चार दिन से दहशत का कारण बना बंदर आखिर पिंजरे में कैद, वन विभाग-नोवा नेचर ने जंगल में छोड़ा
1 min read



राहगीरों और बच्चों को दौड़ाने की शिकायतों के बाद मचा था हड़कंप, कमरे में घुसते ही टीम ने संभाला मोर्चा; करीब चार लोगों को काटने की भी सामने आई थी जानकारी
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**// कोरबा। कटघोरा वनमंडल के हरदी बाजार क्षेत्र में पिछले चार-पांच दिनों से लोगों के बीच दहशत का कारण बने जंगली बंदर का आखिरकार सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। लगातार लोगों को दौड़ाने और आक्रामक व्यवहार की शिकायतों के बाद वन विभाग और नोवा नेचर की टीम सक्रिय हुई और कई घंटों की सतर्कता के बाद बंदर को सुरक्षित पकड़कर उसके प्राकृतिक रहवास जंगल में छोड़ दिया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार बंदर राह चलते लोगों, बच्चों और बड़ों को दौड़ाने के साथ काटने की कोशिश कर रहा था। इस दौरान करीब चार लोगों को बंदर द्वारा काटे जाने की जानकारी भी सामने आई, जिसके बाद क्षेत्र में भय का माहौल और गहरा गया। स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी।
सूचना मिलते ही वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रेस्क्यू की कार्रवाई शुरू की। वनमंडलाधिकारी कटघोरा जितेंद्र कुमार उपाध्याय के निर्देशानुसार उप वनमंडलाधिकारी हितेश ठाकुर के मार्गदर्शन तथा पाली वन परिक्षेत्र अधिकारी भोगेश्वर बंजारे के नेतृत्व में टीम को मौके पर भेजा गया। नोवा नेचर संस्था के जितेंद्र सारथी की टीम से बबलू, राकेश मानिकपुरी और कमल चंद्रा भी रेस्क्यू अभियान में शामिल हुए।
कमरे में घुसा बंदर और टीम ने पल भर में संभाला मोर्चा
रेस्क्यू के दौरान बंदर अचानक एक कमरे में प्रवेश कर गया। टीम ने इसी मौके को देखते हुए बिना जल्दबाजी किए सावधानीपूर्वक रेस्क्यू प्रक्रिया को अंजाम दिया। वन विभाग और नोवा नेचर की टीम ने सुरक्षित तरीके से जाल की मदद से बंदर को काबू में लिया और उसे पिंजड़े में रखा। इसके बाद उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उसके प्राकृतिक रहवास जंगल में छोड़ दिया गया।
बंदर के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद हरदी बाजार क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली। पिछले कई दिनों से जिस बंदर की वजह से लोग विशेषकर बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे, उसके जंगल में पहुंचाए जाने से क्षेत्र में स्थिति सामान्य हुई।
वन्यजीव दिखे तो भीड़ नहीं, सूचना दें
रेस्क्यू टीम ने लोगों से अपील की कि वन्यजीवों के रिहायशी क्षेत्रों में पहुंचने पर उन्हें घेरने, छेड़ने या पकड़ने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में भीड़ लगाने से वन्यजीव और अधिक आक्रामक हो सकता है और लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। वन विभाग को तत्काल सूचना देकर प्रशिक्षित टीम के माध्यम से सुरक्षित रेस्क्यू कराना ही उचित कदम है।
विशेषज्ञों के अनुसार भोजन-पानी की तलाश, प्राकृतिक आवास में बदलाव अथवा अन्य कारणों से वन्यजीव कई बार मानव बस्तियों की ओर पहुंच जाते हैं। ऐसे समय में इंसानों और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संयम बरतना जरूरी है।
इस रेस्क्यू अभियान में ड्यूटी रेंजर नमित तिवारी, महेंद्र देवांगन तथा नोवा नेचर संस्था से बबलू, राकेश मानिकपुरी और कमल चंद्रा की विशेष भूमिका रही। टीम की सतर्कता और सुरक्षित रेस्क्यू से संभावित अप्रिय स्थिति को टालते हुए बंदर को उसके प्राकृतिक वातावरण में वापस पहुंचाया गया।







