लगभग 200 वर्ष पुराना राम-जानकी मंदिर बदहाली से उबारने में जुटे प्रेमशंकर चंद्र, पैर टूटने के बाद भी नहीं डिगा संकल्प
1 min read
विश्वकर्मा जयंती पर शुरू कराया मंदिर का जीर्णोद्धार, निर्माण कार्य की निगरानी के दौरान हुए हादसे में टूटा दाहिना पैर; 4 से 5 लाख रुपये की लागत से संवर रहा पूर्वजों की आस्था का ऐतिहासिक धरोहर
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// भठोरा मालखरौदा आस्था केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती, बल्कि जब कोई व्यक्ति अपनी श्रद्धा, समर्पण और संकल्प से पूर्वजों की धरोहर को बचाने के लिए स्वयं आगे आता है, तो वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। ऐसा ही एक उदाहरण ग्राम भठोरा, तहसील मालखरौदा, जिला शक्ति में देखने को मिल रहा है। यहां लगभग 200 वर्ष पुराने भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भगवान शंकर एवं बजरंगबली के भव्य मंदिर का जीर्णोद्धार कराने का बीड़ा प्रेमशंकर चंद्र ने उठाया है।
बताया जाता है कि इस प्राचीन मंदिर का निर्माण लगभग दो शताब्दी पूर्व गांव के पूर्वजों ने कराया था। समय के साथ देखरेख और मरम्मत के अभाव में मंदिर की स्थिति जर्जर होती चली गई। गांव की धार्मिक आस्था और पूर्वजों की अमूल्य विरासत से जुड़े इस मंदिर की बदहाली देखकर प्रेमशंकर चंद्र, पिता स्वर्गीय बाबूलाल चंद्र, जो वर्तमान में शासकीय पॉलिटेक्निक कोरबा में कार्यरत हैं, ने इसके जीर्णोद्धार का संकल्प लिया।

17 सितंबर को लिया संकल्प, विश्वकर्मा जयंती से शुरू हुआ निर्माण
प्रेमशंकर चंद्र ने 17 सितंबर, भगवान विश्वकर्मा जयंती के शुभ अवसर पर मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ कराया। उनका उद्देश्य केवल मंदिर की मरम्मत कराना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए लगभग 200 वर्ष पुरानी धार्मिक विरासत को सुरक्षित और संरक्षित करना है। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद वे लगातार मंदिर पहुंचकर कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की निगरानी करते रहे।
22 अक्टूबर को हुआ हादसा, फिर भी नहीं टूटा हौसला
मंदिर निर्माण के दौरान 22 अक्टूबर को घिसाई का कार्य चल रहा था। सुबह लगभग 7 बजे प्रेमशंकर चंद्र निर्माण कार्य का निरीक्षण करने मंदिर पहुंचे। इसी दौरान वे सीढ़ी पर चढ़कर कार्य का परीक्षण कर रहे थे, तभी सीढ़ी फिसल गई और हादसे में उनका दाहिना पैर टूट गया। यह घटना उनके लिए शारीरिक रूप से कठिन जरूर रही, लेकिन मंदिर के प्रति उनका समर्पण और संकल्प कमजोर नहीं पड़ा।
परिवार और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बीच भी मंदिर निर्माण के प्रति उनकी चिंता और लगन बनी हुई है। उनके प्रयासों से निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है।
4 से 5 लाख रुपये आएगी अनुमानित लागत, समाज के सहयोग की भी जरूरत
मंदिर के जीर्णोद्धार में लगभग 4 से 5 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह पहल एक व्यक्ति की निजी श्रद्धा से आगे बढ़कर गांव की सामूहिक धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बचाने का प्रयास है। ऐसे में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि लगभग 200 वर्ष पुरानी इस धरोहर के संरक्षण की जिम्मेदारी केवल एक व्यक्ति तक सीमित क्यों रहे?
अब गांव और जनप्रतिनिधियों की बारी, कौन आएगा आगे?
ग्राम पंचायत, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, धर्मप्रेमियों, दानदाताओं और क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों को भी इस पुनीत कार्य में अपनी सहभागिता निभानी चाहिए। ग्राम पंचायत स्तर पर मंदिर की स्थिति और संरक्षण की आवश्यकता पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वहीं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी स्थल का निरीक्षण कर नियमानुसार संभावित सहयोग के रास्ते तलाशने चाहिए।
लगभग 200 वर्ष पुराना मंदिर केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि गांव के इतिहास, पूर्वजों की आस्था और धार्मिक परंपरा का प्रतीक है। यदि आज इसकी सुध नहीं ली गई तो आने वाली पीढ़ियां इस विरासत से वंचित हो सकती हैं।

एक व्यक्ति का संकल्प, पूरे समाज के लिए संदेश
प्रेमशंकर चंद्र का प्रयास यह संदेश देता है कि विरासत को बचाने के लिए केवल बातें नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति और समर्पण की जरूरत होती है। अपने पूर्वजों की धरोहर को नया स्वरूप देने के लिए उन्होंने जिस तरह पहल की है, वह निश्चित रूप से सराहनीय है।
अब जरूरत है कि ग्राम भठोरा के इस प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार को सामूहिक अभियान बनाया जाए, ताकि भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भगवान शंकर और बजरंगबली का यह प्राचीन धाम फिर से भव्य स्वरूप में स्थापित हो सके।
प्रेमशंकर चंद्र के इस पुनीत प्रयास पर भगवान श्रीराम की कृपा सदैव बनी रहे। जय श्रीराम!
