फरसवानी में विकास के नाम पर कैसी कहानी? कागजों में चमकता गांव, जमीन पर कीचड़, अंधेरा और बदहाल सड़कें!
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लाखों के विकास कार्यों के बीच ग्रामीणों का सीधा सवाल—नाली अधूरी क्यों, तालाब गंदा क्यों और स्ट्रीट लाइट के खंभों पर रोशनी कब आएगी? पुरेन्हा पारा की टूटी सड़क ने खोली जमीनी हकीकत की पोल
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// कोरबा/फरसवानी।
गांव के विकास की तस्वीर सरकारी कागजों में चाहे जितनी बेहतर दिखाई जाए, लेकिन फरसवानी पंचायत की जमीनी तस्वीर ग्रामीणों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। गांव की बदहाल सड़कें, अधूरी और टूटी नालियां, गंदगी से घिरा तालाब तथा बिना रोशनी के खड़े स्ट्रीट लाइट के खंभे अब पंचायत के विकास कार्यों और उनके रखरखाव पर सवालिया निशान बनते जा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर राशि स्वीकृत और खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर अपेक्षित परिणाम नजर नहीं आ रहे। ग्रामीणों ने अब सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि आखिर विकास के लिए आने वाली सरकारी राशि का उपयोग किन कार्यों में हुआ और उन कार्यों की गुणवत्ता एवं वास्तविक स्थिति की निगरानी किस स्तर पर की गई?
1. नाली निर्माण: कागजों में काम, जमीन पर बदहाल व्यवस्था!
फरसवानी के कई हिस्सों में नालियों की स्थिति ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। कहीं नाली अधूरी बताई जा रही है तो कहीं बनी हुई नालियां टूट-फूट और गंदगी से घिरी नजर आती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नालियों में पानी की निकासी सुचारु नहीं होने के कारण गंदा पानी सड़क पर बहता है। कई स्थानों पर नाली निर्माण की स्थिति ऐसी है कि उससे समस्या कम होने के बजाय लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
सवाल यह है कि यदि नाली निर्माण के लिए राशि खर्च हुई है, तो उसकी गुणवत्ता की जांच किसने की? निर्माण पूरा हुआ तो जल निकासी की व्यवस्था क्यों नहीं सुधरी?
2. तालाब बना गंदगी का अड्डा, सफाई व्यवस्था पर सवाल
गांव का तालाब, जो ग्रामीणों की जरूरतों और निस्तारी का महत्वपूर्ण साधन होना चाहिए, वहां सफाई और रखरखाव को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं।
तालाब के आसपास कचरा और गंदगी जमा होने की बात ग्रामीणों ने कही है। पानी की स्वच्छता और नियमित सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर यदि नियमित सफाई और रखरखाव की व्यवस्था है, तो फिर तालाब की यह स्थिति क्यों बनी हुई है?
तालाब की सफाई के नाम पर यदि राशि खर्च की गई है तो उसका विवरण सार्वजनिक किया जाए और ग्रामीणों को बताया जाए कि सफाई कब-कब कराई गई।
3. स्ट्रीट लाइट के खंभे खड़े, लेकिन रोशनी गायब!
फरसवानी में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। कई स्थानों पर खंभे तो दिखाई देते हैं, लेकिन उन पर रोशनी की व्यवस्था नहीं होने अथवा लाइट खराब होने की शिकायत सामने आ रही है।
शाम होते ही कई हिस्सों में अंधेरा छा जाने से ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी होती है। खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए रात में आवागमन मुश्किल होने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों का सीधा सवाल है—
जब स्ट्रीट लाइट के खंभे लगाए गए हैं तो उन पर लाइट कब लगेगी? जो लाइटें लगाई गई थीं, वे बंद हैं तो उनका रखरखाव कौन करेगा? और खरीद एवं मरम्मत पर खर्च हुई राशि का हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
4. पुरेन्हा पारा की सड़क: विकास के दावों को आईना दिखाती बदहाली
फरसवानी पंचायत के पुरेन्हा पारा की सड़क की स्थिति ग्रामीणों की सबसे बड़ी शिकायतों में शामिल है। सड़क पर गड्ढे, उखड़ी गिट्टियां और खराब मार्ग के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश के दौरान स्थिति और खराब होने की बात ग्रामीणों ने कही है। बच्चों, बुजुर्गों और आवश्यक सेवाओं के वाहनों के आवागमन को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत को लेकर कई बार ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
सवाल साफ है—जब सड़क ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरत है, तो उसकी मरम्मत और रखरखाव को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई?
5. ग्रामीणों की मांग—विकास कार्यों का पूरा हिसाब सामने आए
अब ग्रामीण केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पंचायत के विकास कार्यों का स्पष्ट और सार्वजनिक हिसाब चाहते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत में नाली, सड़क, तालाब सफाई, स्ट्रीट लाइट सहित अन्य विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि, खर्च राशि, कार्य एजेंसी, कार्य पूर्णता की स्थिति और गुणवत्ता की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सभी कार्य नियमानुसार और गुणवत्तापूर्ण हुए हैं तो उनके दस्तावेज और खर्च का विवरण सामने रखने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
6. सबसे बड़ा सवाल—कहां गया विकास का पैसा?
फरसवानी के ग्रामीणों के बीच अब सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर है कि पंचायत को मिलने वाली विकास राशि का वास्तविक उपयोग किस तरह हुआ।
क्या नाली का काम पूरा हुआ?
क्या तालाब की नियमित सफाई हुई?
क्या स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव हुआ?
क्या पुरेन्हा पारा की सड़क के लिए मरम्मत का प्रस्ताव भेजा गया?
यदि प्रस्ताव भेजा गया तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है?
और यदि राशि स्वीकृत हुई, तो उसका उपयोग कहां हुआ?
इन सवालों का जवाब पंचायत और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।
7. जांच हुई तो सामने आ सकती है पूरी तस्वीर
ग्रामीणों की शिकायतों को देखते हुए अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग पंचायत के विकास कार्यों की स्थलीय जांच करे। स्वीकृत कार्यों और वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाए तथा निर्माण की गुणवत्ता, भुगतान और उपयोगिता की जांच की जाए।
यदि दस्तावेजों में कार्य पूर्ण दर्ज हैं, तो मौके पर उनकी स्थिति भी सामने आनी चाहिए। वहीं यदि कोई कार्य अधूरा है तो उसके लिए जिम्मेदारी तय करने और उसे पूरा कराने की कार्रवाई होनी चाहिए।
ग्रामीणों का दो टूक संदेश—कागजों पर नहीं, जमीन पर चाहिए विकास
फरसवानी के ग्रामीण अब सवालों के जवाब चाहते हैं। उनका कहना है कि गांव के विकास की तस्वीर फाइलों और कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सरकारी राशि जनता की सुविधा के लिए है और जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके गांव में कितना पैसा आया, कहां खर्च हुआ और उसके बदले जमीन पर क्या काम हुआ।
फरसवानी में उठ रहे सवालों ने अब पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर चर्चा छेड़ दी है। देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इन शिकायतों का संज्ञान लेकर स्थलीय जांच कराते हैं या फिर ग्रामीणों के सवाल जवाब के इंतजार में ही रह जाते हैं।







