में! ओमान से घसीटकर भारत लाया गया सौरभ चंद्राकर
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दुबई में बैठकर चलाता था हजारों करोड़ का कथित अवैध सट्टा साम्राज्य, इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के बाद ओमान पुलिस ने पकड़ा; सीबीआई की गिरफ्त में आते ही खुलने लगीं नेटवर्क की परतें
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के बहुचर्चित और कथित काले कारोबार का प्रमुख प्रमोटर सौरभ चंद्राकर आखिरकार भारतीय जांच एजेंसियों के शिकंजे में आ गया है। वर्षों तक विदेश में बैठकर कथित तौर पर अवैध सट्टेबाजी का विशाल नेटवर्क संचालित करने वाला आरोपी अब भारत की कानून व्यवस्था के सामने है। ओमान से प्रत्यर्पण के बाद सीबीआई की विशेष टीम उसे भारत लेकर पहुंची। यह कार्रवाई महादेव सट्टा प्रकरण की जांच में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कामयाबियों में गिनी जा रही है।
जिस आरोपी तक पहुंचने के लिए भारतीय एजेंसियां लंबे समय से प्रयास कर रही थीं, उसे इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने भारत सरकार के माध्यम से ओमान के समक्ष प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। आखिरकार 1 नवंबर को सीबीआई की टीम उसे भारत लेकर पहुंच गई।
दुबई में था ठिकाना, ओमान में पकड़ा गया
जांच एजेंसियों के अनुसार सौरभ चंद्राकर वर्ष 2023 से दुबई में रहकर इस कथित सट्टा सिंडिकेट का संचालन कर रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसके द्वारा कथित तौर पर फर्जी पहचान और यात्रा दस्तावेजों का इस्तेमाल कर संयुक्त अरब अमीरात से ओमान पहुंचने की बात भी सामने आई है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के समन्वय और रेड कॉर्नर नोटिस के चलते उसका बच निकलना संभव नहीं हुआ।
जूस की दुकान से अंतरराष्ट्रीय सट्टा नेटवर्क तक का सफर!
सौरभ चंद्राकर का नाम उस समय देशभर में सुर्खियों में आया, जब महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा नेटवर्क की जांच शुरू हुई। भिलाई से जुड़े इस नेटवर्क के प्रमोटरों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी का विशाल तंत्र खड़ा करने के आरोप लगे। जांच में क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों के साथ विभिन्न आयोजनों पर ऑनलाइन सट्टा संचालित करने, देशभर में पैनल और शाखाओं का नेटवर्क फैलाने तथा बैंक खातों के माध्यम से रकम का लेनदेन करने के आरोप सामने आए।
दुबई में उसकी लगभग 200 करोड़ रुपये की भव्य शादी भी उस समय चर्चा का बड़ा विषय बनी थी। इस आयोजन में निजी विमानों से मेहमानों के पहुंचने और फिल्मी जगत की हस्तियों की मौजूदगी की खबरों ने पूरे मामले को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया था।
हजारों करोड़ का कथित कारोबार, हवाला और संरक्षण के गंभीर आरोप
सीबीआई की जांच के अनुसार इस सिंडिकेट के जरिए अवैध सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों के माध्यम से कई स्तरों पर स्थानांतरित किया जाता था। इसके बाद हवाला नेटवर्क के जरिए रकम विदेश भेजे जाने और सरकारी कर्मचारियों को कथित संरक्षण राशि दिए जाने के आरोप भी जांच में सामने आए हैं।
यह मामला केवल ऑनलाइन सट्टेबाजी तक सीमित नहीं है। इसमें कथित मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी दस्तावेज, बैंक खातों के दुरुपयोग, हवाला लेनदेन और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर पहलुओं की जांच की जा रही है।
दिल्ली कोर्ट में पेशी, अब रायपुर में खुलेगा राज!
भारत लाए जाने के बाद सौरभ चंद्राकर को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में पेश किया गया। 2 नवंबर को अदालत ने सीबीआई को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड प्रदान करते हुए उसे 4 नवंबर तक रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश करने का निर्देश दिया। बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाए, लेकिन दिल्ली की अदालत ने इस स्तर पर उस आपत्ति को स्वीकार नहीं किया। इस संबंध में अंतिम निर्णय का अधिकार रायपुर की संबंधित अदालत के समक्ष रहेगा।
अब किस-किस के चेहरे से उठेगा पर्दा?
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस कथित अंतरराष्ट्रीय सट्टा नेटवर्क के पीछे और कौन-कौन लोग थे? पैसा किन-किन रास्तों से पहुंचा? किन लोगों ने कथित रूप से इस कारोबार को संरक्षण दिया? किन बैंक खातों, हवाला संचालकों और नेटवर्क के संचालकों की इसमें भूमिका रही?
छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी महादेव सट्टा ऐप प्रकरण लंबे समय से विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा विषय रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को लेकर भाजपा ने राजनीतिक संरक्षण के आरोप लगाए थे, जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन आरोपों को खारिज किया था। अब जांच एजेंसियों की पूछताछ और न्यायालयीन कार्यवाही से ही इन आरोपों की वास्तविकता सामने आएगी।
विदेश में बैठकर कानून को चुनौती देने वाले कथित सट्टा सिंडिकेट के प्रमुख प्रमोटर की भारत वापसी ने पूरे मामले को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब देश की निगाहें रायपुर की अदालत और सीबीआई की जांच पर टिकी हैं। असली परीक्षा यह होगी कि इस नेटवर्क की आखिरी कड़ी तक पहुंचकर अवैध कारोबार में शामिल हर जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने लाई जाती है या नहीं।
