October 29, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

 

 

 

 

शिवाय हॉस्पिटल में समय पर उपचार, विशेषज्ञों की निगरानी और फिजियोथेरेपी-स्पीच थेरेपी के समन्वित प्रयासों से मिली नई उम्मीद | आवाज प्रभावित हुई, शरीर का बायां हिस्सा पड़ा कमजोर, उपचार के बाद दोबारा बातचीत करने और अपने पैरों पर चलने की स्थिति में पहुंचीं लक्ष्मी सोरी

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//  कोरबा। जिंदगी कभी-कभी ऐसी कठिन परीक्षा लेती है, जहां हर गुजरता पल परिवार की चिंता बढ़ा देता है। अचानक बोलने की क्षमता प्रभावित हो जाए, शरीर का एक हिस्सा काम करना बंद करने लगे और मरीज की हालत गंभीर हो जाए, तो उम्मीद की हर किरण अनमोल बन जाती है। लेकिन समय पर चिकित्सा सहायता, विशेषज्ञों की देखरेख और निरंतर पुनर्वास से सुधार की राह निकल सकती है। कोरबा की 63 वर्षीय श्रीमती लक्ष्मी सोरी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने गंभीर ब्रेन स्ट्रोक के बाद उपचार और पुनर्वास की प्रक्रिया से गुजरते हुए दोबारा बातचीत करने और अपने पैरों पर चलने की स्थिति तक पहुंचकर घर वापसी की। शिवाय हॉस्पिटल में उनके उपचार का यह सफर परिवार के लिए राहत और नई उम्मीद लेकर आया।

अचानक चक्कर, उल्टियां और बेहोशी ने बढ़ाई चिंता, बायां हिस्सा भी हुआ प्रभावित

14 मई 2026 की सुबह श्रीमती लक्ष्मी सोरी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तेज चक्कर आने लगे, उल्टियां होने लगीं और बेहोशी की स्थिति बन गई। उनके शरीर का बायां हिस्सा सुन्न और कमजोर पड़ गया, जबकि बोलने की क्षमता तथा याददाश्त पर भी असर दिखाई दिया। परिवार के सामने तत्काल उपचार की चुनौती थी। परिजनों ने बिना देर किए उन्हें न्यू बस स्टैंड, टी.पी. नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल पहुंचाया।

अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के बाद गंभीर इस्कीमिक ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि हुई। इस प्रकार के स्ट्रोक में मस्तिष्क के किसी हिस्से तक रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है, जिससे शरीर की गतिविधियों, बोलने और अन्य महत्वपूर्ण क्षमताओं पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन और उचित उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है।

डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में शुरू हुई उपचार और निगरानी की प्रक्रिया

लक्ष्मी सोरी की गंभीर स्थिति को देखते हुए शिवाय हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन एवं डायरेक्टर डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने उपचार और निगरानी की प्रक्रिया शुरू की। स्ट्रोक के कारण उनकी शारीरिक कार्यक्षमता और बातचीत करने की क्षमता प्रभावित हुई थी। ऐसे में मरीज की स्थिति के अनुरूप चिकित्सा देखभाल के साथ आगे की रिकवरी पर भी ध्यान दिया गया।

गंभीर बीमारी के दौरान परिवार के मन में कई तरह की आशंकाएं थीं। परिजनों के लिए सबसे बड़ी चिंता यही थी कि लक्ष्मी सोरी दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौट पाएंगी या नहीं। उपचार के साथ उनकी स्थिति में सुधार की दिशा में किए गए प्रयासों ने परिवार की उम्मीद को बनाए रखा। यह सफर केवल बीमारी से उबरने का नहीं, बल्कि रोजमर्रा की गतिविधियों और आत्मविश्वास को फिर से हासिल करने का भी था।

फिजियोथेरेपी और स्पीच थेरेपी ने रिकवरी की राह को बनाया मजबूत

ब्रेन स्ट्रोक के बाद मरीज की रिकवरी में पुनर्वास की अहम भूमिका होती है। लक्ष्मी सोरी के मामले में भी उपचार के साथ शारीरिक क्षमता को बेहतर बनाने और बोलने से जुड़ी परेशानियों में सुधार लाने पर ध्यान दिया गया। फिजियोथेरेपिस्ट अमन श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में फिजियोथेरेपी के माध्यम से उनकी शारीरिक गतिविधियों और चलने-फिरने की क्षमता को बेहतर बनाने के प्रयास किए गए।

इसके साथ स्पीच थेरेपी और मेडिसिन विभाग के समन्वित प्रयासों से बातचीत करने तथा याददाश्त से संबंधित समस्याओं में सुधार की दिशा में काम किया गया। नियमित देखभाल, पुनर्वास और परिवार के सहयोग ने उनकी रिकवरी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।

स्ट्रोक के बाद मरीज को दोबारा चलने, बातचीत करने और दैनिक गतिविधियां करने में सक्षम बनाने के लिए धैर्य और निरंतर अभ्यास की जरूरत हो सकती है। लक्ष्मी सोरी की रिकवरी में भी उपचार के साथ पुनर्वास की यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण रही।

गंभीर बीमारी के बाद घर वापसी, परिवार के चेहरे पर लौटी मुस्कान

लक्ष्मी सोरी के परिवार के लिए सबसे राहत भरा पल वह रहा, जब उनकी स्थिति में सुधार हुआ और वह स्वस्थ होकर घर लौटने की स्थिति में पहुंचीं। अस्पताल की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, उपचार और पुनर्वास के बाद वह दोबारा बातचीत करने लगीं और अपने पैरों पर चलने की स्थिति में घर लौटीं।

जिस परिवार ने अचानक गंभीर बीमारी और अनिश्चितता का सामना किया था, उसके लिए यह वापसी किसी बड़ी राहत से कम नहीं थी। लक्ष्मी सोरी की बेहतर हुई स्थिति ने परिजनों के मन में नई उम्मीद जगाई। गंभीर स्ट्रोक के बाद रिकवरी का यह अनुभव समय पर उपचार, विशेषज्ञों की देखरेख और पुनर्वास के महत्व को सामने लाता है।

हालांकि, ब्रेन स्ट्रोक के बाद हर मरीज की स्थिति और सुधार की गति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित जांच, दवाओं का पालन और आवश्यक पुनर्वास जारी रखना महत्वपूर्ण है।

शिवाय हॉस्पिटल में समन्वित चिकित्सा प्रयासों से मिली नई उम्मीद

लक्ष्मी सोरी का मामला इस बात को रेखांकित करता है कि गंभीर ब्रेन स्ट्रोक में शुरुआती उपचार के साथ आगे की देखभाल और पुनर्वास भी अहम हैं। डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा टीम, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और मेडिसिन विभाग के समन्वित प्रयासों ने उनकी रिकवरी की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शिवाय हॉस्पिटल, न्यू बस स्टैंड, टी.पी. नगर, कोरबा में हुए उपचार के बाद लक्ष्मी सोरी का घर लौटना उनके परिवार के लिए खुशी का अवसर बना। यह कहानी उन परिवारों के लिए उम्मीद का संदेश देती है, जो स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारी के समय कठिन परिस्थितियों से गुजरते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचना, विशेषज्ञों से उपचार लेना और पुनर्वास को गंभीरता से अपनाना मरीज की बेहतर रिकवरी में मददगार हो सकता है।

विश्व स्ट्रोक दिवस पर जरूरी संदेश: लक्षण दिखें तो एक-एक पल कीमती

विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानने और तत्काल चिकित्सा सहायता लेने के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है। स्ट्रोक के मामले में समय महत्वपूर्ण होता है और उपचार में देरी गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है।

अचानक चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा होना, हाथ या पैर में कमजोरी अथवा सुन्नपन, बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी, अचानक संतुलन बिगड़ना या देखने में समस्या होना स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत एंबुलेंस बुलाएं या मरीज को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाएं। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें और घरेलू उपचार में समय बर्बाद न करें।

लक्ष्मी सोरी की कहानी गंभीर बीमारी के बीच उम्मीद, उपचार और पुनर्वास के महत्व को सामने लाती है। यह याद दिलाती है कि ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर चिकित्सा सहायता और उचित देखभाल से मरीज की रिकवरी की संभावनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

More Stories

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.