बालकोनगर के दुर्गा पंडाल में लौटेंगी अतीत की यादें, पारंपरिक वस्तुओं से सजी अनूठी थीम बनी आकर्षण का केंद्र
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56 वर्षों की आस्था और परंपरा का भव्य उत्सव, सूप-टोकरी से लेकर हाथ के पंखों तक दिखेगी पुरानी जीवनशैली की झलक; 280 से अधिक तस्वीरों की प्रदर्शनी भी खींच रही ध्यान
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// बालकोनगर,17अक्टूबर नवरात्रि की भक्ति, भारतीय संस्कृति की विरासत और बीते दौर की यादों का अनूठा संगम इस बार बालकोनगर के सेक्टर-3 स्थित सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में देखने को मिल रहा है। यहां मां दुर्गा की आराधना के साथ ऐसी पारंपरिक सजावट की गई है, जो लोगों को पुराने समय की सादगी, संघर्ष और जीवनशैली से रूबरू करा रही है। पंडाल की विशेष थीम श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
बालको सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति द्वारा 16 से 19 अक्टूबर तक आयोजित चार दिवसीय उत्सव का शुभारंभ बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश सिंह ने किया। उन्होंने बालको परिवार के सदस्यों के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर कंपनी और क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं निरंतर प्रगति की कामना की।
सूप, टोकरी और हाथ के पंखों से साकार हुआ पुराने जमाने का संसार
इस वर्ष दुर्गा पंडाल की सजावट में आधुनिक चमक-दमक के बजाय पारंपरिक भारतीय जीवनशैली को प्रमुखता दी गई है। सूप, टोकरी, हाथ के पंखे, गमछे, बोरे और रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाली पुरानी वस्तुओं को सजावट का हिस्सा बनाया गया है। इन वस्तुओं के जरिए उस दौर की तस्वीर उकेरने का प्रयास किया गया है, जब सीमित संसाधनों के बीच भी जीवन सादगी, मेहनत और आपसी सहयोग के साथ आगे बढ़ता था।
पंडाल की यह अनूठी अवधारणा केवल सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, पारंपरिक वस्तुओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी बन रही है। बुजुर्गों के लिए यह सजावट पुरानी यादों को ताजा करने वाली है, वहीं युवाओं और बच्चों को बीते समय की जीवनशैली को करीब से समझने का अवसर दे रही है।
56 वर्षों से आस्था और परंपरा की पहचान बना दुर्गोत्सव
बालकोनगर का सार्वजनिक दुर्गा पूजा उत्सव पिछले 56 वर्षों से धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामुदायिक एकता का प्रतीक बना हुआ है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन और पंडाल की सजावट देखने पहुंचते हैं। इस आयोजन में पूजा-पाठ के साथ लोगों की सहभागिता, आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक जुड़ाव की झलक भी दिखाई देती है।
280 से अधिक तस्वीरों में कैद बालकोनगर की खूबसूरती
दुर्गा पूजा के साथ बालको द्वारा पंडाल के समीप चार दिवसीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी भी लगाई गई है। प्रदर्शनी में बालको परिवार के सदस्यों द्वारा खींचे गए 280 से अधिक छायाचित्र प्रदर्शित किए गए हैं। तस्वीरों में बालकोनगर की प्राकृतिक सुंदरता, बादलों के मनमोहक दृश्य, बारिश, धरती और प्रकृति के विविध रंगों को कैमरे में संजोया गया है।
हर तस्वीर अपने अलग नजरिए के साथ आसपास की दुनिया की खूबसूरती को सामने लाती है। यह प्रदर्शनी कर्मचारियों और उनके परिवारों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देने के साथ ही बालकोनगर के प्राकृतिक सौंदर्य को भी नई पहचान प्रदान कर रही है।
भक्ति, विरासत और कला का संगम
बालकोनगर का यह दुर्गा पूजा उत्सव इस बार अपनी पारंपरिक थीम और फोटोग्राफी प्रदर्शनी के कारण विशेष पहचान बना रहा है। एक ओर मां दुर्गा की आराधना से वातावरण भक्तिमय है, तो दूसरी ओर पुरानी जीवनशैली की झलक और प्रकृति के सुंदर छायाचित्र लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। आस्था, संस्कृति, कला और सामुदायिक सहभागिता से सजा यह आयोजन बालकोनगर की सांस्कृतिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास प्रस्तुत कर रहा है।
