कक्षा से निकलकर नदी तट तक पहुंची ‘हरित क्रांति’: हसदेव किनारे कमला नेहरू कॉलेज के युवाओं का महाश्रमदान, प्रकृति को प्लास्टिक मुक्त करने की ली शपथ
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नारे नहीं, काम करके दिखाया: प्राणीशास्त्र के विद्यार्थियों ने हसदेव नदी के घाटों से समेटा प्लास्टिक अपशिष्ट
प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर की दो-टूक: “प्रकृति से बैर नहीं, मित्रता ही मानव सभ्यता के बचने का एकमात्र रास्ता”
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// कोरबा। जब युवा सोच किताबी पन्नों की बंदिशों को तोड़कर धरातल पर उतरती है, तो बदलाव की गूंज दूर तक सुनाई देती है। ऐसा ही एक प्रेरक और ऊर्जा से भरा दृश्य कोरबा की जीवनदायिनी हसदेव नदी के तट पर देखने को मिला। मौका था ‘वन्यजीव सप्ताह-2026’ का, जहां कमला नेहरू महाविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के छात्र-छात्राओं ने केवल पर्यावरण पर भाषण सुनने के बजाय खुद हाथ में दस्ताने और बोरियां थामकर हसदेव तट की सफाई का बीड़ा उठाया।
वन विभाग (छत्तीसगढ़ शासन) के दिशा-निर्देशों एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अनूठे अभियान का मकसद साफ था—”सिर्फ ज्ञान नहीं, समाधान बनो।”
”पर्यावरण का पहला रक्षक विद्यार्थी वर्ग”: डॉ. प्रशांत बोपापुरकर
कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज सभागार में एक प्रेरणादायी उद्बोधन से हुई। प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा:
”हम जैव विविधता को नुकसान पहुंचाकर खुद स्वस्थ रहने की कल्पना नहीं कर सकते। प्राणीशास्त्र के हर विद्यार्थी की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह प्रकृति और मानव के बीच बिगड़े संतुलन को साधे। घर के आसपास के मूक जीव हों या वनों की संपदा, सबकी रक्षा का दायित्व युवाओं के कंधों पर है। प्लास्टिक रूपी धीमे जहर को रोकिए, तभी आने वाला कल शुद्ध और सुरक्षित होगा।”
हसदेव के आंचल से हटाया ‘प्लास्टिक का बोझ’
व्याख्यान समाप्त होते ही शिक्षक और विद्यार्थी सीधे हसदेव नदी के तट पर पहुंचे। देखते ही देखते पूरा तट स्वच्छता के महा-अभियान में तब्दील हो गया:
छात्र-छात्राओं ने घाटों और किनारों पर फैली सिंगल-यूज प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरों को चुन-चुनकर एकत्र किया।
एकत्र किए गए अपशिष्ट को सुरक्षित व वैज्ञानिक तरीके से निपटान के लिए भेजा गया।
तट पर मौजूद आम नागरिकों को भी नदी में कचरा व पूजन-सामग्री के साथ प्लास्टिक न फेंकने का विनम्र संदेश दिया गया।
एमएससी के इन होनहारों ने संभाली जागरूकता की कमान
कार्यक्रम में एमएससी प्राणीशास्त्र के छात्र-छात्राओं ने वन्यजीव संरक्षण और जल स्रोतों की सुरक्षा पर खुलकर विचार रखे। वैष्णवी कंवर, अनुराधा कंवर, स्वाति रजक, निधि, अजय, तुषार गोयल, साक्षी एवं प्रकृति समेत अन्य विद्यार्थियों ने प्रकृति को नुकसान न पहुंचाने और समाज को जागरूक करने का सामूहिक संकल्प लिया।
शिक्षकों ने कदम से कदम मिलाकर बढ़ाया हौसला
इस पूरे अभियान में कॉलेज के प्राध्यापकों ने न केवल मार्गदर्शन दिया, बल्कि स्वयं मैदान में उतरकर विद्यार्थियों के साथ श्रमदान किया। प्राणीशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ. सुनीरा वर्मा, वेदव्रत उपाध्याय एवं श्रीमती निधि सिंह ने छात्रों को नदी पारिस्थितिकी तंत्र (River Ecosystem) और जलीय जीवों पर प्लास्टिक के घातक प्रभावों की व्यवहारिक जानकारी दी।
विद्यार्थियों के इस प्रयास ने यह साबित कर दिया कि जागरूकता का सबसे बेहतर रूप जमीन पर उतरकर किया गया निस्वार्थ काम है।







